Monday, December 12, 2016

असम के महान संत और समाजसुधारक शंकरदेव ((10))

अमर चित्रकथा में शंकरदेव 
श्रीमंत शंकरदेव असम के प्रसिद्ध वैष्णव संत हैं जिन्होंने शंकरगीता की रचना की। उनकी गिनती असम के महान समाज सुधारक, नाटककार संगीत मर्मज्ञ और लेखक के तौर पर होती है। शंकरदेव गृहस्थ परंपरा के संत हैं। उन्होंने विवाह किया और ग्रहस्थ धर्म को निभाते हुए संत जीवन जीया। अपने शिष्यों के लिए भी उन्होंने ऐसा ही संदेश दिया। इसलिए शंकरदेव के अनुयायी विवाह करते हैं संतान उत्पन्न करते हैं और संत जैसा जीवन जीते हैं। उनके अनुयायायी रासलीला, नृत्य संगीत और  नाटक भी करते हैं। माजुली द्वीप से शंकरदेव का अन्योन्याश्रय संबंध है।
शंकरदेव का जन्म असम के नौगांव जिले की बरदौवा के समीप अलिपुखुरी में हुआ। वे बारो भुइंया समाज में पैदा हुए। यह लड़ाका और जमींदार जाति मानी जाती है। इनकी जन्म तारीख सही सही पता नहीं है पर यह 1449 ई मानी जाती है। सन् 1568 ई. में उनका देहान्त हो गया। वे कुल 119 साल जीए। शंकरदेव का 21 साल की उम्र में उनका सूर्यवती के संग विवाह हुआ। बेटी मनु के जन्म के पश्चात् सूर्यवती का निधन हो गया।

शंकरदेव की पहली तीर्थ यात्रा 32 साल की उम्र में –
शंकरदेव ने 32 वर्ष की उम्र में विरक्ति भाव आने पर देश व्यापी तीर्थयात्रा आरंभ की। पहले उन्होंने उत्तर भारत के तमाम तीर्थों का दर्शन किया। रूप और सनातन गोस्वामी से भी शंकर का साक्षात्कार हुआ था। तीर्थयात्रा से लौटने के पश्चात् शंकरदेव ने 54 वर्ष की उम्र में कालिंदी से दूसरा विवाह किया। बिहार के तिरहुत क्षेत्र के मैथिल ब्राह्मण जगदीश मिश्र ने बरदौवा जाकर शंकरदेव को भागवत सुनाई और यह ग्रंथ उन्हें भेंट किया। बताया जाता है कि शंकरदेव ने जगदीश मिश्र के स्वागत में महानाट अभिनय का भी आयोजन किया।
शंकरदेव के अहोम राज्य में लौटने पर कर्मकांडी ब्राह्मणों ने शंकरदेव के भक्ति प्रचार का घोर विरोध किया। राजा से ब्राह्मणों ने शिकायत में कहा कि शंकर वेद के खिलाफ मत का प्रचार करने में लगे हैं। हालांकि राजा ने शंकरदेव को निर्दोष घोषित किया। शंकरदेव ने अनेक पुस्तकों की रचना की।

दूसरी तीर्थ यात्रा 97 साल में
शंकरदेव ने 97 साल की उम्र में उन्होंने दूसरी बार तीर्थयात्रा आरंभ की। उन्होंने कबीर के मठों का दर्शन किया और उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शंकरदेव कई मायनों में कबीर से काफी प्रभावित भी हुए। इस यात्रा के पश्चात वे असम के बरपेटा चले आए। शंकरदेव का निधन बंगाल के कूचबिहार में 1568 ई में हुआ।

एक शरण नाम धर्म की स्थापना - शंकरदेव के वैष्णव संप्रदाय का मत एक शरण है। इस धर्म में मूर्तिपूजा की प्रधानता नहीं है। अहोम लौटकर उन्होंने एक शरण नाम धर्म की स्थापना की। इसे केवलीया या महापुरुषीया धर्म भी कहते हैं । उन्होंने मूर्तिपूजा के बदले भगवान के नाम को अधिक महत्व दिया। इसलिए नामघरों में मूर्तिपूजा नहीं होती। धार्मिक उत्सवों के समय केवल एक पवित्र ग्रंथ चौकी पर रख दिया जाता है, इसे ही नैवेद्य और भक्ति निवेदित की जाती है। इस संप्रदाय में दीक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। श्रीमंत शंकरदेव ने असम के लोगों को अशिक्षा और अंधविश्वास से दूर रहने की शिक्षा दी और ज्ञान का सच्चा स्वरूप दिखाया । आज भी असम के नामघरों में मणिकूट (गुरू आसन) पर शंकरदेव रचित कीर्तन-घोषा-श्रीमद्‌भागवत की प्रति रखी जाती है और उसी की पूजा की जाती है। यह पद्धति सिख मत से मिलती है जहां गुरुग्रंथ साहिब को श्रेष्ठ माना गया है।

अभिनय, नृत्य और संगीत – शंकरदेव ने भाओना अर्थात पौराणिक नाटकों के अभिनय और नृत्य-संगीत के द्वारा धर्म प्रचार किया और कई धार्मिक पुस्तकों की रचना कीं। इसलिए उनके अनुयायी उनके पथ पर चलते हुए भाव नृत्य और धार्मिक नाटक करते हैं। असम की राजधानी गुवाहाटी में महान संत शंकरदेव के नाम पर शंकरदेव कला क्षेत्र असम का सांस्कृतिक संग्रहालय बना है। यह शहर के पंजाबाड़ी क्षेत्र में स्थित है। यह पूर्वोत्तर क्षेत्र को दर्शाते हुए एक कला और सांस्कृति का प्रमुख संग्रहालय है। इसे असम की संस्कृति और जीवन को समझने के लिए बनवाया गया है।
शंकरदेव रचित रामायण का आदि कांड से उत्तरकांड ( उत्तर कमलाबाड़ी सत्र में )

शंकरदेव की प्रमुख रचनाएं

1 भक्तिरत्नाकर  ( असमिया वैष्णवों के पवित्र ग्रंथ , संस्कृत में)
2 आदिदशम ( अत्यंत लोकप्रिय रचना है कृष्ण की बाललीला के प्रसंग
3 मार्कडेयपुराण के आधार पर हरिश्चंद्र उपाख्यान।
4 भक्तिप्रदीप  ( आधार गरुड़पुराण) ।
5 रुक्मिणीहरण काव्य (हरिवंश तथा भागवतपुराण की मिश्रित कथा)
6 कीर्तनघोषा ( ब्रह्मपुराणपद्मपुराण, भागवतपुराण के प्रसंगों का वर्णन)
7 अनादिपतनं (वामनपुराण और भागवत के प्रसंग)
8 अंजामिलोपाख्यान 9 अमृतमंथन और बलिछलन 
10  कुरुक्षेत्र  11निमिमनसिद्धसंवाद
12 गुणमाला 13 उत्तरकांड रामायण का छंदोबद्ध अनुवाद

शंकरदेव के प्रमुख नाटक

1 विप्रपत्नी प्रसाद       2 कालिदमन यात्रा
3 केलिगोपाल            4  रुक्मिणीहरण नाटक
5 पारिजात हरण       6 रामविजय नाटक

-vidyutp@gmail.com

( SHANKARDEV AND MADHAVDEV, MAJULI, ASSAM ) 
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