Sunday, December 4, 2016

ला मैसन डी आनंदा में आनंद के कुछ दिन (( 06))

ला मैसन डी आनंदा जैसा की नाम से लगता है कि यह फ्रेंच में है। मेरे छठी कक्षा के छात्र बेटे जो फ्रेंच भी पढ़ते हैं बताते हैं कि फ्रेंच में मैसन माने घर होता है। तो यह एक होटल नहीं घर है। घर मतलब होम स्टे। कई राज्यों में घूमते हुए किसी होम स्टे में रहने का हमारा पहला अनुभव माजुली का रहा जो यादगार रहेगा। हमने इस होम स्टे को यह देखकर स्टेजिला डाट काम से बुक किया था कि यह बंबू हट है, इसमें रहना माधवी और अनादि के लिए भी कुछ नया होगा। 
वहीं ट्रिप एडवाइजर,  लाइव मिंट के एक लेख समेत कई देशी विदेशी लोगों के रिव्यू मैंने इस होम स्टे के बारे में पढ़ रखे थे। माजुली के लिए फेरी से ब्रह्मपुत्र पार करते हुए मैंने माधवी और अनादि से पूछा क्या बंबू हट में रहना पसंद करोगे, उन्होंने कहा, हां क्यों नहीं। पर उन्हें नहीं पता था कि माजुली में एक सुंदर बंबू हट ही उनका इंतजार कर रहा है। 
ला मैसन डी आनंदा माजुली के मुख्यालय गड़मूर बाजार से तकरीबन एक किलोमीटर आगे कारपूनपुली गांव में हैं। पर आप गड़मूर बाजार से टहलते हुए वहां पहुंच सकते हैं।
ला मैसन डी आनंदा यानी खुशियों का घर साल 2005 में बना। इसे एक फ्रेंच युवा वास्तुकार ने तैयार किया। उस वास्तुकार का नाम जिम चाउविन है। बांस के खंबो पर पानी में खड़ा ये आशियाना अदभुत है। यह माजुली की परंपरा और आधुनिकता का मिश्रण है। जिम जब फ्रांस से यहां आए तो माजुली के सादे जीवन और लोगों के प्यार ने उन्हें यहां लंबे समय तक रोक लिया। पर उन्हें लगा कि यहां रहने के लिए एक अनूठा और प्राकृतिक आवास होना चाहिए।  तब उन्होंने यहां एक रिसार्ट बनाना तय किया। जिम और उनकी प्रेयसी मक्का कोरबा ने कई महीनों में इस खुशियों के घर को तैयार किया। अब इसके केयर टेकर मंजीत रिसांग हैं।
मंजीत का पूरा परिवार 24 घंटे यहां रहने वाले लोगों की सेवा में मुस्कान और आत्मीयता के साथ प्रस्तुत रहते हैं। 

अब बात माजुली के इस अनूठे घोंसले के निर्माण की करें। इसके वास्तुकार जिम के बारे में जानें। फ्रांस के जिम ने 2001-2002 में रिजवी कालेज मुंबई से वास्तु की पढ़ाई की। पहली बार वे जब माजुली आए तो यहां दो महीने रूके। उन्होंने पाया कि यहां रहने के लिए सरकिट हाउस और सत्रों के अलावा कोई अच्छा विकल्प नहीं है। उनके मन में ख्याल आया कि कुछ ऐसा बनाया जाए जिसमें माजुली में  देशी विदेशी सैलानी आकर सुकुन से रह सकें। तब उन्हें आनंदा के निर्माण का ख्याल आया। चौराहे से उतर कर गांव की ओर जाती एक कच्ची सड़क पर दोनों तरफ स्थित है ला मैसन डी आनंदा।

एक श्रंखला में एक सिंगल बेड रूम, तीन डबल बेड रुम और एक तीन बिस्तरों वाला कमरा। इन सभी कमरों से लगा कॉमन बरामदा। हर कमरे आगे बरामदे में बांस का सोफा लगा है। ये पूरा रिसार्ट एक तालाब में बांस के खंबो पर खड़ा है। हर कमरे के साथ गुसलखाना लगा हुआ है। पर टायलेट कंक्रीट का है। बिजली का इंतजाम है पर टीवी और वाईफाई नहीं है। कमरे में पंखे छत पर नहीं हैं बल्कि टेबल फैन का इंतजाम है।

डबल बेड रूम में एक बेड बड़ा है जबकि दूसरा छोटा। यानी तीन लोग भी आराम से रह सकते हैं। फर्स बांस का मचान नुमा है तो पलंग भी बांस के हैं। पर गद्दे और तकिया चादरें अच्छी क्वालिटी के हैं। सड़क के दूसरी तरफ एक कंक्रीट का बना पारिवारिक सूट  है तो एक और बांस का बना तीन बेड वाला शानदार सूट 2016 में तैयार हो गया है। इसके बगल में ही मनजीत रिसांग का अपना घर और उनका रसोई घर है।  
 - vidyutp@gmail.com

(MAJULI HOME STAY, FRENCH ARCHITECT, MANJIT RISONG, MISSING ) 

 La Maison de Ananda. Near Garamur Market, MAJULI. Ph:+91-9957186356, 9435205539. Email: monjitrisong@yahoo.in

No comments:

Post a Comment