Monday, July 11, 2016

अब ब्रांड बनता जा रहा है लिट्टी चोखा

हर राज्य के कुछ खास व्यंजन  हैं जो उनकी पहचान बन गए हैं। तो बिहार की पहचान लिट्टी चोखा से है। पर लिट्टी चोखा बिहार से बाहर निकलकर अभी उस तरह का ब्रांड नहीं बन पाया है जिस तरह तमिलनाडु का डोसा इडली या गुजरात खम्मण ढोकला। पर पिछले कुछ सालों से दिल्ली में नवंबर में लगने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में लिट्टी चोखा के स्टाल लगते हैं। हालांकि मेले के साथ ही इस व्यंजन का पटाक्षेप हो जाता था। पर बिहार से जुड़े कुछ लोगों ने यह ठान लिया कि वे लिट्टी चोखा को ब्रांड बनाएंगे। ऐसा ही एक नाम है देवेंद्र कुमार का। उन्होंने होटल प्रबंधन और केटरिंग की पढ़ाई की। आईआईएसएम रांची से पढ़ाई करने के बाद देश के पांच सितारा होटलों में 14 साल तक काम किया। देश के कुछ टॉप ब्रांड के साथ काम किया। पर उनके दिमाग में तो लिट्टी चोखा चल रहा था। उन्होंने मिस्टर लिट्टीवाला नाम से एक ब्रांड शुरू किया। पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर में इस ब्रांड नाम से स्टाल शुरू किए। धीरे धीरे इस ब्रांड को पहचान मिलने लगी। आज ये ब्रांड लक्ष्मीनगर से आगे बढ़कर इंदिरापुरम और किंगजवे कैंप इलाके तक पहुंच गया है। उनका ब्रांड आजकल जोमाटो और बरप जैसी फूड वेबसाइटों पर भी पहुंच गया है। पर अभी ये सफर और आगे जाने वाला है।
लक्ष्मीनगर में मिस्टर लिट्टीवाला के स्टाल पर लिट्टी खाने वाले सिर्फ बिहार के लोग नहीं होते बल्कि बड़ी संख्या में दूसरे राज्य के लोगों को भी इसका स्वाद लगने लगा है। 20 रुपये में दो लिट्टी। साथ में आलू बैगन, टमाटर का चोखा। सरसों की चटनी, प्याज। लिट्टी घी में डुबोई हुई। अगर दो लिट्टी खाएं तो ब्रंच हुआ अगर पांच खा लें तो भरपेट खाना हो गया।  

धीमी आंच का कमाल - लिट्टी के साथ सबसे अच्छी बात है कि इसे लकड़ी के कोयले पर धीमी आंच पर सेंक कर पकाया जाता है इसलिए इसमें तैलीय व्यंजनों से होने वाली हानियां बिल्कुल नहीं होती। यह सेहत के लिए शानदार और सुपाच्य व्यंजन है। बनाने के लिए ज्यादा तामझाम भी नहीं चाहिए। लिट्टी के अंदर सत्तू की मकुनी भरी जाती है जो इसका स्वाद और बढ़ा देती है। यह राजस्थान के बाटी से मिलती जुलती पर बिल्कुल अलग है। आमतौर पर बाटी के अंदर कुछ नहीं भरा जाता। दिल्ली के अलावा नोएडा के कई सेक्टरों में आप स्टाल पर लिट्टी चोखा का आनंद ले सकते हैं।


कहीं भी लेकर जाएं - लिट्टी की सबसे बड़ी विशेषता है कि आप पकाई हुई लिट्टी को लेकर सफर में भी जा सकते हैं। इसे आप यूं हीं कहीं भी कभी खा सकते हैं। यह एक बेहतरीन फास्ट फूड भी है। इसमें फास्ट फूड से होने वाली कोई हानि नहीं है। 
हम उस दिन के बारे में कल्पना करके रोमांचित हो सकते हैं जब लिट्टी रेस्टोरेंट में पहुंच कर ब्रांड बन जाएगी और सारा देश चटकारे लेकर खाएगा और गाएगा – इंटरनेशल लिट्टी चोखा...जे ना खइलस उ खइलस धोखा। 
-vidyutp@gmail.com

( LITTI CHOKHA, BIHAR, GOOD FOOD , MR. LITTIWALA - http://www.mrlittiwala.com/ ) 

4 comments:

  1. आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति विश्व जनसंख्या दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। सादर ... अभिनन्दन।।

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