Wednesday, February 15, 2017

जैसलमेर - मैजिक बेडशीट... नो नीड टू वियाग्रा

देस मेरा रंगरेजी बाबू। क्या क्या अनूठी चीजें नहीं हैं अपने इस देश में । क्या आपने किसी ऐसी मैजिक बेडशीट के बारे में सुना है जिस पर सोने के बाद वियाग्रा की कोई जरूरत नहीं रह जाए। तो चलिए आपको दिखाते हैं ऐसी मैजिक बेडशीट। जैसलमेर फोर्ट से निकलने के बाद थोड़ी भूख लगी थी। सोचा पेट पूजा कर ली जाए। एक दुकान पर पोहा खाने गया। 20 रुपये में मे पोहा की प्लेट। प्याज टमाटर, सेव धनिया पत्ते के साथ सजा कर पेश किया। पोहा खाते खाते समाने एक बोर्ड पर नजर पड़ी। जिस पर लिखा था, मैजिक बेडशीट। नो नीड टू वियाग्रा। मैं नजदीक जाकर उस बेडशीट को निहारता हूं।
मेरी तरह सैकड़ो लोग ऐसा करते होंगे। कुछ लोग खरीद कर ले भी जाते होंगे। बड़ी संख्या में विदेशी सैलानियों को लुभाने के लिए भी यह बोर्ड लगा है। ऐसे बोर्ड जैसलमेर के फुटपाथ पर हस्तशिल्प से बने सुंदर कढ़ाई वाले बेडशीट की कई दुकानों पर लगे दिखाई दे जाते हैं। राजस्थान के बेडशीट अपनी सुंदर कढ़ाई के लिए ख्यात हैं। इन पर हाथी घोडे की तस्वीरें भी काढ़ी जाती हैं। आप चाहें तो इसे जाजीम की तरह बिस्तर पर बिछाएं या फिर दीवार पर चंदोबा की तरह सजा दें तो यह किसी वाल पेंटिंग की तरह नजर आता है। मोल भाव करके आप यहां से खरीद सकते हैं।
पर इनका वियाग्रा कनेक्शन। आखिर इस बेडशीट में कैसी ताकत है जो जोशवर्धक की तरह काम करता है। आगे के बेडशीट वाले दुकानदार से मैं अपनी जिज्ञासा रखता हूं। वह राजफाश करता है। भाई साहब बेडशीट में बेलबूटे की कढ़ाई भर है इसमें कोई जोशवर्धक दवा नहीं मिलाई जाती है। हां ये इन बेडशीट का सौंदर्य एक खुशनुमा वातावरण तैयार करने में मददगार जरूर हो सकता है। पर कोई मैजिक तो नहीं है इनमें। यह तो बस एक मार्केटिंग टूल भर है। बेचने का तरीका है। वाह भाई...आपने तो बडे बडे प्रबंधन संस्थानों को भी मात दे दिया। आईआईएम वालों के भी आकर इनसे कुछ सीखना चाहिए।

सुंदर गड़िसर झील प्रदूषण की चपेट में -  हमारी अगली मंजिल है गड़ीसर झील। गड़ीसर झील जैसलमेर शहर के बीचों बीच स्थित सुंदर झील है। इसमें नौका विहार का आनंद लिया जा सकता है। पैडल से चलाए जाने वाले बोट रियायती दरों पर उपलब्ध हैं। इन बोट के नाम देखिए राजस्थान के अमर प्रेमी ढोला मारू के नाम पर है। गड़ीसर झील के पास सूर्योदय और सूर्यास्त देखने का प्वाइंट भी है। खासतौर पर यहां शाम का नजारा अदभुत होता है।
गड़ीसर झील एक कृत्रिम सरोवर है। इसका निर्माण जैसलमेर के राजा महारावल गड़सी ने 1367 में शहर में जलापूर्ति के लिए करवाया था। झील को चारों ओर मंदिर और बगीचों का निर्माण कराया गया। इसके साथ ही पूजा अर्चना के लिए ब्राह्मणों की नियुक्ति की गई। झील की तरफ जाने के लिए सुंदर द्वार का निर्माण टीलों नामक राज नर्तकी ने करवाया। यह दो मंजिला प्रवेश द्वार सुंदर झरोखों से सजा है। यह राजस्थानी स्थापत्य कला का सुंदर नमूना है। इस प्रवेश द्वार के साथ बाहर से आने वाले साधु संतों के लिए रहने का भी इंतजाम किया गया है। 

मुख्य द्वार के आसपास सुंदर छतरियां बनी हैं। झील के मुख्य द्वार पर दिन भर चहल पहल रहती है। लोग राजस्थानी वेश भूषा में तस्वीरें खिंचवाने में मस्त दिखाई देते हैं। सड़क के दोनों तरफ राजस्थानी कला शिल्प का बाजार सजा है तो खाने पीने के लिए स्ट्रीट फूड का भी इंतजाम है। नौका विहार न करें तो खाने पीने में अपना वक्त लगाएं। या फिर राजस्थानी लोकसंगीत का आनंद लें। एक रजास्थानी कलाकार सड़क के किनारे बैठे मिले। वे रावणहत्था से सुर निकाल रहे हैं। साथ वाद्य यंत्र और सीडी डीवीडी आदि भी बेच रहे हैं।

झील के बाहर नोटिस लगा है कि यहां नहाना, कपड़े धोना और गंदगी फैलाना मना है। हकीकत है कि झील का पानी काफी दूषित हो चुका है। प्रशासन और स्थानीय लोगों की उपेक्षा की शिकार हो गई है झील। झील का पानी इतना गंदा है कि जानवरों के पीने लायक भी नहीं रह गया है। कभी इस झील का निर्माण इंसानों के लिए पेयजल के इंतजाम के लिए कराया गया था। पर्यटक और स्थानीय लोग भी झील में गंदगी फैलाने के लिए काफी हद तक जिम्मेवार हैं।

-    ---- विद्युत प्रकाश मौर्य
(MAGIC BEDSHEET, VIAGRA, GADISAR LAKE, JAISALMER, RAJSTHAN)




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