Friday, December 16, 2016

कला संस्कृति का केंद्र - उत्तर कमलाबाड़ी सत्र ((13))

अपने वाहन को प्रवेश द्वार से बाहर रोक कर चप्पल आदि उतार कर हमलोग उत्तर कमलाबाड़ी सत्र के प्रवेश द्वार से अंदर दाखिल होते हैं। तभी दो भगत ( सत्रवासी) बंशी में एक विशाल मछली पकड़ने के बाद भागते हुए आते हैं। हमें कौतूहल होता है वैष्णव भगत और मछली। सत्र के भगत लोग से बात करने पर पता चलता है कि ज्यादातर भगत लोग यहां मछली खाते हैं। आमतौर पर हर सत्र में तालाब हैं तो भगत लोग बंशी से मछलियां पकड़ते हैं।

उत्तर कमलाबाड़ी सत्र पहला सत्र है जिसे हमलोग देखने पहुंचे हैं। अंदर हमारी पहली मुलाकात एक किशोर वय के भगत से होती है। वह अपना नाम बितुपन बरा बताते हैं। नाम बताते वक्त सावधान की मुद्रा में खड़े हो जाते हैं। फिर हाथजोड़ कर नमस्कार करते हुए बोलते हैं – मेरा नाम बितुपन बरा है। वे बताते हैं उत्तर कमलाबाड़ी सत्र एक उदासीन सत्र है। थोड़ी देर में वहां एक बुजुर्ग भगत भी आ जाते हैं। वे अपना नाम जादव बरा बताते हैं। वे बताते हैं कि बाहरी लोगों के लिए भगत लोगों को स्पर्श करना मना है। ( क्यों) 

इस सत्र के वर्तमान सत्राधिकारी जनार्दन देव गोस्वामी हैं। सत्र के भगत लोग धोती पहनते हैं। ऊपर बनियान, कुर्ता या फिर आधुनिक टी शर्ट भी धारण करने लगे हैं भगत लोग।
बितुपन बताते हैं कि सत्र जीवन में वे हर रोज सुबह एक घंटे शंकरगीता का पाठ करते हैं। सत्र में रहते हुए वे अपनी स्कूली पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। चाहे जितना पढ़ो सुविधा है। एक सत्र का भगत पढ़कर कालेज में प्रोफेसर हो गया तो कुछ भगत लोग लंदन पेरिस भी जा चुके हैं। वे बताते हैं कि वे सत्र जीवन में बरगीत सीखते हैं। साथ ही नृत्य की अलग अलग विधाएं सीखते हैं।

इस सत्र के कई भगत लोगों को कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए संगीत नाटक अकादमी का अवार्ड मिल चुका है। ऐसे सम्मानित लोगों में परमानंद बोरबयान, रोशेश्वर सैकिया, मोहिराम दत्ता, मुक्तियार और बापूराम बोयान आदि के नाम प्रमुख हैं। करुणा बोरा और जोगेन दत्ता जैसे लोग इस सत्र का गौरव बढ़ाने वाले नाम हैं। इस सत्र में अक्सर विदेशी भी संगीत नृत्य सीखने के लिए आते हैं। ये लोग एक से दो माह सीखने के बाद अपने देश को लौट जाते हैं।

उत्तर कमलाबाड़ी सत्र में नामघर के बगल में एक सुंदर संग्रहालय भी है। इस संग्रहालय में प्रवेश के लिए 20 रुपये का टिकट है। यहां पर कई वैष्णव संतों के रचित ग्रंथों की पांडुलिपियां देखी जा सकती हैं। इसके अलावा कई तरह के वस्त्र, पुराने अस्त्र शस्त्र और कपड़ों को भी सहेज कर रखा गया है। हमें बीतुपन बोरा पूरा संग्रहालय घूमाते हैं और इसमें संग्रहित वस्तुओं के बारे में बताते हैं।

कैसे पहुंचे- उत्तर कमलाबाडी सत्र माजुली में कमलाबाड़ी बाजार से एक किलोमीटर उत्तर की तरफ स्थित है। यहां आप आसानी से रास्ता पूछते हुए पहुंच सकते हैं। सत्र के प्रवेश द्वार पर मुखौटे (मास्क ) की दुकान हैं। इसके अलावा यहां से आप सत्र के भगत लोगों द्वारा निर्मित उत्पाद खरीद सकते हैं।  

- vidyutp@gmail.com

      

No comments:

Post a Comment