Monday, October 24, 2016

नहारलगून से जीरो की ओर – सूमो से सफर

इनर लाइन परमिट की जांच के बाद हमलोग नहारलगून स्टेशन के बाहर आ चुके थे। नया नवेला स्टेशन किसी विशाल घर जैसा लगता है। हमें सहयात्रियों ने पहले ही बता दिया था कि स्टेशन नहारलागून बाजार से 5 किलोमीटर बाहर है। स्टेशन के आसपास आबादी काफी कम है। रोज सुबह एक ट्रेन आती है। हफ्ते में एक दिन दिल्ली वाली ट्रेन आती है लिहाजा स्टेशन से बाजार तक जाने के लिए हमेशा वाहन नहीं मिलता। पर सुबह गुवाहाटी इंटरसिटी के आने के बाद अरुणाचल रोडवेज की दो बसें स्टेशन से चलती हैं। एक बस नहारलगून से बांदरदेवा की ओर जाती है दूसरी बस इटानगर जाती है।

इटानगर रेलवे स्टेशन से तकरीबन 15 किलोमीटर है। तो हमलोग बिना कोई देरी किए नहारलगून बस स्टैंड तक जाने वाली बस में बैठ गए। किराया 20 रुपये प्रति व्यक्ति है। 20 मिनट बाद हमलोग नहारलगून बस-सूमो स्टैंड पहुंच चुके थे। हमने बस के कंडक्टर को बताया कि हमें जीरो जाने वाली वाली सूमो बुक करानी है। उन्होंने हमारा सहारा सूमो सेवा के काउंटर पर पहुंचा दिया। नहारलगून से जीरो का एक व्यक्ति का किराया 350 रुपये है। हमने तीन सीटें बुक करा लीं।

सुबह का उजाला होने लगा है। सूमो वाले ने हमारा सारा सामान छत पर बांध दिया। उसे एक पन्नी से ढक भी दिया जिससे बारिश से बचाव हो सके। ड्राईवर महोदय फर्राटे से अंगरेजी बोलते हुए अपना परिचय दे रहे थे। वे अरुणाचल के सुदूर जिले के निवासी हैं। सूमो सुबह 6 बजे चल पड़ी। कुछ सवारी 5 किलोमीटर आगे निराजुली से उठाया। पर डेकरांग ब्रिज से पहले सूमो के रेडियेटर में खराबी आ गई। एक गैराज में 45 मिनट तक ठीक कराते रहे। फिर आगे का सफर आरंभ हुआ। नहारलगून से जीरो की दूरी कोई 120 किलोमीटर है।

पर कोई 30 किलोमीटर चलने पर गाड़ी का रेडियेटर फिर जवाब देने लगा। ड्राईवर ने गाड़ी के झरने के पास रोकी। इंजन में पानी डालना शुरू किया। थोड़ी देर में एक और ड्राईवर आए उन्होंने मदद की। यहां गाड़ी आधे घंटे खड़ी रही। हमने समय का सदुपयोग करते हुए झरने के जल ब्रश किया। हाथ मुंह धोए। हमारी बगल वाली सीट पर एक अरुणाचली बाला बैठी थी जो 12वीं कक्षा में पढ़ती है। वह याजुली में उतर गई।
तकरीबन 50 किलोमीटर चलने पर पोटीन नामक जगह आता है। यहां पर आते जाते सारे सूमो वाले आधे घंटे रुकते हैं। यहां खाने के कई होटल, फल आदि की दुकाने हैं।  हमने यहां खाया तो नहीं पर भात की थाली 80 रुपये की मिल रही थी। खाना अनलिमिटेड। हमने एक मुरुंडा का पैकेट खऱीदा। हमारा देसी फास्ट फूड जो हमारा सफर में साथ देता है। यह हमारे भोजपुरी क्षेत्र का दाना (फरही) है जिसे गुड़ की चासनी में लपेट कर गोला बनाया जाता है। इसे कहीं भी कभी भी खाना अच्छा रहता है। 

याजुली के बाद अब हमारे बगल में बैठे थे अरुणाचल के युवा सीवोह जो दिल्ली मेंरहकर एमबीए कर रहे हैं। यह सुनकर ही हम अरुणाचल घूमने आए हैं उन्हें काफी खुशी हुई। जीरो से पहले हापोली में सूमो रूकी। हम यहीं उतर गए। हमारी बुकिंग होटल सिटी पैलेस में है जो जीरो डिसी आफिस और कोर्ट के पास है। सीवोह ने हमें होटल तक पहुंचाया। सीवोह ने बताया कि वे संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता हैं। सफेद गुलाबी रंग के विशाल होटल के रिसेप्शन पर हमारा इंतजार हो रहा था।    


नहारलगून- जीरो मार्ग - ( दूरी -110 किलोमीटर )   निराजुली - डेकरांग ब्रिज - दोईमुख- सोपो- जांपा- होज – पोटीन – पोसा – याजाली – याचुली- जोरम – हापोली- जीरो।  
-vidyutp@gmail.com
IN ROUTE OF ZIRO.... A STOP AT POTIN. 


( ZIRO, ARUNACHAL, SUMO, HAPOLI, POTIN ) 
    

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