Tuesday, January 24, 2017

उत्तराखंड आंदोलन और रामपुर तिराहा गोली कांड के शहीद

दिल्ली से सहारनपुर जाने के लिए देहरादून वाली बस में बैठता हूं। कंडक्टर महोदय ने कहा कि बस मुजफ्फरनगर बाईपास से होकर जाएगी। आप रामपुर तिराहे पर उतर जाना। सुबह-सुबह रामपुर तिराहे पर उतर जाता हूं। दूसरी बस के इंतजार में अचानक नजर शहीद स्मारक पर पड़ती है। कदम उस बढ़ जाते हैं। उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों की याद में यह स्मारक बना है। सड़क के किनारे 800 गज में बने विशाल स्मारक में नए राज्य की मांग को लेकर जान गंवाने वालों के नाम सम्मान से लिखे गए हैं। साथ ही यह भी याद किया गया है कि आपकी कुरबानी कभी भुलाई नहीं जा सकेगी। उत्तराखंड राज्य बन जाने के बाद इस स्मारक का विकास संस्कृति विभाग उत्तराखंड की ओर से किया गया है। स्मारक का हरित परिसर मन मोह लेता है।  पर रामपुर तिराहा गोलीकांड स्वतंत्र भारत में पुलिसिया जुल्म की बर्बरतम दास्तानों में से एक है। इस घटना से यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी।

रामपुर तिराहा गोली काण्ड पुलिस द्वारा उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के आन्दोलनकारियों पर उत्तर प्रदेश के रामपुर क्रासिंगमुज़फ्फरनगर जिले में की गई गोलीबारी की घटना को कहते हैं। घटना के समय मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री थे। अलग राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारी 1 अक्तूबर, 1994 को दिल्ली में धरना-प्रदर्शन के लिए जा रहे थे, उस दौरान यूपी पुलिस ने मुज़फ्फरनगर जिले के रामपुर तिराहे के पास आंदोलनकारियों पर अचानक गोली चला दी। इस गोलीबारी में कई आंदोलनकारियों की मौत हो गई। साथ ही, पुलिस पर कुछ महिलाओं के साथ छेड़खानी और बलात्कार के आरोप भी लगे। पीएसी और पुलिस की गरजती गोलियों और पटकती लाठियों से लहूलुहान निहत्थे आंदोलनकारी कराह रहे थे। 

'आज दो, अभी दो, उत्तराखंड राज्य दो' जैसे गगनभेदी नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे सभी आंदोलनकारियों को पुलिस ने मुजफ्फरनगर के नारसन रामपुर तिराहे पर रोक दिया था। आंदोलनकारियों को बसों से बाहर निकालकर उन पर अंधाधुंध लाठियां बरसाई। मुजफ्फरनगर में हुए उस दिल दहला देने वाले कांड को उत्तराखंड के लोग कभी नहीं भूला पाएंगे।
1994 के इस बर्बर गोलीकांड  से अलग राज्य की मांग को और हवा मिली। आंदोलन ने जनान्दोलन का रूप ले लिया और अन्ततः साल 2000 में उत्तराखंड देश का सत्ताइसवां राज्य बन गया। हर साल 1 अक्तूबर को इस गोलीकांड की बरसी पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री समेत तमाम नेतागण शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि के पुष्प चढ़ाने आते हैं।

गोलीकांड की जांच - 12 जनवरी 1995 में दायर याचिका के आधार पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रामपुर तिराहा गोलीकांड की सीबीआई से जांच कराने के आदेश दिए थे और जांच के बाद सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया था। हालांकि इस शर्मनाक कांड के दो दशक से ज्यादा गुजर चुके हैं पर, रामपुर तिराहा गोलीकांड के दोषियों कोअभी तक सजा नहीं मिल सकी है।
-    - विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( ( RAMPUR TIRAHA GOLIKAND, PAC, RAPE, UTTRAKHAND, MUZAFFARNAGAR, NEW STATE DEMAND )

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