Saturday, November 12, 2016

दुनिया का सबसे ऊंचा स्वंभू शिवलिंगम – सिद्धेश्वर महादेव


उत्तर से दक्षिण तक पूरब से पश्चिम तक देश के हर कोने में शिव का वास है। पर हम बात करने जा रहे हैं पूर्वोत्तर में स्थित अनूठ शिवलिंगम की। यह अब तक ज्ञात शिवलिंगम में सबसे विशाल स्वंयभू  शिवलिंगम है, जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं।

अरुणाचल प्रदेश के जीरो घाटी के करडा पहाड़ी पर विराजते हैं सिद्धेश्वर नाथ महादेव। यह महादेव का दुनिया का सबसे बड़ा स्वंभू शिवलिंगम है। इतना विशाल शिवलिंगम अभी तक कहीं और नहीं देखा गया है। 
धरती से बाहर इस शिवलिंगम की ऊंचाई 20 फीट है। इसका चार फीट हिस्सा धरती के नीचे है। कुल मिलाकर यह 24 फीट ऊंचा शिवलिंगम शिवभक्तों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है।

साल 2004 में हुई इस शिवलिंग की खोज  - 

साल 2004 से पहले अरुणाचल प्रदेश के इस शिवलिंगम के बारे में कोई नहीं जानता था। बताया जाता है कि जंगल में लकड़ियां काटते वक्त नेपाली लकड़हारों को अचानक इसका पता चला। जंगल में एक बड़े पेड़ को काटते वक्त उन्होंने पेड़ को गिराया तो पेड़ अपने आप दूसरी तरफ चला गया। लकड़हारों को यहां किसी अदृश्य शक्ति का एहसास हुआ। उन्होंने कटाई का काम रोक दिया। इसके बाद इस स्थल की सफाई की गई तो यहां विशाल शिवलिंगम के बारे में पता चला। लोग यहां जलाभिषेक करने आने लगे। आसपास में इसके बारे में चर्चा होने लगी। पर ध्यान से देखने पर पता चलता है कि यह 20 फीट का शिवलिंग अदभुत है इसके ऊपरी हिस्से में नागवासुकि शिव के गले में लिपटे हुए दिखाई देते हैं तो नीचे के हिस्से में गणपति कार्तिकेय और पार्वती की प्रतिमा भी देखी जा सकती है। यानी शिव का पूरा परिवार यहां पर एक साथ है। इतना ही नहीं शिवलिंगम के नीचे  अनवरत जल धारा भी बहती रहती है इसे लोग गंगा का मानते हैं।


शिव पुराण में है इसकी चर्चा -  

साल 2004 से ही इस शिवलिंगम की पूजा कर रहे पुजारी देवेंद्र दूबे बताते हैं कि अरुणाचल में शिव के मंदिर की मौजूदगी की चर्चा शिव पुराण के 17वें अध्याय के रुद्र खंड में आती है। इसमें लिखा गया है कि अरुणाचल में सबसे बड़ा शिवलिंगम स्थित होगा। साथ ही यह भी चर्चा आती है कि पार्वती ने घोर तप करके अरुणाचल में शिव को प्रकट किया।

साल 2004 में शिव के प्रकट होने की खबर जब चारों तरफ फैली तो जीरो के  बाजार से यहां तक जाने के लिए सुगम रास्ते का निर्माण कराया गया। इससे पहले यहां तक आने के लिए कोई सड़क नहीं हुआ करती थी। जब श्रद्धालु यहां शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं तो पूजा के बाद अदभुत शांति और संतुष्टि का एहसास होता है। 

कई लोगों का तो यहां से वापस लौटने का दिल नहीं करता। जीरो बाजार के एक हिंदू दुकानदार बताते हैं कि ऐसा लगता है जैसे शिव साक्षात यहां आशीर्वाद दे रहे हों। वहीं पुजारी जी बताते हैं कि यहां सच्चे दिल के इच्छा करने वाले की मनोकामना पूरी होती है। इसलिए इनका नाम सिद्धेश्वर महादेव रखा गया है।

भले ही अरुणाचल प्रदेश के जीरो घाटी स्थित इस शिवलिंगम का शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में स्थान न हो पर यह शिव का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। हालांकि जानकारी के अभाव में अभी यहां देश के कोने कोने से शिवभक्त कम ही आते हैं। पर पूर्वोत्तर राज्यों के लोग और अरुणाचल के लोग यहां बड़ी संख्या में आते हैं।
सोमवार को उमड़ते हैं श्रद्धालु -  रविवार, सोमवार के अलावा शिवरात्रि और सावन में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
घने जंगलों में स्थित शिव लिंगम के चारों तरफ कोई मंदिर नहीं बना है। हरे भरे वन के मनोरम वातावरण के बीच यह विशाल शिवलिंग स्थित है। हर रोज सुबह 6 बजे से शाम ढलने तक पुजारी यहां मौजूद होते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यहां एक शेड का निर्माण कराया गया है जहां आप बारिश के समय पनाह ले सकते हैं। परिसर में एक कुआं, हवन कुंड और  कुछ घंटियां लगाई गई हैं। पर यहां कोई भव्य भवन या मंदिर की संरचना बनाने की कोई योजना नहीं है।
बड़ी संख्या में हर साल शिवभक्त श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा पर जाते हैं। पर अमरनाथ यात्रा की तुलना में अरुणाचल के सिद्धेश्वर महादेव की यात्रा काफी सहज है। यहां आप सालों भर हर मौसम में पहुंच सकते हैं।

कैसे पहुंचे – अरुणाचल प्रदेश की राजधानी इटानगर या नहारलगून रेलवे स्टेशन से जीरो की दूरी कोई 120 किलोमीटर है। जीरो के मुख्य बाजार हापोली से सिद्धेश्वर महादेव की दूरी 6 किलोमीटर है। यह 6 किलोमीटर की दूरी आप पदयात्रा करके पहुंच सकते हैं। या आप हापोली के टैक्सी स्टैंड से छोटी गाड़ियां किराये पर ले सकते हैं। ये एक तरफ का किराया 350 रुपये या दोनों तरफ का 600 से 700 रुपये ले सकते हैं।

सिद्धेश्वर महादेव के दर्शन -  हमारी सिद्धेश्वर महादेव की यात्रा टाटा आइरिस छोटी चार पहिया गाड़ी से शुरु हुई। हालांकि हमलोग पैदल जाना चाहते थे, पर माधवी 12 किलोमीटर की ट्रैकिंग करने के पक्ष में नहीं थीं। सो हमने एक छोटा वाहन बुक किया। इसके ड्राईवर पूरा बाबू ( 98561 30586 ) आपातानी समुदाय के हैं। 600 रुपये में आना जाना तय हुआ। पर हमे रास्ते में कई लोग पदयात्रा करके जाते हुए मिले। खास तौर पर जीरो में सीआरपीएफ और सेना के कैंप में आने वाले जवान सिद्धेश्वर महादेव जरूर जाते हैं। इतना ही अरुणाचल सरकार के तमाम बड़े अधिकारी और राजनेताओं की भी महादेव में काफी आस्था है। यहां अमर सिंह और जया प्रदा जैसे लोग भी महादेव के दर्शन के लिए आ चुके हैं। दर्शन कर लौटने के बाद अनादि इतने प्रसन्नचित्त थे कि हापोली बाजार  में वापस आने के बाद बोले पापा एक  बार फिर महादेव के दर्शन करने पदयात्रा करते हुए चलते हैं।

सिद्धेश्वर नाथ मंदिर के पुजारी देवेंद्र दूबे  - मूल रुप से बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले दूबे जी ( 9402940478 ) कई दशक पहले अरुणाचल वासी हो चुके हैं। सरदी गरमी बरसात हर मौसम में वे सुबह 6 बजे से महादेव के पास पूजा के लिए उपस्थित हो जाते हैं। पहले सात किलोमीटर पैदल चल कर आते थे। बाद में जीरो के लोगों ने चंदा करके उन्हें एक स्कूटी भेंट की। अब वे इसी स्कूटी से रोज सुबह मंदिर तक पहुंचते हैं। वे आने वाले भक्तों को बड़ी आस्था की शिव महात्म्य बताते हैं। 

- माधवी रंजना 

( ZIRO, ARUNACHAL, SHIVA LINGAM, SIDDHESHWAR NATH, KARDO HILL ) 





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