Thursday, November 3, 2016

अरुणाचल में आपातानी की अनूठी दुनिया

An old Apatani Lady
जीरो की पहचान है यहां के निवासी आपातानी जनजाति के लोगों से। वैसे तो पूरे अरुणाचल जनजातीय लोगों का निवास है। पर हर जनजाति की अपनी अलग विशेषता है और अलग पहचान है। हर जनजाति की अपनी अलग भाषा भी है।
आपातानी लोग जीरो के आसपास ही पाए जाते हैं। आपातानी महिलाएं चेहरे पर टैटू बनवाती हैं। यही उनकी पहचान बन गई है। हर आपातानी बुजुर्ग महिला के गाल और नाक पर काले टैटू देखे जा सकते हैं। इसके साथ ही वे अपने नाक के दोनों तरफ बड़े बड़े काले रंग के नोजपिन लगाती हैं। ये पिन लकड़ी का बना होता है।

आपातानी महिलाओं के चेहरे पर टैटू बनवाए जाने की कहानी बड़ी रोचक है। ऐतिहासिक सच्चाई रही है कि आपातानी महिलाएं काफी सुंदर हुआ करती हैं। पर ज्यादातर आपातानी लोग गरीब और मेहनतकश हुआ करते हैं। आपातानी की मुख्य दुश्मनी निशी कबीले के लोगों से हुआ करती थी। पूर्वोत्तर के जाने माने पत्रकार रविशंकर रवि इस बारे में बताते हैं कि निशी राजा अक्सर अक्सर आपातानी लड़कियों की सुंदरता पर मोहित होकर उन्हें अपने साथ ले जाते थे। इससे आपातानी लड़कियां निशी लोगों छिप छुपाकर रहती थीं। 

इसके बाद आपातानी लोगों में ख्याल आया क्यों ने अपनी इस सुंदरता को खत्म करने के लिए कुछ किया जाए। तो जिस तरह चमकते चांद में दाग होता है। आपातानी महिलाओं ने चेहरे पर काले टैटू बनवाना शुरू कर दिया। गाल और नाक पर काले काले टैटू आपातानी युवतियों के सौंदर्य को ढक लेते थे। धीरे धीरे यह सब कुछ परंपरा का हिस्सा बन गया। एक वक्त ऐसा आया कि किसी आपातानी महिला ने फेस टैटू नहीं बनवाया हो तो कोई आपातानी युवक उससे शादी नहीं करता था। जीरो के बाजार में घूमते हुए तमाम बुजुर्ग आपातानी महिलाओं इन फेस टैटू के साथ दिखाई दे जाती हैं।

फेस टैटू को कहा अलविदा 
पर वक्त का पहिया घूम रहा है और अब बदलाव का वक्त आ गया है। आपातानी और निशी समुदाय में अब पहले जैसी दुश्मनी नहीं रही। 2015  में तो जीरो में आपातानी और निशी समुदाय का बड़ा सम्मेलन हुआ। इसमें लड़ाई झगड़े भुलाने का संकल्प लिया गया। साथ ही ये तय हुआ कि आपातानी और निशी लोगो के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता बनेगा। यानी शादी विवाह भी होंगे। जीरो में हमें स्थानीय भ्रमण कराने वाले टाटा आयरिश कैब के ड्राईवर मिले जो आपातानी हैं। उन्होंने बताया कि अब नई उम्र की आपातानी लड़कियां फेस टैटू नहीं बनवाती हैं। आपातानी समाज के पढ़े लिखे लोगों और नेताओं ने ये आह्वान किया है कि वे फेस टैटू बनवाना बंद करें। स्कूल कॉलेज जाने वाली आपातानी महिलाओं ने फेस टैटू को अलविदा कह दिया है। वे बदलते दौर के साथ कदमताल कर रही हैं।

इतना ही नहीं आपातानी के बारे में कहा जाता था कि वे लोग जीरो छोड़कर कहीं बाहर जाना पसंद नहीं करते। पर अब ये पुराने मिथक टूट रहे हैं। अब आपातानी समाज से पढ़ लिखकर युवा पायलट भी बन चुके हैं। एक आपातानी युवा भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) का हिस्सा भी बन चुका है।  
पर इन बदलाव के बीच आपातानी लोगों ने अपनी परंपराएं छोड़ी नहीं हैं। आपातानी लोग मूल रूप से धान की खेती करते हैं। ओल्ड जीरो के पास हीजा गांव आपातानी लोगों का बड़ा गांव है। लोअर सुबानसिरी जिले में जीरो के आसपास आपातानी लोगों की संख्या 60 हजार के आसपास है। आपातानी ये तिब्बती मूल की जनजाति है। इनका लिखित इतिहास नहीं मिलता। पर वे अपनी परंपराओं में अपनी कहानी सुनाते हैं। उनके समाज में लोकतांत्रिक व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही है।

1897 में पहली बार आपातानी लोग ब्रिटिश लोगों से संपर्क में आए। अब आपातानी में काफी लोग ईसाई भी बन गए हैं। पर आपातानी लोगों के बीच डोनीपोलो धर्म ज्यादा लोकप्रिय है जिसमें वे सूरज और चांद दोनों को प्रमुखता देते हैं। आपातानी लोगों का प्रमुख त्योहार मुरंग है जो जनवरी में मनाया जाता है। वहीं जुलाई में भी अपना उत्सव मनाते हैं जब वे कई जानवरों की बलि देकर ईश्वर को खुश करने की कोशिश करते हैं।
जीरो के सब्जी बाजार में कारोबार में लगीं आपातानी महिलाएं। 

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com

( ZIRO, ARUNCHAL, APATANI PEOPLE, DONYI POLO RELIGION ) 

7 comments:

  1. आपके अरुणाचल यात्रा का संस्मरण पढ़ा काफी ज्ञानवर्धक लगा।
    राघवेन्द्र सिंह कुशवाहा
    सीतामढ़ी

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  2. आपके अरुणाचल यात्रा का संस्मरण पढ़ा काफी ज्ञानवर्धक लगा।
    राघवेन्द्र सिंह कुशवाहा
    सीतामढ़ी

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  3. आपके संस्मरण काफी ज्ञानवर्धक लगे.

    बधाई.

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  4. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’रंगमंच के मुगलेआज़म को याद करते हुए - ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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  5. बहुत बहुत धन्यवाद जी

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