Tuesday, December 6, 2016

माजुली - सबके साथी सबके दोस्त मंजीत रिसांग ((07))

मंजीत भाई के साथ ला मैसन डी आनंदा में 
सुबह के 11 बजे ला मैसन डी आनंदा में पहुंचने के बाद हमारे ऊपर यात्रा का थकान हावी था। पर मंजीत रिसांग हमारे कमरे को साफ करवाने में लगे थे। थोड़ी देर हम बाहर बैठे हमारे बगल वाले कमरे में पौलेंड की दो महिलाएं बैठी हैं जो आज जाने वाली हैं। दूसरी तरफ वाले कमरे में दो लड़कियां हैं। इनमें से एक दिल्ली की है जो पत्रकार रह चुकी है पर अब उनका मन सोशल वर्क में रम गया है। अपनी सहेली के साथ घूमती रहती हैं ऋचा। थोड़ी देर में हमारा कमरा साफ हो गया। अनादि को ये बंबू काटेज खूब पसंद आया। पर इसके फर्श पर थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। नीचे तालाब है इसलिए सिक्के जैसी चीजें गिर सकती हैं। हालांकि कमरे में ताला लगाने की सुविधा है। पर यह आनंदा घर जैसा है अगर आप कमरा खुला छोड़कर भी चलें जाएं तो कोई बात नहीं।

दोपहर के बाद हमने आधा दिन घूमने का तय किया।  अगर ला मैसन डी आनंदा में रहकर माजुली सैर करना चाहते हैं तो आपको मंजीत रिसांग की सलाह काफी काम आएगी। वे अपने यहां ठहरने वालों को घूमने की योजना बनाने में पूरी मदद करते हैं। मंजीत ने हमें एक कंप्यूटर से निकाला हुआ नक्शा दिया। हमने आज माजुली के तीन सत्र देखने का तय किया। मंजीत भाई से ही एक्टिवा किराये पर ली। वे सिर्फ एक्टिवा ही नहीं बल्कि बाईक साइकिल, छोटी साइकिल सब किराए पर देते हैं। हमें उन्होंने नई एक्टिवा 3जी पेश की। एक दिन का किराया 500 रुपये लेते हैं। पर हमने दो दिन के लिए ले लिया। एक्टिवा पर सवार होकर हमलोग गड़मूर के बाजार में गए पहले पेट पूजा की, फिर निकल पड़े अपनी पहली मंजिल उत्तर कमलाबाड़ी सत्र। वहां से निकलकर कमलाबाडी बाजार में नास्ता किया फिर आगे बढ़े अवनी अति सत्र। शाम को हमारी अगली मंजिल थी नूतन कमलाबाड़ी सत्र। माजुली में शाम को 5 बजने के बाद अंधेरा होने लगता है। हालांकि यहां रात को घूमने में कोई खतरा नहीं है। पर इस द्वीप पर कोई रात्रि जीवन नहीं है। इसलिए घूमने का कोई फायदा नहीं था।
हमने रात का खाना ला मैसन के किचेन में खाने के लिए पहले ही आर्डर कर दिया था। हमने दो शाकाहारी थाली आर्डर की। चपाती, चावल,  दाल, सब्जी, भुजिया, पापड़, सलाद अचार। खाना सुस्वादु और आपके समाने महिलाएं किचेन में बनाती हैं। आप चाहें तो किचेन में हेल्प भी कर सकते हैं।

वैसे मंजीत अपनी रसोई से मछली फ्राई और ग्रेवी वाली, चिकेन, पोर्क, राइस बीयर जैसे कई चीजें पेश करते हैं जिसका स्वाद यहां आने वाले लोगों को काफी पसंद आता है। अगले दिन भी रात्रि भोजन उनके रसोई में ही किया। आखिरी दिन सुबह का नास्ता भी उनके रसोई से करके निकले। माजुली में मच्छर हैं, पर उनसे बचने के लिए पूरा इंतजाम मंजीत भाई करते हैं। सभी बिस्तर के साथ मच्छरदानी है। शाम को वे धुना लगाते हैं सारे कमरों में जिससे मच्छर भाग जाएं। चाहे देर रात आपको कोई जरूरत पड़ जाए उनके परिवार के सदस्य आपकी मदद के लिए हाजिर रहते हैं।


ला मैसन डी आनंदा की सुरूचिपूर्ण रसोई
ला मैसन डी आनंदा के केयरटेकर मनजीत रिसांग का घर कंक्रीट का बना है। पर उनकी रसोई भी बांस की ही बनी है। हालांकि वह समतल जमीन पर है। पर माजुली के ज्यादातर घरों की तरह वह बांस के स्तंभों पर जमीन से छह फीट ऊंचाई पर है। बारिश के दिनों में हर जगह पानी आ जाने के कारण माजुली में ज्यादातर घर इसी तरह ऊंचाई पर बनाए जाते हैं।
रसोई घर में एक तरफ चूल्हा जलता है तो दूसरी तरफ बांस के बने डायनिंग टेबल पर लोगों के खाने का इंतजाम है। डायनिंग टेबल के आसपास कुछ तस्वीरें लगी हैं। मनजीत को सिक्कों और नोट के संग्रह का शौक है तो कई देशों के नोट यहां डिस्प्ले में लगा रखे हैं। रसोई घर में आने से पहले आपके लिए जूते चप्पल नीचे उतार देना जरूरी है। हालांकि मंजीत ने रिसोर्ट के हर कमरे में खाने और नास्ते का मीनू कार्ड उपलब्ध करा रखा है पर यहां रहने वाले लोग चाहें तो आकर सीधे किचेन में बैठकर भोजन कर सकते हैं। भोजन बनाने में मंजीत की पत्नी उनकी मां और दो पड़ोस की सहायिकाएं लगी रहती हैं।
रात के खाने की शाकाहारी थाली 100 रुपये की है।सुबह का नास्ता रोटी सब्जी की थाली 50 रुपये की। चाय दस रुपये की। नहाने का गर्म पानी एक बाल्टी 20 रुपये का। इसके अलावा आप रिसांग किचेन से कई तरह के मांसाहारी व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं। इनमें माजुली की स्थानीय मछली की कई किस्में शामिल हैं। पर सबसे खास बात है कि आप शाकाहारी हैं तो आपका भोजन मांसाहारी लोगों से बिल्कुल अलग बनेगा और आपको खाने के लिए भी अलग अलग समय पर बुलाया जाएगा। हां आप रिसांग किचेन में खाना चाहते हैं तो दो से तीन घंटे पहले आर्डर करना पड़ेगा। क्योंकि वे खाना उतने ही लोगों का बनवाते हैं जितने लोगों ने आर्डर कर रखा हो।

आनंदा के कमरे कभी खाली नहीं रहते हैं। हमारे आसपास के कमरे में अगले दिन कुछ नए मेहमान परिवार सहित आ गए हैं जो किसी सरकारी लैब में वैज्ञानिक हैं। आखिरी दिन चलने को हुए तो पुणे की लड़कियां लक्ष्मी और सोनम पहुंचीं। थोड़ी ही देर में उनसे हमारी खूब दोस्ती हो गई।

आखिरी दिन जब चलने की बात हुई तो मंजीत भाई ने अपने एक्टिवा पर बारी बारी से हमें टैक्सी स्टैंड तक छोड़ा। पर कुछ दिन के प्रवास में उनसे अपनापन सा हो गया। हालांकि उनके पास तो हर महीने सैकड़ो सैलानी आते हैं। पर वे हमें जाते जाते दो असमिया गमछा उपहार मे दे गए जिन्हें हमने सहेज कर रख लिया। 
 - vidyutp@gmail.com

(MAJULI HOME STAY, FRENCH ARCHITECT, MANJIT RISONG, MISSING ) 
आनंदा में आखिरी दिन, मंजीत रिसांग, सोनम और लक्ष्मी के साथ। 
 La Maison de Ananda. Near Garamur Market, MAJULI. Ph:+91-9957186356, 9435205539. Email: monjitrisong@yahoo.in

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1 comment:

  1. आपका यह श्रृखंला बहुत ही रोचक है । बहुत बहुत धन्यवाद हम सबसे अपनी अनुभव को शेयर करने के लिए।

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