Sunday, December 25, 2016

माजुली का मेहनतकश जनजातीय समाज ((22))

जंगराईमुख से लौटते हुए सड़क के किनारे एक घर में रूक जाते हैं हमलोग। घर की लड़कियां ओखल में धान को कूट कर चावल निकालने में पूरी ताकत और जोश से लगी हुई हैं। एक लड़की ने पेटीकोट ब्लाउज पहना हुआ है तो दूसरी ने निक्कर और टी शर्ट। भले ही माजुली गांव हों पर यहां शहरी फैशन गांव के हर घर तक पहुंच चुका है। घर की तीसरी बेटी फैशनेबल कपड़ों में करघा चलाकर उसपर चादर बुनने में लगी है। वहीं गृह स्वामी वे बांस की टोकरी बुनने लगे हैं। यानी पूरा परिवार अलग अलग काम में लगा हुआ है। माजुली की सड़क पर एक किसान से मुलाकात होता है। वे बताते हैं कि मैं कुश हूं। वे खेतीबाड़ी करते हैं। सीधे साधे भोले भाले लोगों की धरती है माजुली।

माजुली द्वीप की आबादी में मिसिंग, देवरी,  सोनोवाल,  कोच, कलिता, नाथ,  अहोम, नेराली जैसी प्रमुख जातियां निवास करती हैं। एक तरह से यह मिनी असम का प्रतिनिधित्व करता है।

सबसे पुरानी जनजाति है देवरी - सबसे पहले बात देवरी लोगों की। ये तिब्बती बर्मी मूल के लोग हैं। माजुली में इनकी आबादी 4000 के आसपास है। इनके यहां पर दो गांव हैं जो जंगराईमुख के पास हैं। एक बड़ी देवरी और दूसरा श्रीराम देवरी। ये माजुली की आबादी का तीन फीसदी हैं। देवरी लोग भगवान शिव की पूजा करते हैं। यह एक हिंदू जनजाति है। हर देवरी घर में पूजा स्थल होता है। वे जनजातीय लोगों के बीच पुजारी और विद्वान के तौर पर सम्मानित किए जाते हैं। देवरी लोग बिहू का त्योहार मनाते हैं। हुराईरंगाली उनकी खास नृत्य शैली है। देवरी लोग असम के सबसे पुराने जनजातीय समूह में गिने जाते हैं। देवरी महिलाएं गहने पहनने की शौकीन होती हैं। ये लोग खाने पीने के भी शौकीन होते हैं। अक्सर पूरा परिवार साथ बैठकर खाना पसंद करता है।
सोनोवाल कछारी – माजुली द्वीप पर सोनोवाल कछारी जनजाति के लोग महज 1000 से थोड़ी ज्यादा संख्या में हैं। हालांकि पूरे असम में इनकी संख्या 2.5 लाख से ज्यादा है। इनकी इसी नाम से गांव जंगराईमुख बाजार से 10 किलोमीटर पूरब में है। मजेदार बात है कि इनका नाम सोनोवाल इसलिए है क्योंकि ये लोग अहोम राजाओं के शासनकाल में सुबानसिरी नदी से सोना चुनने का काम करते थे। सोनोवाल कछारी लोगों के समाज की अपनी नृत्य शैलियां हैं। सोनोवाल कछारी समाज से कई प्रसिद्ध लोग हो चुके हैं। 1979 में असम के मुख्यमंत्री बने जोगेंद्र नाथ हजारिका और 2016 में मुख्यमंत्री बने सर्बानंद सोनोवाल इसी समुदाय से आते हैं। मजे की बात है कि कई सोनोवाल लोग गैर आदिवासी वाली उपाधियां जैसे सैकिया, बोरा, हजारिका भी अपने नाम के आगे लगाते हैं। सोनोवाल लोगों में बड़ी संख्या में लोग अवनिअति सत्र के अनुयायी हैं।

वाद्य यंत्र बनाने में माहिर हैं मतक – माजुली में थोड़ी संख्या में मतक जनजाति के लोग भी हैं। ये लोग खास तौर पर मृदंगम जैसे वाद्य यंत्र बनाने में माहिर हैं। इनका नाम मत और एक मिल कर बना है। मत मतलब विचार, फैसला और एक मतलब कि एक है। तो ये जो नाम मिला है उन्हें वह उनकी एकता का प्रतीक है। उनके आध्यात्मिक गुरु श्री अनिरुद्ध देव हैं। माजुली के तीन गांव देकासेनसावा, बरहासेनसेवा और अशोकगुरी में ये लोग थोड़ी संख्या में पाए जाते हैं।  

-vidyutp@gmail.com

( SONOWAL, DEORI, MATAK, MAJULI, TRIBE, ASSAM ) 

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