Tuesday, November 15, 2016

नहारलगून का बाजार और राजधानी इटानगर

दोपहर के दो बजे हैं और हमलोग नहारलगून बस स्टैंड के पास पहुंच चुके हैं। इटानगर की सीमा में आने के बाद हमारे सूमो का अगला पहिया पंक्चर हो गया है। ड्राईवर दो जगह हवा भरवा कर हमें मंजिल तक पहुंचा देते हैं। पर हमें देर नहीं होती। हमारी ट्रेन रात 10 बजे नहारलगून रेलवे स्टेशन से खुलेगी।

हमारी एक छात्रा रही दीपिका कश्यप के पिताजी एनसी कश्यप अरुणाचल में सरकारी नौकरी में है। उनसे मिली जानकारी के मुताबिक नहारलगून और इटा नगर से शाम ढल जाने के बाद रेलवे स्टेशन जाने में मुश्किल आती है। आटो वाले अनाप शनाप किराया मांगते हैं। वे बताते हैं कि देर होने पर वे खुद कई बार फंस चुके हैं। फिलहाल नहारलगून रेलवे स्टेशन के पास आबादी नहीं है। वहां बैठकर घंटो गुजारना काफी बोरियत भरा हो सकता है। पर रात को स्टेशन जाने के लिए साधन का भी अभाव होने वाला था। दिन में आटो रिक्शा वालों से बात की। वे नहारलगून टैक्सी स्टैंड से रेलवे स्टेशन के 8 किलोमीटर के सफर के लिए 300 रुपये मांग रहे थे। यही किराया रात में 600 भी हो सकता है। आटो वालों का तर्क था कि वापसी में कोई सवारी नहीं मिलती।


बस स्टैंड में हमें जानकारी मिली कि अरुणाचल रोडवेज की सरकारी बस शाम को 7.30 बजे रेलवे स्टेशन के लिए चलती है। उसमें 20 रुपये प्रति सवारी लगता है। हमने उस बस का इंतजार करना ही बेहतर समझा। बस स्टैंड परिसर में बैठने के लिए एक छोटा सा शेड, एक छोटा दफ्तर और एक कैंटीन है। 24 घंटे में कुछ गिनी चुनी बसें यहां से खुलती हैं। बस स्टैंड में क्लाक रूम नहीं है। ऐसा होने पर हम सामान जमाकर घूम सकते थे। नहारलगून से इटानगर के लिए शेयरिंग टैक्सी, टेकर जाते हैं। उनमें किराया 30 रुपये है।


बस स्टैंड के आसपास नहारलगून का बाजार काफी अच्छा है। कई ब्रांडेड शो रुम हैं। खाने पीनेके भी अच्छे विकल्प हैं। हमें पास में शिल्पा बेकरी काफी अच्छी लगी। वहां से हमने समोसा, मालपुआ, पीठा, स्वीट बंद, जूस, नारियल मिठाई आदि कई चीजें लेकर खाईं। मैं घूमते हुए पड़ोस के सब्जी बाजार में चला जाता हूं। वहां एक सब्जी के दुकानदार मिलते हैं छपरा वाले। वे बताते हैं कि अगर स्टेशन पैदल जाएं तो शार्ट कट रास्ता तीन किलोमीटर का है। वही हमें मालाबार होटल के बारे में बताते हैं। वैसे उसका नाम महालक्ष्मी होटल है, पर उसके संचालक मालबार केरल के हैं। यहां 60 रुपये में काफी अच्छा मसाला डोसा मिला। चलते चलते हमने रात के लिए वेज बिरयानी यहां पैक करा लिया।

बारी बारी से आसपास के बाजार में घूमते हुए हमने पांच घंटे गुजार दिए। ठीक 6.40 बजे रेलवे स्टेशन जाने वाली बस आकर लग गई। इसके खुलने का समय 7.30 है। बस इटानगर से आती है। हमें बस में जगह मिल गई। साथ में दो लोग मिले जो बिहार के वैशाली जिले के सराय के पास के गांव के रहने वाले हैं। उनसे बातें करते करते बस के खुलने का समय हो गया। नीयत समय पर बस चल पड़ी। उसने हमें 20 मिनट में रेलवे स्टेशन पहुंचा दिया।
-         विद्युत प्रकाश मौर्य

(NAHARLAGUN MARKET, FOOD, ITANAGAR, ARUNACHAL , BUS FOR RAILWAY STATION) 

    

1 comment:

  1. ऑटो वालों की मनमानी हर जगह ही चलती है। बढे शहरों में तो ऑनलाइन कैब्स ने काफी राहत पहुंचाई है। बहुत अच्छा संस्मरण।

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