Sunday, October 2, 2016

दिल्ली में है बा का एक घर

उत्तरी दिल्ली के ढका गांव स्थित हरिजन सेवक संघ का परिसर। इसके अंदर एक घर है जिसे लोग बा के घर के नाम से जानते हैं। बा मतलब कस्तूरबा गांधी। इस घर में कस्तूरबा गांधी कई सालों तक रहीं। उनकी तमाम स्मृतियां इस घर के साथ जुड़ी हैं। जब हम दिल्ली में बापू से जुड़ी स्मृतियों की बात करते हैं तो राज घाट जहां बापू की समाधि है और तीस जनवरी मार्ग की चर्चा तो करते हैं पर हरिजन सेवक संघ को कम याद करते हैं। बापू ने न सिर्फ डाक्टर अंबेडकर के साथ मिलकर 1932 में हरिजन सेवक संघ की नींव रखी थी बल्कि इस संस्था का संविधान भी खुद अपने हाथों से लिखा था।

देवदास गांधी के साथ रहती थीं बा - बापू का हमेशा साथ निभाने वाली बा बापू के साथ कई साल तक हरिजन सेवक संघ के इस घर में रहीं। बा यहां 1933 से 1940 के बीच अलग अलग समय में रहीं। बा यहां अपने चौथे और सबसे छोटे पुत्र देवदास गांधी के साथ रहती थीं। यहीं पर देवदास गांधी के तीन बच्चों का जन्म भी हुआ। राजमोहन गांधी का 1933 में यहीं जन्म  हुआ। गोपालकृष्ण गांधी और रामचंद्र गांधी भी कस्तूरबा कुटीर में पैदा हुए। देवदास गांधी ने सी राजगोपालाचारी की बेटी लक्ष्मी से प्रेम विवाह किया था। बा के इस दो मंजिला भवन को मूल अवस्था में देखा जा सकता है। देवदास बाद में प्रसिद्ध पत्रकार बने। वे हिन्दुस्तान टाइम्स के संपादक भी बने।


दलित महिला को रसोई में लगाया - एक वाकया है कि बा को अपने रसोई में सहयोग के लिए किसी महिला की जरूरत थी।ऐसी महिला की तलाश शुरू हुई। पर बापू चाहते थे कि वह महिला दलित जाति से हो। काफी तलाश के बाद पड़ोस के ढका गांव से एक अनारो नामक महिला बा की सहायता के लिए बहाल की गई। बापू मानते थे कि छूआछूत खत्म करने की शुरुआत रसोई घर से ही होगी। हम उन लोगों के हाथ का बना खाएं जिन्हें अछूत मानते हैं तो हैं तभी सही मायने में अश्पृश्यता का निवारण हो सकेगा। इसको बा बापू ने व्वहार में जीया भी। कस्तूरबा कुटीर के साथ यहां के अच्छी लाइब्रेरी भी है जहां गांधी विचार पर हजारों पुस्तकों का संग्रह है।
गांधी और अंबेडकर के बीच 24 सितंबर 1932 को हुए ऐतिहासिक पूना समझौते के बाद बापू ने अंबेडकर के साथ मिलकर 30 सितंबर 1932 को अस्पृश्यता उन्मूलन मंडल की नींव रखी। यही  संस्था बाद में हरिजन सेवक संघ बन गई। इसका परिसर किंग्जवे कैंप रोड पर ढका गांव के पास 25 एकड़ परिसर में फैला हुआ है।

 इस संस्था के अमृतलाल ठक्कर जिन्हें लोग ठक्कर बापा के नाम से जानते हैं सचिव थे। इस संस्था में घनश्याम दास बिड़ला अध्यक्ष बने तो मदनमोहन मालवीय भी इसमें सक्रिय थे। बापू बाद के दिनों में इसी परिसर में बने वाल्मिकी भवन में रहते थे। तमाम लोग बापू से मिलने यहीं पर आते थे। बापू का लक्ष्य था कि हरिजनों और दलितों को समाज में समान स्थित और अवसर प्रदान करना है। वह चाहते थे कि यह काम कुछ दशकों में हो जाए। आज हमें शर्मिंदा होना चाहिए कि 90 साल हो गए पर वैसा अवसर नहीं आ पाया है।

कई गतिविधियों का केंद्र-  बापू द्वारा स्थापित हरिजन सेवक संघ आज कई तरह की गतिविधियों का केंद्र है। जब आप आश्रम के प्रवेश द्वार पर पहुंचते हैं अंदर एक खादी उत्पादों का स्टोर है। इसके बगल में एक बड़ा प्रशिक्षण केंद्र हैं जहां खास तौर पर लड़कियों को रोजगार दिलाने के लिए अस्पताल में विभिन्न श्रेणी से सहायक बनने के लिए प्रशिक्षण प्रदान किए जाते हैं। यह प्रोजेक्ट टेक महिंद्रा के सहयोग से चल रहा है। परिसर में योगा और नेचुरोपैथी का प्रशिक्षण केंद्र भी चलाया जाता है।
सर्वधर्म प्रार्थना मंदिर  - हरिजन सेवक संघ के परिसर में एक सर्वधर्म प्रार्थना मंदिर का निर्माण कराया गया है। इस प्रार्थना मंदिर का उदघाटन स्वयं बापू ने संवत 1996 में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि को (गुरुवार) को अपने हाथों से किया था। इस गोल मंदिर में दीवारों पर कई धर्मों की अच्छी बातें उकेरी गई हैं। पर ये मंदिर आजकल विरान नजर आता है। इसके सामने एक विशाल धर्म स्तंभ का भी निर्माण कराया गया है। आश्रम की ओर से धर्मार्थ चिकित्सालय, प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र आदि का भी संचालन किया जाता है। संगीत नाटक अकादमी की ओर से यहां कत्थक प्रशिक्षण केंद्र भी चलाया जाता  है।


बापा आश्रम आवासीय प्राथमिक विद्यालय -  परिसर में एक स्कूल है जिसमें दलित परिवारों के बच्चों के लिए आवासीय सुविधा भी है। हरिजन सेवक संघ पूर्वोत्तर राज्यों से आने वाली ऐसी छात्राओं के लिए एक छात्रावास भी संचालित करता है जो दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रही हैं।

हरिजन सेवक संघ के वर्तमान सचिव रजनीश कुमार चाहते हैं कि यह आश्रम दिल्ली के टूरिस्ट मैप पर प्रमुखता से स्थान पाए। गांधी विचारों से जुड़े लोग इस आश्रम को देखने आएं। हर साल 24 सितंबर के पूना समझौता की याद में आश्रम में एक वैचारिक गोष्ठी का आयोजन किया जाता है। आश्रम परिसर में एक विनोबा जी की प्रतिमा भी लगी है। इसका अनावरण 11 सितंबर 1988 को तत्कालीन राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा ने किया था।
हरिजन सेवक संघ की वेबसाइट - http://www.gandhicreationhss.org/

- विद्युत प्रकाश मौर्य

बा के बारे में यहां भी पढ़े- और बा बापू का साथ छोड़ गईं...


(HARIJAN SEVAK SANGH, KINGSWAY CAMP DELHI, GANDHI, DEVDAS, RAJMOHAN ) 
  


  

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