Thursday, January 26, 2017

कर दे फीका रंग चुनरी का दोपहरी नैनीताल की

रुपहरी सुबह नेपाल की, सुनहरी शाम बंगाल की, कर दे फीका रंग चुनरी का दोपहरी नैनीताल की। कवि गोपाल सिंह नेपाली की ये पंक्तियां नैनीताल की खूबसूरती बयां करने के लिए काफी है। तो एक ऐसी दोपहर में नैनीताल पहुंचना हुआ था। साल था 1999 का। एक शादी में जाने का मौका था। हालांकि इससे पहले भी एक बार नैनीताल जाना हुआ था एक फिल्म की शूटिंग की कवरेज के दौरान। 1998 में पीआरओ देवेंद्र खन्ना मुंबई के एक बी क्लास निर्माता की फिल्म की शूटिंग दिखाने के लिए हमें नैनीताल ले गए थे। दिल्ली से हमारा सफर एक एसयूवी में शुरू हुआ। हमारे साथ दिल्ली के कई फिल्म पत्रकार थे। इसमें फिल्म रेखा निकालने वाले प्रमोद कुमार गुप्ता, एसके पंकज, प्रेम बाबू शर्मा, चांद खां रहमानी समेत कई और पत्रकार थे। साल 1996 से 1999 के दौरान मुझे टीवी और फिल्मों पर रिपोर्टिंग का मौका मिला था। वह मेरे कैरियर के शुरुआती दिन थे। तो हमलोग सुबह 9 बजे आईटीओ से रवाना हुए।

गाजियाबाद, हापुड़, मुरादाबाद के बाद रामपुर में एक रेस्टोरेंट में हमलोग खाने के लिए रुके। दोपहर का लंच अच्छा था, पर हमारे पीआरओ को उसका बिल कुछ ज्यादा लगा। खैर आगे का सफर शुरू हुआ। रामपुर के बाद बिलासपुर होते हुए हलद्वानी पहुंचे। थोड़ा आगे जाने पर काठगोदाम रेलवे स्टेशन दिखाई दिया। यह आखिरी रेलवे स्टेशन है इस मार्ग है। पूरा हलद्वानी शहर पार करने के बाद हमारी एसयूवी नैनीताल के मार्ग पर दौड़ रही थी। एक तरफ पहाड़ की शुरुआत हो गई थी। उन दिनों उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने की खबरें खूब आ रही थीं। हालांकि तब नए राज्य उत्तराखंड का सृजन नहीं हुआ था। काठगोदाम और नैनीताल को एनएच 109 नंबर जोड़ता है। हमें सड़क के किनारे कई बोर्ड दिखाई दिए जिसमें लोगों के भावुक अपील की गई थी कि जंगलों को आग लगने से बचाएं।

काठगोदाम से कुछ दूर आगे जाकर भीमताल के लिए रास्ता अलग हो जाता है। पर हम सीधे आगे बढ़े। पर हम नैनीताल तक नहीं पहुंचे। हाईवे के किनारे बने एक छोटे से होटल में हमें ठहराया गया। फिल्म की पूरी यूनिट भी यहीं ठहरी हुई थी। शाम हो गई थी। पर पास में बह रही छोटी सी नदी के किनारे फिल्म की शूटिंग जारी थी। चाय नास्ते के बाद रात के अंधेरे में हमलोग शूटिंग देखने पहुंच गए। नदी के किनारे सेट लगा हुआ था। फिल्म में कोई नामचीन एक्टर नहीं था। पर इसमें मोहन जोशी प्रमुख भूमिका में थे। सैकड़ों मराठी हिदीं और भोजपुरी फिल्मों में काम करने वाले मोहन जोशी हाल में यशवंत, मृत्युदंड जैसी फिल्मों में अपनी भूमिका के लिए पहचाने जा रहे थे। पर कम रोशनी में मैं उन्हें पहचान नहीं पाया। मैंने उनसे पूछा आपका नाम क्या है...उन्होंने शालीनता से कहा, मोहन जोशी। मेरे साथी पत्रकार मुझ पर हंसने लगे। अगले दिन दोपहर तक फिल्म की शूटिंग के कुछ और दृश्य देखे। हालांकि हमें बाद पता नहीं चला वह फिल्म कब और कहां रीलीज हुई। 

खैर कुछ महीने बाद दोबारा नैनीताल जाना हुआ। दिल्ली से सुबह सुबह बस पकड़ी। दोपहर में नैनीताल उतरा। सामने विशाल ताल दिखाई दे रहा था। यह नैनी लेक नैनीताल के चार तालों में से एक है। इसके अलावा भीमताल, नौकुचिया ताल और सातताल जैसी झीलें हैं यहां। नैनी लेक एक फ्रेश वाटर लेक है, जिसमें नाव पर सैर करना यहां आने वाले सैलानियों का प्रिय शगल है। नैनी लेक तकरीबन डेढ किलोमीटर लंबी है। झीले के किनारे सात पहाड़ियां हैं जो इसका सौंदर्य बढाती हैं। नैनीताल के कई होटल इसी झील के किनारे हैं।
मुझे जिस शादी में शामिल होना था उसका विवाह स्थल ऊपर प्रशासनिक अकादमी और यूथ हास्टल के पास था। शादी में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल सूरज भान पधारे थे। अप्रैल-मई में नैनीताल में दिन में ठंड नहीं थी। पर रात काफी ठंडी हो गई, जिसके लिए मैं तैयार नहीं था। वैसे नैनीताल में एक और फिल्म सिर्फ तुम की शूटिंग हुई थी। 1999 में आई इस फिल्म में संजय कपूर, प्रिया गिल और सुष्मिता सेन थे।
नैनीताल का यूथ हास्टल  

कहां ठहरें - नैनीताल में ठहरने के लिए सबसे सस्ती जगह यूथ हास्टल हो सकती है। यूथ हास्टल डारमेटरी 120 रुपये छात्रों के लिए 80 रुपये एक दिन का किराया है। कमरा चाहिए तो 750 रुपये एक दिन का। ज्यादातर होटल इससे महंगे हैं। आप ताल के आसपास के ही किसी होटल में ठहरें तो अच्छा होगा। दिल्ली से नैनीताल की दूरी 296 किलोमीटर है। वहीं काठगोदाम से नैनीताल दूरी 25 किलोमीटर है। आप रेल से काठगोदाम तक जा सकते हैं।

नैनीताल में क्या देंखे - नैनी लेक, जीबी पंत हाई एल्टीड्यूट जू, केव गार्डन, नौकुचिया ताल और भीम ताल देख सकते हैं । आगे समय हो तो अल्मोड़ा रानीखेत की ओर भी जाने का कार्यक्रम बना सकते हैं। 

उपसंहार - शादी में शामिल होने के बाद नैनीताल से वापस लौटते हुए मैं किच्छा गया। किच्छा में शुगर मिल में मेरे दोस्त दिग्विजय नाथ सिंह के पिताजी कार्यरत थे। दिग्विजय तो नहीं मिले पर उनके परिवार के सदस्यों के साथ एक दिन गुजारने के बाद मैं दिल्ली वापस आ गया। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य
(NAINITAL, UTTRAKHAND, LAKE, FILM SIRF TUM, BHIM TAL, YOUTH HOSTEL )

No comments:

Post a Comment