Friday, February 3, 2017

राजस्थान के रेगिस्तान का प्रवेश द्वार है चुरु

राजस्थान के चुरु जिले को विशाल मरुस्थल थार का प्रवेश द्वार कहा जाता है। भले ही चुरु रेगिस्तान का हिस्सा नहीं है पर यहां से मानो रेगिस्तानी क्षेत्र की शुरुआत होने लगती है। यह शहर दिल्ली से सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।  दिल्ली से बीकानेर जाने वाली लाइन पर चुरु जंक्शन रेलवे स्टेशन पड़ता है। दिल्ली से चलने वाली सालासर सुपर फास्ट एक्सप्रेस 11 बजे के आसपास चुरु पहुंचती है, तो चुरु रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर बने म्युरल्स आपका स्वागत करते हैं। लगता है कि आप राजस्थान में पधार चुके हैं। राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या 65 पाली और अंबाला जैसे शहरों को चुरु से जोड़ता है। शेखावटी के दूसरे शहरों की तरह चुरु भी अपने हवेलियों के लिए प्रसिद्ध है। इन हवेलियों में बने झरोखे खास तौर पर लोगों का मन मोहते हैं।

क्यों हो जाता है सबसे ठंडा
राजस्थान का चुरु शहर। अक्सर सर्दियों में खबरों में रहता है। मैदानी इलाके में पारा सबसे अधिक चुरु में गिरता है। आखिर क्यों। वैसे तो चुरु जिला राजस्थान के शेखावटी क्षेत्र का हिस्सा है जो रेगिस्तान तो नहीं पर रेगिस्तान के काफी करीब जरूर है। चुरु जिला मुख्यालय है।जनवरी में  चुरु शहर का तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। सर्दियों में यह राजस्थान का सबसे ठंडा शहर हो जाता था। साल 2017 में11 जनवरी को चुरु का तापमान माइनस 1.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। 
चुरु शहर के बीचों बीच चुरु का किला है। यह किला 400 साल पुराना है। हालांकि यह किला बेहतर रखरखाव में नहीं दिखाई देता। चुरु आबादी में ज्यादा बड़ा शहर नहीं है। साल 2011 की जनगणना में यह 1.20 लाख आबादी वाला शहर था। चुरु शहर की स्थापना 1620 में जाट बहादुर चुहारु ने की थी। लंबे समय तक यह इलाका बीकानेर रियासत का हिस्सा रहा।
सालासर बालाजी का मंदिर - चुरु जिले में प्रसिद्ध सालासार बालाजी का मंदिर है। वहां पहुंचने के लिए आप रतनगढ़ उतर सकते हैं। यहां से सालासर 45 किलोमीटर है। अगर सुजानगढ़ उतरते हैं तो वहां से सालासर बालाजी की दूरी 25 किलोमीटर है। दोनों शहरों से सालासर बालाजी के लिए बस सेवा उपलब्ध है। चुरु जिले में प्रसिद्ध संत जौहर वीर गोगाजी का भी जन्म हुआ।

गीतकार भरत व्यास का शहर 
एक और रोचक बात हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध गीतकार भरत व्यास का भी जन्म चुरु जिले में हुआ था। उनका बचपन कोलकाता में गुजरा। भरत व्यास ने 1943 से 1960 के दौर में बड़े ही मधुर गीतों का सृजन किया। ए मालिक तेरे बंदे हम, ये कौन चित्रकार है... जैसे गीत उनके सृजन हैं।

भरत व्यास ने तमाम धार्मिक फिल्मों के लिए भी गीत लिखे। पर उनकी कलम रुमानी गीतों पर भी चली। भरत व्यास के रचना संसार से मुझे जो गीत बार बार सुनना पसंद है, वह है- फिल्म गूंज उठी शहनाई का गीत – जीवन में पिया तेरा साथ रहे... 1959 में आई फिल्म के लिए लता और रफी के गाए इस गीत को वसंत देसाई ने संगीतबद्ध किया था।

फिल्म गूंज उठी शहनाई के सारे गीत भरत व्यास ने ही लिखे थे। दिल का खिलौना हाय टूट गया ...तेरे सुर और मेरे गीत जैसे गीत भी सुपर हिट हुए थे। पता नहीं चुरु के लोग भरत व्यास को कितना याद करते हैं, पर मुझे चुरु पहुंचने पर भरत व्यास खूब याद आए।

भरत व्यास को राजस्थान से बड़ा लगाव था। 1949 में उन्होंने रंगीला राजस्थान नामक फिल्म का निर्देशन भी किया था। भरत व्यास को बचपन से ही गीत, नाटक अभिनय से लगाव था। कोलकाता में बचपन के दिनों में थियेटर में पर्दा खींचने का काम किया करते थे। 18 दिसंबर 1918 को चुरु में जन्में भरत व्यास का मृत्यु 1983 में मुंबई में हुई।
--विद्युत प्रकाश मौर्य 

( CHURU, RAJSTHAN, BHARAT VYAS, SALSAR BALAJEE, COLDEST CITY ) 

3 comments:

  1. This comment has been removed by a blog administrator.

    ReplyDelete
  2. सर सालासर के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन सुजानगढ है। यहां से सालासर 25 किमी है। यह स्टेशन भी दिल्ली - जोधपुर लाईन पर है। रतनगढ़ से 45 किमी दूर।

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपकी जानकारी बिल्कुल दुरुस्त है।

      Delete