Thursday, February 23, 2017

रेत के टीलों के बीच डूबता सूरज – एन इवनिंग इन सम सैंड ड्यून्स

सम सैंड ड्यून्स। जैसलमेर की सबसे रोचक और रोमांटिक लोकेशन है। हर जैसलमेर आने वाला सैलानी वहां जाना चाहता है। जाए भी क्यों नहीं। जिस तरफ आप पहाड़ों पर बर्फ और समंदर के किनारे लहरें देखने जाते हैं ठीक उसी तरह लोग थार में सैंड ड्यून्स देखने आते हैं। न जाने कितनी फिल्मों की शूटिंग इन रेगिस्तानों में हुई है। रेशमा और शेरा, सेहरा, लम्हे जैसी फिल्मों में रेगिस्तान के नजारे देखे जा सकते हैं। सैंड ड्यून्स मतलब रेत के टीले। जहां आप कभी ऊपर कभी नीचे उतर चढ सकें और रेगिस्तान का असली मजा ले सकें।

जैसलमेर के निकटस्थ सम सैंड ड्यून्स की दूरी शहर से 40 किलोमीटर है। ज्यादातर सैलानी यहां शाम को जाना पसंद करते हैं। दिन भर बालू गर्म रहता है। वहीं शाम को यहां सूर्यास्त देखने का नजारा अदभुत होता है। सैलानियों को लुभाने के लिए अक्तूबर से फरवरी तक सम में टेंट सिटी बस जाती है। तमाम होटल वाले यहां टेंट में रात्रि विश्राम का पूरा इंतजाम करते हैं। ये टेंट लग्जरी के हिसाब से अपनी दरें तय करते हैं। कम से कम ढाई हजार रुपये एक रात के लेकर इससे ऊपर कुछ भी हो सकता है। आमतौर पर इस पैकेज में खाना नास्ता और मनोरंजन शामिल होता है।

सैंड ड्यून्स में टेंट सिटी में रात गुजारने के लिए पैकेज आप जैसलमेर के होटल से ही ले सकते हैं. इस तरह का पैकेज तमाम टैक्सी वाले भी दिलाते हैं। इन सबमें उनका कमीशन तय होता है। कुछ सैंड ड्यून्स में स्थित टेंट सिटी की वेबसाइट भी है जहां आप सीधे बात कर सकते हैं। इन टेंट सिटीं में आम तौर पर रात को मनोरंजन के लिए राजस्थानी लोक संगीत का इंतजाम होता है। आपका पारंपरिक तरीके से स्वागत होता है। बोनफायर जलाकर राजस्थानी लोकनृत्य देखना और फिर बफे डिनर का आनंद उठाना, यहां आने वाले सैलानियों का प्रिय मनोरंजन का साधन है।

हमारी टैक्सी शाम को चार बजे कनोई गांव पहुंचती है। दोनों तरफ टेंट सिटी आरंभ हो चुकी है। कुछ लोग पारा ग्लाइडिंग के भी मजे ले रहे हैं। पार्किंग के पास पहुंचने पर अनगनित गाड़ियों की कतार दिखाई दे रही है। हमारे पास कुछ ऊंट और ऊंट गाड़ी वाले आ जाते हैं। कैमल सफारी के लिए। ऊंट गाड़ी में जाने के लिए 300 रुपये तक. इसमें कई लोग बैठ सकते हैं। वहीं ऊंट पर सवारी के लिए 100 रुपये या अधिक। ऊंट पर दो लोग बैठ सकते हैं। अक्सर नव विवाहित युगल ऊंट पर बैठना पसंद करते हैं। कोई आधे किलोमीटर का सफर है। हमने पैदल चलना पसंद किया। चहलकदमी करते ऊंटों को देखते हुए। कई बार ऊंट रेगिस्तान में तेजी से दौड़ लगते हैं। ऊंट के बारे में बचपन से पढ़ता आया हूं कि इन्हें मरुस्थल का जहाज कहते हैं। द्वारका और पोरबंदर में ऊंट की सवारी का मजा भी ले चुका हूं। यहां मैंने ऊंटों के बोलते हुए सुना। वे अपने महावत से संवाद करते हैं। कई बार चलने को कहते हैं तो कई बार अड़ जाते हैं।

दो घंटे इन रेगिस्तानों में हजारों लोगों को मौज मस्ती करते देखना सुखकर लगता है। लोग बालू पर फिसलते नजर आते हैं। बीच बीच में राजस्थानी लोक गायक आपके मनोरंजन के लिए तान छेड़ते नजर आते हैं। कई जगह समूह में आए लोग मस्ती में डूबे नजर आते हैं। इसी बीच कुछ लोग जीप सफारी के नाम पर मरुस्थल में अपनी जीप घुसा देते हैं। पर बड़ी-बड़ी एसयूवी यहां फंस जाती है और लोग उसे निकालने की कोशिश में नजर आते हैं। इस रेगिस्तान में चाय बेचने वाले कुछ बालक नजर आते हैं। न चाहते हुए उनसे एक चाय लेकर पी लेता हूं। उनकी मेहनत को सलाम। और सूरज पश्चिम में डूबने लगा है। अंधेरा होने लगा है। पर लोग जाने का नाम नहीं ले रहे हैं। यहां बिजली का कोई इंतजाम नहीं है इसलिए अपने टेंट की ओर लौटना ही पड़ेगा।

सड़क के किनारे चाय नास्ते की दुकानें चल रही हैं। पर हमें यहां रात नहीं गुजारनी। हम अपनी टैक्सी से वापस रात नौ बजे तक पहुंच जाते हैं जैसलमेर शहर के हनुमान जंक्शन। यहां से हनुमान ट्रैवल्स की लग्जरी बस से रात 10.15 बजे हमें जोधपुर के लिए प्रस्थान करना है। मैं हनुमान ट्रैवल्स के दफ्तर में अपना बैग रख देता हूं और बदल के एक होटल में खाने पहुंच जाता हूं। भला राजस्थान में क्या खाना। वही दाल बाटी चूरमा।    
- vidyutp@gmail.com

(A EVENING IN SUM SAND DUENS, KANOI VILLAGE, JAILSALMER, CAMEL SAFARI )

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