Thursday, December 15, 2016

माजुली का सबसे बड़ा आकर्षण हैं वैष्णव सत्र ((12))

माजुली का सबसे बड़ा आकर्षण हैं यहां के सत्र। ये सत्र वास्तव में हिंदू मठ हैं। सभी सत्र वैष्णव संप्रदाय के हैं। ये सत्र मठ होने के साथ कला संस्कृति के संवाहक हैं। ये धार्मिक शिक्षा के केंद्र हैं। ये आवासीय विद्यालय की तरह भी हैं। यहां पांच साल की उम्र से बच्चे भगत के तौर पर रहने के लिए आ जाते हैं।  इन सत्रों में हजारों भगत लोग सात्विक जीवन बीताते हुए रहते हैं। इन सत्रों की जीवन पद्धति बहुत बड़ा आकर्षण है जो हर महीने सैकड़ो विदेशियों को माजुली की ओर खींच लाती है। भारत में दुनिया के तमाम देशों के सैलानी यहां की धार्मिक संस्कृति के कारण खींचे चले आते हैं। इन सबके बीच माजुली का आकर्षण कुछ अलग किस्म का है जो विदेशियों को आकर्षित करता है।

अगर सत्रों की संख्या की बात करें तो यहां कुल 64 सत्र हुआ करते थे। पर ब्रह्मपुत्र नदी में कटाव के कारण कई सत्रों खत्म हो गए। इनमें से कुछ को दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया। आज की तारीख में अधिकृत  तौर पर माजुली में 23 सत्र हैं। इनमें से 15 उदासीन सत्र हैं जबकि 8 गृहस्थ सत्र हैं। अब क्या अंदर है उदासीन और गृहस्थ सत्र में। उदासीन सत्र में रहने वाले भगत लोग शादी नहीं करते। ऐसा नहीं है कि उन्हें शादी करने पर रोक है। पर शादी करने के बाद उन्हे सत्र जीवन छोड़ना पड़ेगा। वे अन्यत्र जाकर घर बसाकर रहने के लिए स्वतंत्र हैं। उदासीन सत्र के प्रवर्तक माधवदेव हैं । वहीं गृहस्थ सत्र में रहने वाले लोग परिवार के साथ रहते हैं। वे शादी करते हैं और संतान उत्पन्न कर अपना वंश आगे बढ़ाते हैं। पर परिवार के साथ रहते हुए भी सत्र जैसा जीवन जीते हैं।   
दक्षिणापथ सत्र का एक प्राचीन भवन 

किसी भी सत्र में एक नाम घर (पूजा घर ) होता है। इसके अलावा मणिकूट, सत्राधिकारी का आवास, भक्तों के रहने के लिए आवास, सामान रखने के लिए स्टोर आदि होता है। हर सत्र का एक प्रवेश द्वार है जिसे कारापाट कहते हैं। कुछ सत्रों के परिसर में ही स्कूल और अतिथियों के लिए गेस्ट हाउस भी बना हुआ है।

सत्र के सात प्रमुख हिस्से

1.   मणिकूट यानी गुरु आसन पर कृष्ण की मूर्ति स्थापित की गई है।
2.    जीवात्मा आर्थात गुरु  यानी सत्राधिकारी।
3.   हृदय यानी नामघर
4.   उदर (पेट) – भंडार गृह
5.   ज्ञान की पांच इंद्रियां यानी भगत
6.   कार्यकर्ता यानी वैष्णव
7.   श्वास प्रणाली- सत्र के शिष्य
नूतन कमलाबाड़ी सत्र में 

इन सत्रों का मुख्य उद्देश्य अपने कार्यों और गतिविधियों से सर्वशक्तिमान ईश्वर की मौजूदगी का एहसास कराना है। इसके लिए शरण, प्रार्थना, धार्मिक उत्सव आदि का आयोजन किया जाता है। सत्र धार्मिक गीतों के गायन, धार्मिक नाटक, भाव नृत्य आदि के केंद्र हैं । इन सत्रों में नाट्य, चाली, अप्सरा, झूमर, नादूभांगी, बाहर नाच, कृष्ण नृत्य, रास नृत्य, भोरताल नृत्य, सूत्रधार और ओझापाली जैसे सांस्कृतिक आयोजन लगातार होते रहते हैं।

माजुली के प्रमुख सत्र – अवनिअति, दक्षिणापथ, गड़मूर, उत्तर कमलाबाड़ी, नूतन कमलाबाड़ी, भोगपोर, बेनगनाती, मध्य माजुली कमलाबाड़ी, शामगौरी, नूतन शामागौरी, दालानी शामागौरी, माजुली बोर अलेंगी, बोर अलेंगी बालीछापोरी, अलेंगी मोदारगौरी, दिखोनोमुखा बोर अलेंगी, मोलुवाल बोर अलेंगी, बोरालेंगी बाह जेनगोनी, अलेंगी टोकोबारी, अलेंगी नरसिंहा, ओवा, बिहिमपुर, आदि बिहिमपुर, बालेसिधिया, आधार माहारा, साकाल, पुनिया साकोपारा, गड़मूर सारू आदि।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य

( SATRA OF MAJULI, STORE HOUSE OF ART AND CULTURE )

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