Wednesday, November 30, 2016

माजुली- विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप ((04))

माजुली को दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप होने का गौरव प्राप्त है।  8 सितंबर 2016 को असम के 35वें जिले के रूप में माजुली को दर्जा मिला। इसके साथ ही माजुली देश का पहला द्वीप जिला बन गया है। जिला बनने से पहले माजुली जोरहाट जिले का सब डिविजन था। पर माजुली दुनिया भर के सैलानियों के बीच आकर्षण का केंद्र है, कौतूहल का केंद्र है। न सिर्फ इसलिए कि यह संसार का सबसे बड़ा नदी द्वीप है बल्कि इसलिए भी कि यह आध्यात्म और कला संस्कृति का भी बड़ा केंद्र है। माजुली को वैष्णव सत्र यानी हिंदू मठों के लिए भी जाना जाता है। बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी इन सत्रों को देखने आते हैं। सुंदर द्वीप माजुली को असम राज्य की सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है। माजुली पूर्वी असम का नव वैष्णव विचारधारा का मुख्य केंद्र है। वैष्णव संत शंकरदेव यहां 16वीं शताब्दी में रहा करते थे।
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के एजे माफत मिल्स के सर्वेक्षण रिपोर्ट ऑन प्रोविंस आफ असम के अनुसार 1853 में माजुली का कुल क्षेत्रफल 1246 वर्ग किलोमीटर था। 1950 के सर्वे के मुताबिक माजुली में रहने योग्य जमीन का रकबा 1245.12 वर्ग किलोमीटर था।

परंतु बाद में हर साल भूमि के कटाव के कारण माजुली का दायरा सिमटता जा रहा है। साल 2001 की रिपोर्ट मात्र 421.65 वर्ग किलोमीटर रह गया है। हालांकि असम सरकार के टूरिज्म विभाग की वेबसाइट के मुताबिक यह 515 वर्ग किलोमीटर में विस्तारित है। पर यह तय है कि इसका आकार ऐतिहासिक तौर पर जितना पहले कभी हुआ करता था उसका आधा रह गया है।

सबसे बड़े नदी द्वीप पर विवाद - माजुली को दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप के रूप में कहा जाता है पर कुछ लोगों को तर्क है कि ब्राजील और कई अन्य जगहों के कई नदी द्वीप इससे आकार में बड़े हैं। पर माजुली में लगा असम सरकार के बोर्ड इससे दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप बताता है। वैसे तो नदी पर अवस्थित सबसे बड़ा द्वीप ब्राजील के अमेज़न और परा नदी पर स्थित माराजो द्वीप है परन्तु इसे नदी द्वीप नहीं माना जा सकता क्योंकि इसके एक किनारे पर अटलांटिक महासागर है। नदी द्वीप को लेकर कई भ्रांतियां हैं। बांग्लादेश के मेघना नदी पर हटिया द्वीप जो नोआखाली जिले में है 371 वर्ग किलोमीटर में विस्तारित है। यानी यह माजुली से तकरीबन आधा है।


ब्रह्मपुत्र, खेरकुटिया, लोहित और सुबनसिरी नदी का द्वीप - वास्तव में माजुली द्वीप कोई अकेला एक ही नदी का द्वीप नहीं है। यह दक्षिण में ब्रह्मपुत्र नदी और उत्तर में खेरकुटिया खूटी नामक धारा के बीच अवस्थित है। खेरकुटिया खूटी ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी है जो आगे चलकर फिर उसी में मिल जाती है। उत्तर में सुबनसिरी नदी खेरकुटिया खूटी से मिल जाती है। माजुली द्वीप का निर्माण कालांतर में ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों विशेषकर लोहित नदी के दिशा और क्षेत्र परिवर्तन की वजह से बनी है।

माजुली का निर्माण कब हुआ इसका आकलन मुश्किल है। इसको लेकर ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं मिलते हैं। लेकिन जो प्रमाण मिलते हैं उससे पता चलता है कि माजुली द्वीप का निर्माण 13वीं सदी से पहले हो गया था। डाक्टर डी नाथ अपनी पुस्तक माजुली-आईलैंड सोसाइटी इकोनोमी एंड कल्चर में लिखते हैं – कूच बिहार केराजा नर नारायणा ने माजुली में अपना शिविर लगाया और और उसने अहोम राजा सुखमफा (खोरा राजा) जिसका काल 1548-1563 रहा है, से उपहार आदि प्राप्त किए। वह कूच बिहार के राजा से पराजित हो गया था।

पहले इसका नाम माजाली और मोजाली हुआ करता था। औरंगजेब के काल में 17वीं सदी में मोहम्मद काजिम ने माजुली के 100 वर्ग मील में होने का जिक्र किया है। 1901 में ब्रिटिश लेखक बीसी एलेन माजुली के बारे में लिखते हैं कि यह 185 वर्ग मील में विस्तारित है और यहां 35 हजार की आबादी रहती है।


माजुली में ब्रह्मपुत्र द्वारा लाई गई अत्यंत उपजाउ जमीन के कारण यहां पर लोगों ने आकर खेतीबाड़ी शुरू की। हर साल बारिश के दिनों में ब्रह्मपुत्र यहां नई मिट्टी लेकर आती है। माजुली की जमीन पर धान, सरसों, गन्ना, पटसन, आलू और कई तरह की सब्जियां उगाई जाती हैं। इसका एक बड़ा हिस्सा वेट लैंड या दलदली जमीन वाला भी है।
- vidyutp@gmail.com

(MAJULI, RIVER ISLAND, DR D NATH, ASSAM, BRAHMPUTRA RIVER ) 


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