Tuesday, August 2, 2016

हरे भरे माउंट हैरियट चोटी की ओर ((05))

माउंट हैरियट मतलब बादलों से मुलाकात। अंदमान के बंबू फ्लैट द्वीप से 8 किलोमीटर की दूरी पर माउंट हेरियेट एक सुहाना स्थान है। अगर बारिश का मौसम हो तो यहां बादल सड़कों पर चहलकदमी करते नजर आते हैं। माउंट हैरियट अंदमान की तीसरी सबसे ऊंची चोटी है। अंदमान की सबसे ऊंची चोटी सैंडल पीक 732 मीटर है जबकि माउंट थूलियर 642 मीटर है। माउंट हेरियेट की ऊंचाई 365 मीटर है। माउंट हैरियट दक्षिण अंडमान की सबसे ऊंची चोटी है। 1979 में इसे नेशनल पार्क का दर्जा दिया गया। इससे पहले यह संरक्षित जंगल क्षेत्र था। माउंट हैरियट के प्रवेश द्वार पर इंट्री परमिट बनवाना पड़ता है और प्रवेश टिकट लेना पड़ता है।


बंबू फ्लैट से हमें बशीर भाई की जीप मिल गई थी। प्रवेश द्वार पर परमिट और जीप पार्किंग के 45 रुपये लगे। इसके आगे हम पैदल माउंट हैरियट क्षेत्र में प्रवेश कर गए। चारों तरफ मन मोह लेने वाली हरियाली, कई किस्म के जंगली फूल और कलरव करते पक्षी। वाकई माउंट हैरियट मन मोह लेता है।  माउंट हैरियट का विस्तार 46 वर्ग किलोमीटर में है। यह 4662 हेक्टेयर में विस्तारित है। इस पार्क का नाम हैरियट टेलर के नाम पर रखा गया। दरअसल हैरियट टेलर ब्रिटिश अधिकारी राबर्ट क्रिस्टोफर टेलर की दूसरी पत्नी थी। राबर्ट टेलर अंदमान के सेटलमेंट के दौरान यहां सुपरिटेंडेंट के तौर पर कार्यरत था। 1857 के विद्रोह के समय हैरियट भारत में था। अंदमान में किए गए कार्यों के अलावा उसके काम को दिल्ली के पुरातात्विक स्थलों के बारे में पुख्ता लेखन के लिए जाना जाता है।

माउंट हैरियट में एक सुंदर पार्क बना है, जहां आप कुछ घंटे गुजार सकते हैं। नजारा करने के लिए कुछ सुंदर हट्स बनाए गए हैं। एक व्यू प्वाइंट भी है जहां से आप ऊंचाई से समंदर का नजारा कर सकते हैं। यहां पर रहने के लिए एक छोटा सा गेस्ट हाउस भी बना हुआ है। आप चाहें तो पहले से बुकिंग कराकर यहां कुछ दिन रह सकते हैं। माउंट हैरियट के अंदर एक काला पत्थर नामक स्थान है। कुछ लोग ट्रैकिंग करके काला पत्थर तक जाते हैं। यह ढाई किलोमीटर की ट्रैकिंग है। कहा जाता है कि किसी जमाने में फांसी देने वाले कैदियों को काला पत्थर से धक्का दे दिया जाता था। इसलिए इससे सुसाइडल प्वाइंट भी कहते हैं। माउंट हैरियट में एक पुराने भवन का भग्वानवशेष दिखाई देता है। बशीर भाई बताते हैं कि कहा जाता है इसके नीचे अंडर ग्राउंड कमरे बने हैं। हालांकि यह प्रमाणिक नहीं है। पर माउंट हैरियट से लौटते हुए के भवन का अवशेष दिखाई देते हैं। यहां पर कभी ब्रिटिश सुपरिटेंडेंट ने अपना आवास बनाया था। पर अब ये ध्वस्त हो चुका है।


मैं जब माउंट हैरियट पहुंचा हूं तो आसमान में बादल हैं।  ऐसे मौसम मे माउंहैरियट का मौसम और भी खुशनुमा हो गया है। जंगलों को चीर कर जाती सड़कों पर बादलों ने अपना बसेरा बना लिया है। मुझे पुरानी फिल्म का गीत याद आता है..पर्वतों के पन्नों पर बादलों का डेरा है...और मैं खो जाता हूं इन बादलों के बीच...और उनके कान में धीरे से कहता हूं चल कर वहां बरसो न जहां कई सालों से सूखा पड़ा है। काश की बादल मेरी सुन लेते।
-         विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com


(MOUNT HARRIET, PORT BLAIR, ANDAMAN, NATIONAL PARK, KALA PATTHAR )     

1 comment:


  1. बहुत ही बढ़िया यात्रा विवरण लिखा

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