Saturday, August 6, 2016

अंदमान निकोबार - सुनामी की खौफनाक यादें ((07))

बशीर भाई हमें अंदमान में आए सुनामी की याद दिलाते हैं। वह बरबादी का भयावह मंजर था। 26 दिसंबर 2004 की वह सुबह थी जिसे अंदमान के लोग कभी नहीं भूल सकते। वह भूकंप से भी भयावह था। सुनामी (TSUNAMI) एक ऐसी समुद्री हवा जिसने सब कुछ तहस नहस कर डाला।कई द्वीपों का तो नक्शा ही बदल गया। हालांकि सुनामी ने चेन्नई और देश के दूसरे तटीय हिस्सों में भी तबाही मचाई थी पर अंदमान में नुकसान ज्यादा हुआ। सुनामी एक जापानी भाषा का शब्द है जिसका मतलब है बंदरगाह से आने वाली तेज हवाएं। सुनामी में लहरें 20 से 30 मीटर की ऊंचाई तक उठती हैं और हवा की रफ्तार 200 किलोमीटर प्रतिघंटे से भी ज्यादा होती है। सुनामी के बाद अगले कई दिनों तक भूकंप के झटके आते रहते हैं। तब द्वीप वासियों का कई रातों तक सोना मुश्किल हो गया था।

सुनामी का असर सबसे ज्यादा ग्रेट निकोबार और लिटिल अंडमान क्षेत्र में रहा। नुकसान का आलम ऐसा था कि नारियल के पेड़ तहस नहस हो गए। कई जहाज टुकड़ों में टूट गए। तमाम भवन जमींदोज हो गए। पोर्ट ब्लेयर में तमाम लोग हैं कि जिनकी आंखो के सामने सुनामी का वो खौफनाक मंजर आज भी तैरता रहता है। सुनामी का असर श्रीलंका, थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों पर भी हुआ। सुनामी के कारण अंदमान में रहने वाले शैंपेन आदिवासी और निकोबारी लोग काफी प्रभावित हुए। इसके साथ ही निकोबार में पदस्थापित मैनलैंड ( भारत भूमि) के काफी लोग भी मारे गए। सुनामी ने कार निकोबार द्वीप का आकार ही बदल डाला। कार निकोबार की हवाई कालोनी तो पूरी तरह खत्म हो गई।

सुनामी का असर चाथम से लगे बंबू फ्लैट द्वीप और नार्थ बे द्वीप पर भी देखा गया। बंबू फ्लैट के पानीघाट इलाके में सुनामी ने तबाही मचाई। बशीर भाई को वो मंजर याद है। वे बताते हैं कि बंबू फ्लैट से नार्थ बे तक जाने वाली समंदर के किनारे किनारे मरीन ड्राईव जैसी एक सड़क हुआ करती थी। यह सड़क सुनामी की भेंट चढ़ गई। सुनामी से पहले नार्थ बे तक सड़क मार्ग से जाना संभव था। पर अब सड़क के ना रहने से ऐसा मुश्किल है। एक बार फिर इस सड़क को बनाने की कोशिश चल रही है। सुनामी के प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि समंदर ने तीन बार अपना रौद्र रूप दिखाया। इस क्रम में समुद्र की तमाम गंदगी निकल कर किनारे लग गई। यह एक किस्म का समुद्र का गुस्सा ही तो था। मानो समंदर कह रहा हो कि अपनी गंदगी हमारे अंदर मत डालो नहीं तो हम एक बार फिर अपना गुस्सा दिखा सकते हैं।   

सुनामी के बार बैरन द्वीप का ज्वालामुखी एक बार फिर जागृत हो गया जो अगले दो साल तक लपटें बिखेरता रहा। भारत में एक मात्र ज्वालामुखी बैरन द्वीप पर ही है। अब सुनामी की याद में पोर्ट ब्लेयर में राजीव गांधी वाटर स्पोर्ट्स परिसर में सुनामी मेमोरियल का निर्माण किया गया है। पोर्ट ब्लेयर आने वाले सैलानी इस मेमोरियल पर जाकर सुनामी के उस भयावह मंजर को याद करते हैं और सुनामी में मारे गए लोगों को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।


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