Friday, September 30, 2016

तारकेश्वर की वह शुद्ध शाकाहारी थाली

बाबा तारकेश्वर नाथ के दर्शन करके बाहर निकला हूं। सुबह के 10 बजे हैं। कोलकाता से चलते हुए नास्ता नहीं किया है। अब दर्शन के बाद खाने की सोच रहा हूं। तारकेश्वर मंदिर से रेलवे स्टेशन के रास्ते में कई शाकाहारी भोजनालय हैं। इनमें से कई सड़क पर खड़े होकर आते जाते श्रद्धालुओं को खाने के लिए बुला रहे हैं। शाकाहारी चावल की थाली खाइए। वे अपना मीनू भी गिना रहे हैं। इनमें से कई हिंदी में भी आवाज लगा रहे हैं। हमें रास्ते में एक गोस्वामी भोजनालय दिखाई देता है। वे भी राह चलते लोगों को खाने के लिए रोक रहे हैं। इससे पहले हमने देखा एक नास्ता घर में लोग चावल का दाना यानी फरही को सब्जी के साथ खा रहे हैं। ऐसी प्लेट 10 रुपये की है। मैं गोस्वामी भोजनालय में रुक जाता हूं। उनका मीनू पूछता हूं। 40 रुपये की थाली में चावल, दाल, एक कद्दू की सब्जी, एक भुजिया, अचार आदि। मैं 40 की थाली आर्डर कर देता हूं। फिर उनसे 50 वाली थाली और 70 वाली थाली का मीनू पूछता हूं। वे बताते हैं 50 वाली थाली एक आलू गोभी सब्जी और बढ़ जाएगी।अगर 70 वाली थाली करते हैं तो दो और सब्जियों के साथ पापड़ भी आएगा। मैं कहता हूं, ठीक मेरी थाली 70 वाली कर दो।

 अब वे फटाफट अपनी और सब्जियां लाते हैं। इसमे केले का कोफ्ता शामिल है। वे मुझे थाली में खट मीठी सब्जी भी पेश करते हैं जिसका स्वाद काफी अच्छा है। इनकी भूजिया तो अलग तरह की है। बारीक कटी सब्जी को तल दिया गया है। बंगाल में चावल यानी भात मुख्य भोजन होता है। सिर्फ बंगाल ही क्यों पूरे दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर में भी चावल मुख्य भोजन है। हम यूं कहें कि पूरे देश का 70 फीसदी आबादी चावल को मुख्य भोजन के तौर पर लेती है तो कुछ गलत नहीं होगा।
गोस्वामी निरामिष होटल का चावल का स्वाद भी अच्छा है। आम तौर पर मैं मोटे दाने वाले उसना चावल को खाना पसंद नहीं करता। पर इनका चावल महीन है। सो खाकर अच्छा लगा। सड़क के दोनों तरफ आमने सामने गोस्वामी भोजनालय है। चलते चलते मैं उनके मैनेजर को धन्यवाद देता हूं और खाने की तारीफ करता हूं। वे खुश होते हैं। गोस्वामी होटल का खाना हावड़ा रेलवे स्टेशन के आसपास के सस्ते होटलों से काफी अच्छा है। सबसे बड़ी बात कि वे खाना दक्षिण भारत के कुछ होटलों की तरह केले के पत्ते पर परोस रहे हैं। चावल केले के पत्ते पर दाल सब्जी अलग अलग कटोरियों में। खाने के दौरान वे बार बार और भी कुछ लेना हो तो पूछ रहे हैं। चावल दोबारा लेने पर अलग से चार्ज है पर दाल सब्जियां ले सकते हैं।

रेलवे स्टेशन के रास्ते में कुछ और निरामिष होटल वाले खाने के लिए बुला रहे हैं। पर मैं तो अब छककर खा चुका हूं सो उनकी ओर ध्यान नहीं देता। रेलवे स्टेशन के रास्ते में फिर वही पंडा बापी बनर्जी मिल जाते हैं किसी नए यजमान की तलाश में घूम रहे हैं। मैं उनसे भी विदाई का नमस्कार कहता हूं। वे अपना कार्ड देते हैं। जय तारकेश्वर नाथ।    
(BENGAL, TARKESHWAR NATH, RICE PLATE, FOOD ) 

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