Friday, October 14, 2016

दीदी के दूरंतो एक्सप्रेस से दिल्ली

कोलकाता से दिल्ली के लिए दो दुरंतो एक्सप्रेस चलती है एक हावड़ा से तो दूसरी सियालदह से। मेरी ट्रेन सियालदह से थी। शाम को 6.30 बजे यह ट्रेन दिल्ली के लिए रवाना होती है। ट्रेन नंबर 12259 दूरंतो एक्सप्रेस सियालदह के बाद धनबाद फिर मुगलसराय और कानपुर में रूकती है। इसके नई दिल्ली  पहुंचने का तय समय 11.30 बजे है। यानी 17 घंटे में दिल्ली का सफर। सुनने में अच्छा लगता है। दोनों शहरों के बीच कुल दूरी 1453 किलोमीटर की है।
मैं सियालदह स्टेशन पर 6 बजे शाम को पहुंच जाता हूं। एक कुली से पूछता हूं दूरंतो कितने नंबर पर है। वह बताता है 13 नंबर पर। स्टेशन के मुख्यद्वार से प्लेटफार्म ज्यादा दूर नहीं था। पर हमारा कोच बी-2 काफी आगे था। इसलिए प्लेटफार्म पर ही लंबा चलना पड़ा। मेरा बर्थ नंबर 17 है लोअर बर्थ। सभी यात्री आ चुके हैं। पर 19 नंबर बर्थ अभी खाली है। धनबाद रेलवे स्टेशन पर दूरंतो समय पर पहुंची। 19 नंबर बर्थ की स्वामिनी मोहतरमा यहां पधारती हैं। वे दिल्ली के किसी कालेज में पढ़ती हैं। उनके मम्मी पापा उन्हें छोड़ने आए हैं।

मैडम का वजन समान्य लड़कियों सो ढाई गुना है।उसपर लगातार चाकलेट खाए जा रही हैं। टीटीई के आने पर उन्होंने अपने लिए लोअर बर्थ का अनुरोध किया। टीटीई ने असमर्थता जताई। आधे घंटे बाद मेरा सोने का विचार बना। मैंने उनसे पूछा आपको लोअर बर्थ चाहिए। उन्होंने कहा हां, मैंने कहा, आप मेरी बर्थ ले लिजिए मैं ऊपर चला जाता हूं। उनकी समस्या हल हो गई। उन्होंने अपनी मम्मी को फोन लगाकर कहा, मेरी समस्या हल हो गई। वे अपने शरीर के वजन के कारण ऊपर के बर्थ तक चढ़ पाने में असमर्थ थीं। हालांकि उन्होंने मुझे शिष्टाचारवश धन्यवाद भी नहीं कहा। खैर मैं इसकी परवाह भी नहीं करता। पर अकेले चलने पर मुझे सहयात्रियों की सुविधा के लिए बर्थ बदलने में कभी दिक्कत नहीं होती।
ट्रेन की पेंट्री व्यवस्था उम्दा है। प्रवेश करते ही जूस बाटल , पानी की बोतल मिली। विमान की तरह उदघोषणा तंत्र काम कर रहा है। दिल्ली की दूरी और ट्रेन की स्पीड बताई जा रही है। धनबार पहुंचने से पहले भी अगले स्टेशन के बारे  में एलान हुआ। पर अगले दिन ट्रेन लेट होने पर सारे एलान बंद हो गए। 

रात गुजरती रही। ट्रेन कब गया, सासाराम और मुगलसराय पार कर गई मुझे पता भी नहीं चला। सासाराम मेरा गृह नगर है जिससे मैं सोते हुए गुजर गया। ट्रेन जब इलाहाबाद क्रास कर रही थी तब पता चला। कानपुर आते हुए ट्रेन थोड़ी लेट हो चुकी थी। इसके बाद शुरू हुआ ट्रेन के धीरे धीरे रूक रूक कर चलने का सिलसिला। हमे पेंट्री की ओर से रातका खाना और सुबह का नास्ता मिला था। पर ट्रेन 12 बजे तो अलीगढ भी नहीं क्रास कर पाई है। अब पेंट्री की ओर से दोपहर के खाने में चावल दाल थोड़ी मात्रा में पेश किया गया। हालांकि ट्रेन समय पर दिल्ली पहुंचाती तो इसकी जरूरत नहीं थी। ट्रेन गाजियाबाद से पहले आउटर पर रुक गई। इसके बाद चलने पर साहिबाबाद में भी रुक गई। समय तीन बज रहे थे। ट्रेन तीन घंटे से ज्यादा लेट चल रही थी। मैं और एक और सहयात्री साहिबाबाद में ही उतर गए। वहां से पैदल चलकर साहिबाबाद गांव होते हुए हमलोग मोहन नगर वैशाली मुख्य मार्ग पर आ गए। मैं यहां से सीधा अपने आफिस नोएडा सेक्टर 63 को चल पड़ा।
 
साहिबाबाद रेलवे स्टेशन पर खड़ी दूरंतो एक्स. - आफिसियल स्टापेज नहीं है भाई...
यह ट्रेन दूरंतो एक्सप्रेस 18 सितंबर 2009 को पहली बार चली थी। तब रेल मंत्री ममता बनर्जी थीं। दूरंतो उनका मानस पुत्र है। बांग्ला में इसका मतलब होता है नटखट बच्चा। वास्तव में दूरंतो राजधानी एक्सप्रेस की ड्प्लिकेट कॉपी है। वही किराया, वैसा ही  खानपान बस नाम अलग है।
सियालदह दिल्ली दूरंतो एक्सप्रेस ट्रेन के सारे कोच एलएचबी हैं। ट्रेन की औसत स्पीड 85 किलोमीटर है। यह सियालदह से हमेशा समय पर खुलती है। पर यह औसतन हर रोज दिल्ली पहुंचते पहुंचते दो से तीन घंटे तक लेट हो जाती है। कभी कभी तो 4 से छह घंटे भी लेट हो जाती है। तो ऐसी है दूरंतो।
 - विद्युत प्रकाश मौर्य
( DURANTO EXPRESS, SDAH-NDLS -12259, RAIL , BENGAL, KOLKATA ) 

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