Saturday, December 10, 2016

हरे भरे माजुली की सैर एक्टिवा से ((09))

माजुली द्वीप को कैसे घूमा जाए। तरीके कई हैं। आप टैक्सी बुक करें। साइकिल की सवारी करें या फिर बाइक या स्कूटर किराये पर लें। हालांकि माजुली में प्रमुख स्थलों के बीच पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी उपलब्ध है। पर हमने एक बार फिर एक्टिवा किराये पर लेने का तय किया। 

हमारा पुड्डुचेरि, दीव आदि में बाइक या स्कूटर किराया पर लेकर घूमने का अनुभव अच्छा था। यह किफायती भी पड़ता है और आप अपनी मर्जी से जहां चाहे रूक सकते हैं। कहीं नजारे देखने के लिए तो कहीं खाने पीने के लिए। माजुली में भी कई होटल और होमस्टे वाले कार, बाइक आदि किराये पर उपलब्ध करा देते हैं। हमारे मेजबान मंजीत रिसांग के पास भी किराये पर देने के लिए साइकिल, बाइक और स्कूटर मौजूद थी। हमने एक्टिवा की बात की। वे एक दिन का किराया 500 रुपये लेते हैं। हमने दो दिन दिन की बात की तो थोड़ा रियायत कर दिया। नई एक्टिवा 3जी, इस पर नंबर प्लेट भी नहीं लगा है। खैर माजुली द्वीप पर घूमने में कोई दिक्कत नहीं है।

पहले दिन एक्टिवा से हमलोग गड़मूर बाजार पहुंचे। पहले दोपहर का खाना खाया। उसके बाद एक्टिवा की के लिए खुराक का इंतजाम किया। माजुली द्वीप पर दो ही पेट्रोल पंप हैं। एक पंप इंडियन आयल का गड़मूर बाजार के पास है तो दूसरा कमलाबाड़ी बाजार के पास असम आयल का पंप है।

कब किस मार्ग से घूमना है यह हमने ला मैसन से निकलने के साथ ही तय कर लिया था। हमें मंजीत भाई ने माजुली का एक मानचित्र भी दे दिया था। पहले दिन हमने उत्तर कमलाबाड़ी सत्र, नूतन कमलाबाड़ी सत्र और अवनि अति सत्र का दौरा किया। इसके बाद शाम होने लगी। तो वापस अपने बसेरे की ओर चलने की सोची।

दूसरे दिन हमने अपना माजुली घूमने का अभियान जरा जल्दी शुरू कर दिया। आज विजयादशमी है। पर माजुली में इसका उत्सव को अलग तरीके से मनाया जाता है। लोग गड़मूर बाजार से सबसे पहले चले जंगराई मुख बाजार की ओर। हमारी मंजिल एक मिसिंग गांव को देखने की थी। गड़मूर से ग्रामीण सड़क पर सीधे 22 किलोमीटर की एक्टिवा राइड के बाद हमलोग जंगराई मुख बाजार पहुंचे। रास्ते में दो छोटे छोटे बाजार आए, जिसमें आठ दस दुकानें थी। जंगराई मुख चौराहा पर भी चंद दुकाने हीं थी।

रास्त में दोनों तरफ हरे भरे धान के खेत से होकर गुजरना बड़ा मनोरम प्रतीत हो रहा था। कई जगह रुक कर अनादि और माधवी ने धान के खेतों को निकट से देखने की इच्छा जताई। जंगराई मुख से फिर गड़मूर वापस आकर हमलोग कमलाबाड़ी बाजार पहुंचे। वहां से दक्षिणा पत्र सत्र की ओर चले। यह रास्ता कमलाबाड़ी से 18 किलोमीटर का था। इस रास्ते में भी हरे भरे खेतों का दीदार हुआ।

आखिरी की छह किलोमीटर सड़क तो खेतों के बीच होकर गुजर रही थी। खेतों में पानी में नाव चल रही थी और लोग मछलियां पकड़ने में व्यस्त थे। दूसरे दिन की हमारी एक्टिवा पर यात्रा कोई 110 किलोमीटर की रही। पर यही यात्रा अगर हम टैक्सी बुक करके करते तो दो दिन में कोई छह हजार रुपये देने पड़ते। यहां हमारा बजट एक हजार तक ही सीमित रहा।

-       -   विद्युत प्रकाश मौर्य   

( ( MAJULI ON ACTIVA, ROAD, FARM, GREEN ) 
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