Thursday, January 19, 2017

पटना जंक्शन के बाहर साबरमती का संत

पटना जंक्शन पर जब ट्रेन पकड़ने के लिए पहुंचते हैं तो वहां एक स्टीम लोकोमोटिव आपका स्वागत करता नजर आता है। स्टेशन आते जाते मेरे बेटे ने इस लोकोमोटिव के बारे में जानने की इच्छा जताई। पर यहां इस लोकोमोटिव का इतिहास या परिचय नहीं लिखा गया है। मेरी भी जिज्ञासा हुई इसको लेकर। थोड़ी तलाश के बाद साबरमती के संत के बारे में जानकारियां मिल सकीं।
 मीटर गेज का यह इंजन जिसका नाम साबरमती का संत लिखा है, लंबे समय तक गुजरात में अपनी सेवाएं दे रहा था। यह पूर्ण स्वदेशी स्टीम लोकोमोटिव है। वाईपी 2805 (YP – 2805) का निर्माण टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव वर्क्स ने किया है। यह पहियों के लिहाज से 2-8-2 श्रेणी का लोकोमोटिव है। 
यानी दो पहिए आगे आठ बीच में और जो पीछे लगे हैं। यह एक हेवी टैंक वाला लोकोमोटिव है। यानी यह मीटर गेज पर दौड़ने वाला शक्तिशाली इंजन है।

अब यह लंबे समय से पटना जंक्शन के आगे लोगों का स्वागत कर रहा है। जब आप पटना जंक्शन के मुख्य द्वार से प्रवेश करेंगे तो इसे देख सकते हैं। यह लंबे समय तक गुजरात के वांकानेर स्टीम शेड का हिस्सा रहा। पर रेलवे का गौरवशाली इतिहास दिखाने के लिए इससे लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान पटना जंक्शन पर लाकर प्रदर्शित किया गया है।  इसे गुजरात से लाया गया था इसलिए इसका नाम बड़े सम्मान से साबरमती का संत दिया गया। गांधी जी स्वदेशी के पैरोकार थे और यह लोकोमोटिव भी संपूर्ण स्वदेशी है। वैसे पहले इसका नाम वाईपी 2805 साबरमती दिया गया था।

इस लोकोमोटिव का निर्माण 1968 में टेल्को (टाटा इंजीनयरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी लिमिटेड) जमशेदपुर में किया गया था, तब जमशेदपुर बिहार का हिस्सा था। अब टेल्को लोकोमोटिव का निर्माण नहीं करती। टेल्को का नाम भी बदलकर अब टाटा मोटर्स हो गया है। पर लंबे समय तक इसने भारतीय रेल के लिए कई लोकोमोटिव का निर्माण सफलतापूर्वक किया था। 1945 में टेल्को की स्थापना मूल रूप से लोकोमोटिव कंपनी के तौर पर ही हुई थी। पर बाद में टेल्को ने ट्रक आदि का निर्माण शुरू कर दिया।
टेल्को द्वारा निर्मित वाईपी 2805 लोकोमोटिव को पहले रतलाम डिविजन में सेवा में लगाया गया था। उसके बाद यह राजकोट डिविजन में भेज दिया गया। साल 1998 तक इसने गुजरात और मध्य प्रदेश में सफलतापूर्वक अपनी सेवाएं दीं। यह आखिरी दौर में वांकानेर-मोरबी रेलवे लाइन पर अपनी सेवाएं दे रहा था।
तकरीब तीन दशक तक रेलवे को सफलतापूर्वक अपनी सेवाएं देने के बाद इस भारी भरकम लोकोमोटिव को स्थायी रूप से पटना जंक्शन के बाहर लाकर स्थापित कर दिया गया है।

पटना जंक्शन को कभी इतिहास में बांकीपुर के नाम से जाना जाता था, अब बिहार का सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशन है। आते जाते हजारों लोग इस साबरमती के संत के अगल बगल से होकर गुजरते हैं। पहले स्टीम फिर डीजल और अब पटना जंक्शन पर भी बिजली से चलने वाले लोकोमोटिव रेलगाड़ियों का भारी भरकम बोझ ढो रहे हैं। पर यह साबरमती का संत मूक खड़ा मानो यह बता रहा है कि मुझे याद रखना, तुम्हारा दादा हूं मैं... अब यह लोकोमोटिव पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर की अमानत बन गया है। पटना जंक्शन के बाहर रात की रोशनी में यह साबरमती कुछ इस तरह दिखाई देता है मानो अभी अभी चल ही पड़ेगा।
-vidyutp@gmail.com
( TATA ELECTRICAL AND LOCOMOTIVE CO, YP 2805, PATNA JN, ECR, GUJRAT, MORBI, RATLAM )

3 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 14 दिसम्बर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. सुन्दर ब्लाग। ब्लाग फौलोवर बटन लगाइये ताकि छपने की सूचनाएं मिलती रहें ।

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