Friday, October 7, 2016

देश का सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशन - हावड़ा

हावड़ा रेलवे स्टेशन। देश के सबसे व्यस्त और बड़े रेलवे स्टेशनों मे शुमार है। हर रोज लाखों लोग हावड़ा से अपनी मंजिल तक जाने के लिए ट्रेन पकड़ते हैं तो रोजाना लाखों लोग उतर कर कोलकाता शहर की भीड़ा का हिस्सा बनते हैं। रेलवे स्टेशन की लाल रंग की इमारत बाहर से काफी भव्य लगती है।

ये रेलवे स्टेशन न होकर एक टर्मिनल है जहां आकर ट्रेनें खत्म हो जाती हैं। प्लेटफार्म के खत्म होने के बाद स्टेशन की बिल्डिंग और बाहर निकलने पर सामने हुगली नदी नजर आती है। हावड़ा रेलवे स्टेशन पर कुल 23 प्लेटफार्म हैं। इस लिहाज से यह देश का सबसे बड़ा स्टेशन है। इस रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों की आवाजाही 1854 में आरंभ हुई। 
पर मेरा पहली बार जाना हुआ था 1991 में। बचपन से हावड़ा का नाम सुनता है था, बिहार से कोलकाता जाने वालों की जुबां से। वे हाबड़ा कहते थे। स्टेशन की भव्यता के किस्से सुनाते थे।

सावधान न हों तो यहां बाप बेटे पति पत्नी एक दूसरे से बिछूड़ जाएं। सालों भर यहां मेले सा माहौल रहता है। हावड़ा देश के ऐसे रेलवे स्टेशनों शामिल है जहां पर स्टेशन के प्लेटफार्म तक सीधे कारें आ सकती हैं। यानी ट्रेन से उतरिए और अपनी कार में बैठ जाइए। 

1991 में हमारी ट्रेन दानापुर एक्सप्रेस सुबह-सुबह हावड़ा स्टेशन में प्रवेश कर रही थी तो हम इसके लिए तैयार नहीं थे। हम ट्रेन की सफर का पूरा मजा भी नहीं ले पाए थे। शाम को इसी स्टेशन से पुरी की ट्रेन पकड़नी थी। पुरी से कुछ दिनों बाद वापसी भी यहीं हुई। एक बार फिर पटना की ट्रेन हावड़ा से ही पकड़ी।
कई सालों बाद हैदराबाद से फलकनुमा से हावड़ा पहुंचा। तो एक बार फिर वही नजारा जीवंत हो उठा। स्टेशन बिल्डिंग के अंदर प्रतीक्षालय के साथ जीता जागता बाजार है। बंगाली रसगुल्ले से लेकर अपनी पसंद की तमाम चीजें यहीं से खरीद लें। कुछ साल बाद पटना से जन शताब्दी से दोपहर में हावड़ा पहुंचा। हर बार ये स्टेशन कुछ नया सा लगता है।
हालांकि कोलकाता शहर में सियालदह, कोलकाता और शालीमार नामक तीन और स्टेशन हैं जहां से लंबी दूरी ट्रेनें चलती हैं पर हावड़ा जैसी भीड़ कहीं नहीं दिखाई देती। 2014 में अनादि और माधवी के साथ सुबह सुबह हावडा स्टेशन पर उतरा। बाहर निकलते ही हावड़ा ब्रिज सीना ताने खड़ा दिखाई दिया। हमने ये पुल टैक्सी से पार किया। पुल पार करते वक्त हावड़ा रेलवे स्टेशन की शानदार इमारत नजर आती है।

हावड़ा रेलवे स्टेशन पूर्व रेलवे के अंतर्गत आता है। इस्ट इंडियन रेलवे कंपनी ने 1851 में यहां स्टेशन बनाने का प्रस्ताव दिया। जब 1854 में रेलवे स्टेशन चालू हुआ तो यह कलकत्ता शहर का प्रवेश द्वार बन गया। तकनीकी रूप से हावड़ा अलग जिला है कोलकाता से। पर हुगली नदी के इस पार हावड़ा उस पार कोलकाता। 500 मीटर की दूरी पैदल पार करें या फिर फेरी से।

हावडा रेलवे स्टेशन की वर्तमान इमारत 1905 में बनकर तैयार हुई। इसके आर्किटेक्ट थे हेल्सी रिकार्डो। तब यहां 15 प्लेटफार्म बने थे। पर बाद 8 नए प्लेटफार्म बनाए गए। 16 से 23 नंबर वाले प्लेटफार्म न्यू कांप्लेक्स में हैं। यह टर्मिनल 2 कहलाता है जो साउथ ईस्टर्न रेलवे के अंतर्गत आता है। बाकी हिस्सा पूर्व रेलवे के अधीन है। यानी हावड़ा रेलवे के दो जोन में समाहित है। 1969 में देश की पहली राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन हावड़ा से नई दिल्ली के बीच चली थी।

(HOWRAH, BENGAL, RAIL )


      

1 comment:

  1. बहुत अच्छा जानकारी मिला। धन्यवाद ।

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