Friday, June 3, 2016

बारह दरवाजों वाला शहर अमृतसर

अमृतसर पंजाब का ऐतिहासिक और पवित्र शहर है। एक ऐसा शहर जहां संस्कृति की खुशबू रची बसी है। यह देश के उन प्रमुख शहरों में से एक है जो अपने मिजाज के लिए जाने जाते हैं। शहर की हर गली चौक चौराहे का अपना इतिहास है। पुराना अमृतसर शहर 12 दरवाजों से घिरा हुआ है। इसमें एक प्रमुख गेट है हाल गेट। इस गेट का नाम अब गांधी गेट रखा गया है। पर लोग अभी भी हाल गेट के नाम से ही जानते हैं। हाल गेटके बाहर शहीद उधम सिंह की विशाल प्रतिमा लगी है। सुनाम के रहने वाले उधम सिंह कंबोज ने जलियांवाला बाग कांड का बदला लिया था। 

हाल गेट रेलवे स्टेशन के आधे किलोमीटर की दूरी पर है। हाल गेट के अंदर का इलाका हाल बाजार कहलाता है। यहां से श्री दरबार साहिब और जलियांवाला बाग की दूरी तकरीबन डेढ़ किलोमीटर है। बस स्टैंड भी यहां से ज्यादा दूर नहीं है। इसलिए हाल गेट रहने के लिए मुफीद जगह है। रेलवे स्टेशन और दरबार साहिब के बीच में। अमृतसर शहर में साइकिल रिक्शा जलते हैं। वे वाजिब किराया ही मांगते हैं। अब बैटरी रिक्शा भी आ गया है।  
बात गेट की हो रही थी। तो दूसरा प्रमुख गेट है हाथी गेट। ये हाथी गेट प्रसिद्ध दुर्गयाणा मंदिर के पास है।  इसके अलावा शहर में 10 और गेट हैं। पर इन गेट के साथ बाउंड्री वाल अब अस्तित्व में नहीं है। पूरे शहर को दीवार से घेरने का काम करवाया था महाराजा रणजीत सिंह ने। ऐसा शहर की सुरक्षा के लिए किया गया था। इन बारह दरवाजों के नाम थे – अलीउद्दीन, लाहोरी, खजाना, हकीमान, रंगार नांगलीयां, गिलवाली, रामगढ़िया, अहलुवालिया, दोबुर्जी, देवराही कलां, रामबाग, शाहजादा और लोहगढ़। इनमें से कुछ गेट के नाम अब बदल गए हैं।  रामगढ़िया गेट को चटीविंड गेट, अहलुवालिया को सुल्तानविंड गेट, दोबुर्जी को घी मंडी गेट, देवराही कलां को महान सिंह गेट और दरवाजा ए शहराजादा को हाथी गेट  कहा जाता है। महाराजा रणजीत सिंह ने लाहौरी गेट और रामबाग गेट पर खास ध्यान दिया था। लाहौरी दरवाजा महाराजा रणजीत सिंह द्वारा बनवाए गए गोबिंदगढ़ किले के पास स्थित था। रामबाग पैलेस के पास रामबाग गेट का निर्माण हुआ था। सभी गेट पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम थे।

1873 में बना हाल गेट
मजे की बात है कि हाल गेट अमृतसर के ऐतिहासिक 12 दरवाजों में शामिल नहीं था। शहर की जरूरत के मुताबिक रामबाग गेट और शाहजादा गेट के बीचकी दीवार को तोड़कर एक नए गेट का निर्माण किया गया। ऐसा रेलवे स्टेशन से टाउन हाल तक जाने के लिए रास्ते का निर्माण करने के लिए किया गया। दरअसल 1870 में अमृतसर शहर में टाउन हाल का निर्माण किया गया। शहर में एक घंटाघर भी हुआ करता था जिसे 1945 में नेस्तनाबूद कर दिया था। वहीं 1859 में अमृतसर शहर में रेलवे लाइन पहुंच गई थी। शहर के बाहरी दीवार के पास रेलवे स्टेशन बन गया था। हाल गेट का नाम अमृतसर के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर के नाम रखा गया था।  हालगेट और टाउन हाल के बीच के बाजार का नाम हाल बाजार रखा गया।

1573 में रखी गई शहर की नींव
सिखों के गुरु रामदास ने पवित्र शहर अमृतसर की नींव रखी थी। इससे पहले यहां सुल्तानविंड गांव हुआ करता था। शहर की नींव 1573 में रखी गई थी। तब इसका नाम रामदासपुरा रखा गया। यहां एक बाजार की भी स्थापना की गई जिसका नाम गुरु का बाजार रखा गया। तमाम जगहों से व्यापारी आकर अमृसर में बसने लगे। इस तरह एक विशाल शहर बसने लगा। एक समय में यह सिख पंथ का मुख्यालय बन गया। अब अमृतसर पंजाब की सांस्कृतिक राजधानी के तौर पर जाना जाता है। खेल, फिल्म, कला, राजनीति साहित्य जगत में कई बड़े नाम अमृतसर से हुए हैं।
KHALSA COLLEGE AMRITSAR. 

अमृतसर का पुराना बाजार कटरा में समाहित है। इनमें कटरा हरि सिंह सबसे पुराना है। इसके बाद कटरा कन्हैया, कटरा बगियां, कटरा अहलुवालिया, कटरा रामगढ़िया आदि प्रमुख हैं। शहर में खत्री, बनिया, खोजा, कश्मीरी और अफगान लोगों को व्यापार के लिए बसाया गया था। आज अमृतसर शॉल लोई, गहनों आदि के लिए प्रसिद्ध है। पापड़, बड़िया, अचार, घी आदि के लिए भी शहर को जाना जाता है।  

अमृतसरी कुलचा का स्वाद लें -  अमृतसर में खाने की बात करें तो यहां के अमृतसरी कुलचे काफी प्रसिद्ध हैं। साथ ही अमृतसरी पराठे जरूर खाएं। ढेर सारे मक्खन के साथ। कुलचे टाउन हाल के आसपास केसर दा ढाबा और भरावां ढाबा में खा सकते हैं। स्वर्णमंदिर के आसपास जलेबी का भी स्वाद ले सकते हैं। जलेबी के लिए रामदास जलेबी वाला के पास जा सकते हैं। अमृतसर की कुल्फी भी काफी मस्त होती है। 

बदल रहा अमृतसर - साल 2011 की जनगणना में अमृतसर की आबादी 11 लाख को पार कर गई है। इस बार हमने अमृतसर शहर को बदलते हुए देखा। दरबार साहिब के आसपास गलियारे का निर्माण कार्य जारी है। टाउन हाल के आसपास भी नवीकरण का काम जारी है। हालगेट के पास कई फ्लाईओवर बन रहे हैं। वहीं अमृसर से अटारी जाने वाली सड़क पर बीआरटी कारीडोर का निर्माण कार्य जारी है।यानी एक दो साल बाद जाएं तो अमृतसर काफी बदला हुआ नजर आएगा।

अमृतसर में क्या देखें – श्री हरिमंदिर साहिब- दरबार साहिब, अकालतख्त, जलियांवाला बाग, टाउन हॉल, गुरुद्वार शहीदां, खालसा कालेज, दुर्गायाणा मंदिर, खालसा कालेज की इमारत, श्री रामतीर्थ। आसपास में गोइंदवाल साहिब और तरन तारन के गुरुद्वारे देखने भी जा सकते हैं।  अमृतसर से 32 किलोमीटर दूर कोटली सुल्तान सिंह में अमर गायक मोहम्मद रफी का जन्म हुआ। सराय अमानत खान में मुगलकालीन सराय देखी जा सकती है। 
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(AMRITSAR, PUNJAB, HALL GATE, GURU RAMDAS, MAHARAJA RANJEET SINGH ) 



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