Monday, November 7, 2016

डोनी पोलो – सूरज और चांद को मानने वाला अनूठा धर्म

जीरो में टैक्सी में चलते हुए टैक्सी ड्राईवर पूरा बाबू ने हमें रास्ते में कई घरों में लगे हुए झंडे दिखाए। इन्हे दिखाते हुए बताया कि यह डोनी पोलो धर्म का झंडा है। हमारा कौतूहल बढ़ा। आपातानी पूरा बाबू ने बताया कि वे भी डोनी पोलो को मानते हैं। डोनी पोलो यानी सूरज और चांद को मानने वाला धर्म। इसके झंडे पर सूरज और चांद दोनों का चित्र अंकित है। बिहार यूपी में मनाए जाने वाले त्योहार छठ में भी सूर्य की पूजा होती है। डोनी पोलो की संकल्पना छठ व्रत से साम्यता रखती है।
अरुणाचल के अधिकतर जनजातियों के लोग अपनी परम्परा के अनुसार उनकी भाषा में चन्द्र-सूर्य देवता को डोनी-पोलो बोलते हैं। खासकर तानी समूह की जनजातियां सूर्य चन्द्र की पूजा करते हैं ,जिन्हें डोनी पोलो कहा जाता है । यह नया धर्म डोनी पोलो  अरुणाचल प्रदेश की अबोटनी मध्य पट्टी में पांव पसार चुका है।

1970 के दशक में इस डोनी पोलो का प्रचार प्रसार अरुणाचल प्रदेश में तेजी से आरंभ हुआ। 28 अगस्त 1968 को अरुणाचल के पश्चिम सियांग जिले के आलोंग में कुछ बुद्धिजीवियों की बैठक में ईसाई धर्म प्रचार प्रसार के प्रतिकार पर विचार किया गया। यहीं पर डोनी पोलो का विचार प्रमुखता से आया। इसके बाद तिब्बती-बर्मी मूल के जनजातीय लोगों में डोनी पोलो विचार फलने फूलने लगा। यह अरुणाचल में हो रहे ईसाई धर्म के प्रचार के प्रतिक्रिया स्वरूप में आरंभ हुआ था। इसके सिद्धांत और विचार हिंदू धर्म के करीब हैं। पर इसकी व्याख्या र मान्यताएं अत्यंत सरल हैं इसलिए यह अरुणाचल के आदिवासी लोगों को काफी पसंद आया।

डोनी पोलो का अर्थ है सूर्य और चन्द्रमा। इस आन्दोलन का मुख्य नारा है- बोम्म्येरूंग डोनी पोलो। इसका अर्थ है डोनी पोलो की विजय होगी। इस आन्दोलन को आगे बढ़ाने और इसको आधुनिक स्वरूप देने वाले महापुरुष का नाम है तालुम रूकबो। रुकबो को उनके महान कार्यों के लिए 1996 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सम्मानित किया था। 30  दिसम्बर 2001 को तालुम रूकबो का पासीघाट में स्वर्गवास हुआ। यहां पर उनकी समाधि भी बनाई गई है।
डोनी पोलो के विश्वास के मुताबिक हर चीज का सृजन ईश्वर के शरीर से ही हुआ है। ईश्वर के बालों से धरती के पेड़ पौधों का निर्माण हुआ है तो उसके आंसूओं से पानी और बारिश बना है। उसकी हड्डी से पहाड़ और पत्थर बने हैं। उसकी दो आंखे डोनी (DONYI )  यानी सूर्य और पोलो (POLO)  यानी चांद बनी हैं। इन्ही दो प्रमुख ताकतों से आसमान के सारे तारे बने हैं। अरुणाचल में तानी बोलने वाले जनजातीय लोग आपातानी, निशी, गालो, मिशिंग आदि लोगों के बीच ये धर्म काफी लोकप्रिय है।

सत्तर से अस्सी के दशक में इस धर्म का पूर्वोत्तर के जनजातीय लोगों में खूब प्रचार हुआ। 1986 में इस विचार से जुड़ी तीन संस्थाएं क्षेत्र में काम कर रही थीं। तानी जागृति फाउंडेशन, डोनी पोलो यूथ फेडरेशन और डोनी पोलो येलाम केबांग। तालुम रुकबो डोनी पोलो विचारों के प्रसार के लिए असम में बसे  मिसिंग जनजाति के लोगों के बीच भी गए। अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में डोनी पोलो गांगीन ( मंदिर) का निर्माण भी कराया गया है। कुछ लोग डोनी पोलो को धर्म न मान कर इसे हिंदू धर्म का ही एक पंथ मानते हैं।

- विद्युत प्रकाश मौर्य

 ( DONYI POLO, TALOM RUKBO,  SUN AND MOON, ARUNACHAL PRADESH, TANI )




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