Tuesday, July 19, 2016

पंजाब के लुधियाना शहर में दो साल

किसका लुधियाना, हीरो साइकिल का लुधियाना, मांटे कार्ले का लुधियाना, या रंग बिरंगे स्वेटर पुलोवर का शहर लुधियाना। इस लुधियाना शहर में दो साल गुजराने का मौका मिला साल 2003 से 2005 के बीच। तब मैं दैनिक जागरण जालंधर में था। अचानक एक दिन संपादक कमलेश रघुवंशी ने बुलाया और कहा आपका तबादला लुधियाना किया जा रहा है। दरअसल जागरण का नया संस्करण लुधियाना से शुरू हो रहा था। प्रिंटिंग प्रेस लगा चंडीगढ़ रोड पर मुंडिका कलां गांव में फोकल प्वाइंट में। तब गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी आए थे अखबार के नए संस्करण का लोकार्पण करने। दो साल लुधियाना में दैनिक जागरण में काम करने का अनुभव अच्छा रहा। यहां हमारे संपादक विनोद शील थे, जिनके सानिध्य में काफी कुछ सीखने का मौका मिला।

हमने लुधियाना में रहने के लिए घर लेने की सोची तो शहर के बीचों बीच रहने की इच्छा हुई। दफ्तर तो शहर के बाहरी इलाके में था। तो हमने घर लिया किदवई नगर में। यह देवकी देवी जैन वीमेंस कॉलेज के बगल में था। प्रसिद्ध सीएमसी हास्पीटल और रेलवे स्टेशन भी नजदीक था।
आज लुधियाना पंजाब का बड़ा औद्योगिक शहर है, पर 1984 से पहले यह छोटा सा शहर था। कोई 500 साल पहले इस शहर की स्थापना सिंकदर लोदी ने की थी। सिंकदर लोदी ने बलूचों के आक्रमण से स्थानीय लोगों की रक्षा के लिए इस शहर में युसूफ खान और निहंग खान नामक दो जनरल बहाल किए थे। तो लोधी वंश के नाम पर इस शहर का नाम लुधियाना पड़ा।

निहंग खान के निधन के बाद लुधियाना पर जलाल खान लोधी का शासन रहा। उसने यहां एक किले का भी निर्माण कराया। जब 1803 में देश में ब्रिटिश शासन हुआ तो लुधियाना के बगल में बह रही सतलुज नदी ब्रिटिश सरकार और महाराजा रणजीत सिंह की सरकार की सीमा बन गई।

लुधियाना का रेलवे स्टेशन जंक्शन है। दिल्ली से जालंधर जाने वाली लाइन पर इस स्टेशन पर एक लाइन धुरी, संगरूर सुनाम, जाखल की ओर जाती है, तो एक नई लाइन चंडीगढ़ को जाती है। यह लाइन न्यू मोरिंडा में अंबाला ऊना लाइन से जाकर मिल जाती है।
1984 में के बाद लुधियाना में उद्योग व्यापार में तेजी से प्रगति हुई। आज लुधियाना शहर में वूलेन गारमेंट बनाने के कई हजार उद्योग धंधे हैं। इसके अलावा साइकिल और साइकिल पार्ट्स, बिस्कुट और ब्रेड की के उद्योग बड़े पैमाने पर हैं। हीरो साइकिल, एवन साइकिल, नीलम साइकिल के उद्योग यहां लगे हैं। वूलेन गारमेंट, मांटे कार्ले, प्रींगल, ओस्टर, ग्रेटवे जैसे दर्जनों बड़े ब्रांड हैं यहां जिनकी दुनिया भर में धूम है। उद्योग धंधों का आलम ये है कि शहर की आबादी 30 लाख को पार कर रही है। यहां से 10 लाख से ज्यादा आबादी तो दूसरे राज्यों से आए मजदूरों की है जो अब पूरी तरह लुधियानावासी हो हो गए हैं। शहर में कुछ ऐसे सिनेमाघर हैं जो सालों भर सिर्फ भोजपुरी सिनेमा ही चलाते हैं। शहर का मिजाज काफी हद तक गुजरात के वापी शहर से मिलता जुलता है।

वैसे लुधियाना में पंजाब एग्रीकल्चर यूनीवर्सिटी नामक प्रसिद्ध कृषि विश्वविद्यालय है जिसका हरित क्रांत में बडा योगदान रहा। आबादी के बोझ लुधियाना शहर पर बढ़ता जा रहा है, इसलिए अब शहर क नई टाउन प्लानिंग की जरूरत महसूस की जा रही है। दो साल के लुधियाना प्रवास में कई अच्छे दोस्त बने पर 2005 में अप्रैल का महीना था जब मैं एक नए शहर पानीपत के लिए प्रस्थान कर गया।  

-    विद्युत प्रकाश मौर्य      
(LUDHIANA, PUNJAB, HERO CYCLE, WOOLEN GARMENTS )

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