Tuesday, November 1, 2016

जीरो में भी है यूपी और बिहार

पूरे पूर्वोत्तर में जहां जाओ मेरी मुलाकात अपने भाइयों से जरूर हो जाती है। अपने भाई मतलब यूपी और बिहार के मेहनतकश लोग। वैसे तो मैं देश के हर राज्य के लोगों को अपना भाई मानता हूं। देश के सात राज्यों में नौकरी कर चुका हूं वहीं 34 राज्यों का नमक खाया है। पर यूपी बिहार के लोगों की कुछबातें काफी प्रेरित करती हैं। यहां के मेहनतकश लोग रोजी रोजगार की तलाश में देश के हर राज्य तक पहुंच चुके हैं। उनका ये पलायन दशकों से नहीं पिछली कई शताब्दियों से जारी है। वे कई राज्यों में मुश्किल हालात में भय और भूख के बीच भी जिंदगी गुजार रहे हैं। अरुणाचल जैसे राज्य में जहां अब कोई बाहरी व्यक्ति जाकर नागरिकता नहीं प्राप्त कर सकता, वहां भी ये लोग कई तरह के काम में लगे हुए हैं। जीरो के बाजार में स्टेशनरी की दुकान, जनरल स्टोर, मिठाई की दुकानें और कास्मेटिक की दुकानें बिहार के लोग चला रहे हैं।

विपरीत हालात में जान लगाकर श्रम करना बिहारके लोगों की विशेषता है जो उन्हें किसी भी हालात में जीने की राह दिखाती है। जीरो के बाजार में कई साल से मिठाई की दुकान चलाने वाले गुप्ता जी बताते हैं, हमारे ज्यादातर ग्राहक स्थानीय लोग है। वे लोग पूरी सब्जी, चाय, समोसा और मिठाई खाना चाहते हैं तो हम बनाते हैं। हलांकि यहां दुकान चलाने की अपनी मुश्किले हैं। खासतौर पर दो संगठन को हर साल अवैध वसूली जैसी राशि देनी पड़ती है।

 आपातानी और निसी दोनो समुदाय के छात्र संगठन दुकानदारों से वसूली करते हैं। हालांकि यह चंदा बहुत ज्यादा नहीं होता। साल में दो बार तीन तीन हजार रुपये। पर मुश्किल ये है कि दोनों संगठनों को रुपया देना पड़ता है। इससे ज्यादा मुश्किल आती है कि कई बार स्थानीय लोगों से लड़ाई हो जाती है। गुस्से मेंआए स्थानीय लोग भला बुरा कहते हैं कई बार पिटाई पर उतारू हो जाते हैं। इन सब हालात को बड़ी ही कूटनीति से संभालना पड़ता है।  बाजार में स्टेशनरी की अच्छी खासी दुकान चलाने वाले मुजफ्फरपुर के सज्जन ऐसी समस्याओं से कुछ परेशान दिखाई दिए। दरअसल अरुणाचल के भोले भाले लोग व्यापार कि बारिकियों में खुद को सफल साबित नहीं कर पाते। पर बिहार को लोग इसमें पारंगत हो गए हैं। ओल्ड जीरो में एक जनरल स्टोर वाले मिले। उनकी बिटिया का चेहरा देखकर मैंने पूछा कहां घर है...जवाब मिला छपरा। कई दशक से जीरो में हैं पूरा परिवार भोजपुरी बोलता है।

जीरो में अच्छी संख्या बंगाली बोलने वालों की भी है। ये बंगाली लोग ज्यादातर कारोबार में लगे हुए हैं। जमकर दुकानें चला रहे हैं। असम के सिलचर के बंगाली दुकानदार बड़े अपनेपन से मिले,  कहा जीरो का दशहरा देखकर जाइए। शहर में दो पंडाल सजे थे, वहां मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई थी और धूमधाम से दशहरा मनाया जा रहा था। हमने पंडाल में जाकर मां दुर्गा का आशीर्वाद लिया। ढोल बजाने वाला दल मां को रिझाने के लिए अपनी कला का प्रदर्शन कर रहा था। जिंदगी अपनी रफ्तार से चल रही थी।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
 ( ZIRO, ARUNACHAL MARKET, UP AND BIHAR PEOPLE ) 

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