Thursday, November 24, 2016

गुवाहाटी से माजुली की ओर- चाय बगान के साथ छुक छुक सफर (( 01))

हमारा लंबे समय से संजोया सपना साकार होने जा रहा है। संसार के सबसे बड़े नदी द्वीप माजुली को देखने और महसूस करने का। ब्रह्मपुत्र के गोद में बसा नदी द्वीप माजुली, हमारी अगली मंजिल है। असम की राजधानी से कोई 300 किलोमीटर आगे। गुवाहाटी से ढिब्रूगढ़ इंटरसिटी एक्सप्रेस (15605) अपने नियत समय पर 8.45 बजे रात्रि में खुल जाती है। हमने पलटन बाजार के एक होटल में रात्रि का भोजन ले लिया है। इसलिए निश्चिंत हैं। ट्रेन के कोच में सहयात्री अच्छे हैं। थोड़ी देर में टीटीई टिकट चेक करने आते हैं। हमारे पड़ोस में एक बैंक अधिकारी अपनी पत्नी के साथ जा रहे हैं जो जोरहट में एक बैंक में चीफ मैनेजर हैं। उन्होंने टिकट बुक करते समय खुद को एफ (फिमेल) और अपनी पत्नी को मेल लिख दिया है । 
टीटी बाबू इस गलती पर नाराज हैं। वे कहते हैं जैसी टिकट में लिखा है वैसा पहचान पत्र दिखाओ या फिर जुर्माना भरो। बैंक अधिकारी अपनी भूल मान लेते हैं। हमलोग भी उन्हें समझाने की कोशिश करते हैं। ऐसी भूल किसी से भी हो सकती है। आजकल तो कई बार कंप्यूटर भी गलतियां कर देता है। काफी समझाने पर टीटी बाबू पिघलते हैं और उन्हें छोड़ देते हैं। बैंक वाले अधिकारी जब ये सुनते हैं कि हम जोरहाट उतरने वाले हैं तो वे तपाक से पूछते हैं कि भला जोरहाट में घूमने की क्या जगह है। मैं उन्हें बताता हूं कि हम वहां से माजुली जाएंगे।

अनादि उत्साहित हैं कि हमारी ट्रेन डिमापुर में रुकते हुए आगे बढ़ेगी, उनकी इच्छा नागालैंड के इस स्टेशन को उतरकर देखने की है। पर मध्य रात्रि में डिमापुर आया तो वे नींद के आगोश में थे। पर मेरी डिमापुर स्टेशन पर तस्वीर देखकर वे झल्लाएंगे जरूर। उनकी दिली इच्छा नागालैंड घूमने की है। मैं तो कोहिमा और आसपास 2013 में ही घूम आया हूं।

गुवाहाटी से जोरहाट टाउन जाने के लिए दिन भर में तीन ट्रेनें है सुबह में जन शताब्दी दोपहर में और रात को इंटरसिटी एक्सप्रेस. पर जोरहाट के 18 किलोमीटर बाद के स्टेशन मरियानी जंक्शन के लिए कई ट्रेनें बढ़ जाती हैं। जोरहाट इंटरसिटी दो हिस्सों में चलती है। इसका एक हिस्सा फारकटिंग जंक्शन से कटकर जोरहाट, शिबसागर होता हुआ ढिब्रूगढ़ जाता है। दूसरा हिस्सा मरियानी, सिमालगुड़ी जंक्शन, नमारुप, नहारकटिया, दुलियाजान, तिनसुकिया, न्यू तिनसुकिया, दिग्बोई होता हुआ पूर्वोत्तर के आखिरी स्टेशन लीडो तक जाता है।
इंटरसिटी एक्सप्रेस फारकटिंग जंक्शन में 30 मिनट से ज्यादा रुकती है क्योंकि यहां ट्रेन दो हिस्सों में बंटती है। फारकटिंग, गोलाघाट जिले का प्रमुख रेलवे स्टेशन है। मैं डिमापुर से आगे पहली बार जा रहा हूं।


सुबह का उजाला होने लगा है और ट्रेन गोलाघाट स्टेशन पर खडी है। आगे के सफर में ट्रेन की खिड़की से दोनों तरफ जहां तक नजर जाती है चाय के बगान ही दिखाई देते हैं। चाय ही चाय कहीं कहीं बीच में धान के खेत नजर आते हैं। नजारा मन मोह लेता  है। मैं कभी तस्वीरें उतारता हूं तो कभी छोटा सा वीडियो बनाता हूं। विश्व का सबसे बड़ा टी एक्सपेरिमेंटल एस्टेट जोरहाट में स्थित है।

गोलाघाट के बाद नुमालीगढ़, खुमटाई, बादुलीपुर, रंगालीटिंग,  बरुआ बामनगांव, भालुकमारा और रौरिया जैसे छोटे छोटे स्टेशन जल्दी जल्दी आते हैं। इन स्टेशनों का भवन किसी हाल्ट जैसा है। कई स्टेशनों पर तो कोई चढ़ता उतरता दिखाई नहीं देता। पर यहां एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव है। ट्रेन अपने तय समय आधे घंटे देर से जोरहाट टाउन रेलवे स्टेशन पर हमें उतार देती है।

वैसे तो जोरहाट असम का गुवाहाटी, सिलचर के बाद तीसरा बड़ा शहर माना जाता है पर रेलवे स्टेशन छोटा सा है। सिर्फ दो प्लेटफार्म हैं। मुख्य शहर स्टेशन के मुख्य प्रवेश के उल्टी तरफ है। हमलोग लाइन क्रॉस करके बाहर निकलते हैं। हमें बस-आटो स्टैंड पहुंचना है जहां से निमाती घाट के लिए छोटे वाहन मिलते हैं। आटो वाला 80 रुपये मांग रहा है तो रिक्शावाला 50 रुपये। हम रिक्शे पर बैठ जाते हैं। रिक्शावाला बिहार के मुजफ्फरपुर जिले का है। वह 40 साल से जोरहाट में है।  सुबह का समय है अभी जोरहाट का बाजार बंद है इसलिए हमें शहर की जीवंतता का एहसास नहीं होता। रिक्शावाला हमें निमाती घाट जाने वाले ऑटो स्टैंड पर पहुंचा देता है। हम उसे धन्यवाद कह उतर जाते हैं।

-         विद्युत प्रकाश मौर्य    ( आगे की 25 कड़ियों में लगातार पढ़ते रहिए माजुली की कहानी ... ) 



( ASSAM, RAIL, JORHAT TOWN, MAJULI, FURKATING JN, DIMAPUR, NUMALIGARH, TEA GARDEN ) 

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