Wednesday, December 28, 2016

हर आम और खास के लिए माजुली ((25))

माजुली आम और खास सैलानी का अपने यहां स्वागत करता है। माजुली में अगर आप ठहरना चाहते हैं तो कम से कम 100 रुपये प्रतिदिन में भी आपको आवास का इंतजाम मिल सकता है। वहीं रोज सौ रूपये में आप पेट पूजा कर सकते हैं। साल 2016 में इतना सस्ता पर्यटन और कहां हो सकता है।

माजुली में गडमूर सत्र और नूतन कमलाबाड़ी सत्र के गेस्ट हाउस में अत्यंत किफायती दरों पर ठहरा जा सकता है। इसके अलावा यहां पर ठहरने के लिए बंबू हट के तौर पर होम स्टे जैसे बेहतरीन विकल्प भी मौजूद हैं। कुछ होटल और रिजार्ट भी माजुली में खुल गए हैं। दो सुविधा जनक रिजार्ट हैं जिनका किराया 1500 से 3000 रुपये प्रतिदिन तक है। गड़मूर के बाजार में श्रीमंत शंकरदेव होटल दिखाई देता है। इसी होटल के नीचे दत्ता भोजनालय नामक एक रेस्टोरेंट भी है। यहां पर सुबह खाने में 40 रुपये में 4 रोटी सब्जी मिल जाती है। दोपहर के खाने में 50 रुपये में चावल की थाली। थाली यानी भरपेट खाइए।

समोसा ,नारियल मिठाई और जलेबी
हमें कमलाबाड़ी के बाजार में एक मिठाइयों की दुकान नजर आती है। दुकान के बाहर कोई साइन बोर्ड नहीं लगा है। राजस्थान के मनोज शर्मा जी इस दुकान के संचालक है। वे राजस्थान से कई दशक पहल इधर आ गए थे। समोसा छह रुपये का, नारियल मिठाई 7 रुपये की और बेहतरीन स्वाद वाली जलेबियां बनाते हैं। विजयादशमी के दिन खासतौर पर उन्होंने देसी घी की जलेबियां बनाई थीं। माजुली प्रवास के दौरान हमलोग कई बार उनकी दुकान में खाते रहे। आते जाते उनसे आसपास के सत्र में जाने का रास्ता भी पूछते रहे। चलते समय उनकी दुकान से समोसा पैक कराकर भी चले। चलते चलते वे एक पर्ची पर मेरे बेटे को अपना मोबाइल नंबर लिखकर देते हैं। कहते हैं, पापा से कहना कभी कभी बात करते रहेंगे।

वैसे माजुली मांसाहारी भोजन करने वालों के लिए भी काफी उपयुक्त है। खास तौर पर आप परंपरागत मिशिंग थाली का आनंद ले। इसमें चावल,  स्टिम्ड फिश, भूनी हुई मछली, सूखी हुई मछली का पाउडर, स्टिम्ड चिकेन,  भूना हुआ चिकेन, चिकेन करी, स्टिम्ड पोर्क, भूना हुआ पोर्क आदि शामिल है। और खाने से पहले आप राइस बीयर का आनंद उठा सकते हैं।
सोनोवाल कछारी लोक चिकेन और मटन खाना पसंद करते हैं। पर वे राइस बीयर कभी कभी पीते हैं। वे अपने मेहमानों को राइस बीयर सम्मान के तौर पर पेश करते हैं। इसके अलावा कई किस्म के चाय का स्वाद भी आप यहां ले सकते हैं।

कमालाबाड़ी से गड़मूर सत्र  आने के रास्ते में हमें खेतों में एक बंबू हट का समूह दिखाई देता है। यह खेतों में बना हुआ एक रिसार्ट है। यगादरशील बंबू काटेज ( 9401625744, 9577501010), केरेला गांव, माजुली, में अलग अलग कई काटेज खेतों में बने हुए हैं। हालांकि इनका काटेज किसी ऑनलाइन बुकिंग पर उपलब्ध नहीं है। किराया है 1000 रुपये प्रतिदिन। इसमें हमें स्कॉटलैंड के कुछ लोग मिले जिन्होने कई दिनों से इस काटेज को ठिकाना बनाया हुआ है। एक ऐसे सज्जन भी मिले जो दो साल की उम्र में असम छोडकर विदेश जा बसे थे। अब 40 सालों बाद अपनी जड़ों की तलाश में असम आए हैं। यह काटेज अपने मेहमानों को भोजन का इंतजाम करता है। पर सड़क के किनारे खेतों में स्थित इस काटेज के आसपास कोई बाजार नहीं है। शाम का वक्त है हमें अचानक आसमान में इंद्रधनुष दिखाई देता है। इंद्रधनुष देखकर हम सब की खुशी का ठिकाना नहीं रहता।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य
( ASSAM, MAJULI,  SWEET SHOP, PORK, FISH, RICE BEER, YGDRASILL BAMBOO COTTAGE ) 

माजुली की यात्रा को शुरुआत से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...

2 comments:

  1. रोचक वर्णन। माजुली श्रृखंला पढने में बहुत आनंद आ रहा है। धन्यवाद आपका।

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  2. तीन और आलेख हैं. पढ़ते रहिए. धन्यवाद

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