Tuesday, July 26, 2016

एक और कांवर यात्रा बोल बम ...तारक बम

हावड़ा तारकेश्वर लाइन पर सेवड़ाफुल्ली रेलवे स्टेशन पर लगा कांवर का बाजार। 

सावन का महीना मतलब बाबा भोले का महीना। देश के कई हिस्सों में इस महीने में लोग कांवर लेकर लंबी पदयात्रा करके शिव के मंदिर में जलार्पण करते हैं। देश के कुछ प्रसिद्ध मंदिरों ये परंपरा सैकड़ो साल से चली आ रही है। उत्तर भारत में बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश उत्तराखंड में  इस तरह की परंपरा कई शहरों में देखने को मिलती है। इस दौरान श्रद्धालु केसरिया रंग की निक्कर और बनियान पहनकर  बम बन जाते हैं। इस यात्रा को बोल बम कहते हैं। बिहार में सुल्तानगंज में गंगा नदी जल लेकर लोग 120 किलोमीटर की पदयात्रा करके देवघर पहुंचते हैं। यहां वैद्यनाथ मंदिर में जलार्पण करते हैं। वहीं बिहार में पहलेजाघाट से जल लेकर लोग 80 किलोमीटर की पदयात्रा करके मुजफ्फरपुर के गरीब नाथ मंदिर पहुंचते हैं। इसी तरह की एक यात्रा बंगाल में भी होती है।  


सावन महीने में कांवर यात्रा  बिहार के देवघर के मंदिर की तरह की बंगाल के इस तारकेश्वर मंदिर में भी सावन के महीने में लोग कांवर लेकर पहुंचते हैं। यह कांवर यात्रा तारकेश्वर से 36 किलोमीटर पहले सेवड़ाफुल्ली नामक स्थान से शुरू होती है। यहां लोग हुगली ( गंगा) नदी से जल लेकर पदयात्रा करते हुए तारकेश्वर मंदिर पहुंचते हैं। पूरे सावन सेवड़ाफुल्ली से लेकर तारकेश्वर तक मेला का माहौल रहता है। यह यात्रा पूरे महीने तक चलती रहती है। यह बंगाल की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक है।


पूरे बंगाल से लाखों श्रद्धालु - इस यात्रा में पूरे बंगाल से महीने भर में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी होती हैं। वे बोलबम तारक बम का नारा लगाते हुए अपना सफर आम तौर पर एक दिन में ही पूरा करते हैं। मैं सेवडा फुल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर मुलाहिजा फरमाता हूं। पूरा प्लेटफार्म कांवर यात्रा के बाजार के तौर पर सजा हुआ है। लोग खरीददारी में लगे हुए हैं। सावन का मेला अपने पूरे सबाब पर है। सेवड़ा फुल्ली से लेकर तारकेश्वर तक कांवर लेकर चलने वालों की अनवरत लाइन सावन के महीने में देखी जा सकती है।
कांवड़ा यात्रा नेपाल के पशुपति नाथ मंदिर में भी होती है। सावन में काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी में भी लोग बोलबम बनकर पहुंचते हैं। उत्तराखंड के हरिद्वार से भी सावन में कांवड़ की यात्रा शुरू होती है। इस यात्रा में लोग हरिद्वार में गंगा से जल लेकर अपने गांव के मंदिरों में जाकर जलार्पण करते हैं। हालांकि हरिद्वार से ये यात्रा सावन में एक हफ्ते ही चलती है, पर देवघर और तारकेश्वर में पूरे सावन यात्रा चलती रहती है। कुछ बिहार और बंगाल के श्रद्धालु देवघर और तारकेश्वर दोनों जगह जलार्पण करने जाते हैं।

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com

( BOLBAM, TARKESHWAR, KOLKATA, SHIVA ) 






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