Tuesday, June 14, 2016

क्या कहना कि बारहों महीने यहां मौसम जाड़ों का....

खजियार में गाते रोशनलाल 
खजियार के मैदान में कुदरत के हसीन नजारों के बीच आपका मनोरंजन के लिए मौजूद रहते हैं कई लोग गायक। इन्हीमें से एक हैं रोशल लाल जी। लोक गायक रोशन लाल रुबान और खंजड़ी बजाते हैं।  ( रोशन लाल – 94183 56054) वे वन मैन शो हैं। अकेले दो वाद्य यंत्र बजाते हैं और साथ में गाते भी हैं। वे सुनाते हैं हुश्न पहाड़ों का ...क्या कहना कि बारहों महीने यहां मौसम जाड़ों का....तुम परदेशी किधर से आए....कि सरदी से डर कैसा...संग गर्म जवानी है...

एक गीत खत्म होता है  कि दूसरा गीत शुरू हो जाता है....
मुड़ मुड़ याद सतावे पिंड दिया गलियां दी.... रोशन लाल आपको अपनी सुर लहरियों से नास्टेलजिक कर देते हैं। आप चाहें जितना सुनना चाहे वे सुनाते रहते हैं। काला स काला काला है मेरा सरदार.... उनसे आप पंजाबी और हिमाचली लोक गीत सुन सकते हैं। इतना ही नहीं आप जिस गीतकी फरमाईस करेंगे वे वही गीत सुनाना शुरू कर देते हैं। मैंने साडे चिड़िए दा चंबा वे सुनने की इच्छा जताई रोशन लाल वही गीत सुनाने लगे। फिर वे पूछते हैं कि आपकी मातृभाषा क्या है...वे गुजराती, हिंदी, तमिल जैसी भाषाओं के गीत भी सुना सकते हैं।

रोशनलाल खजियार के लोकप्रिय लोक गायक हैं। पास के गांव में उनका घर है। उनके दस से ज्यादा आडियो कैसेट निकल चुके हैं। वे सांस्कृतिक आयोजनों में भी गाने के लिए जाते हैं। पर उनका हर रोज का रूटीन है। घर से निकलना दिन भर खजियार ग्राउंड में घूम घूम कर सैलानियों को गीत सुनाना। शाम ढलने पर घर वापस जाना। इस दौरान उन्हें कई सैलानी गीतों से खुश होकर कुछ रुपये दे देते हैं। इससे उनके घर का चूल्हा जलता है। जिस दिन ज्यादा कमाई हो गई तो शाम को थोड़ा गला भी तर कर लेते हैं।

खजियार में तान छेड़ते सरनदास 
सिर्फ रोशन लाल ही नहीं खजियार ग्राउंड में कुछ और गायक हैं जो श्रोताओं का मनोरंजन करते हैं।  हमें लोक गायक सरनदास मिलते हैं। उनके गले की मिठास भी अदभुत है। आप यू ट्यूब पर इन गायकों का वीडियो देख सकते हैं जो हमारी तरह कुछ सैलानियों ने अपलोड कर रखा है। जब खजियार मैदान में घोड़े वालों को सैलानी नहीं मिलते हैं तो मैदान में मंडली जम जाती है और घोड़े वाले श्रोता बनकर अपना मनोरंजन करने में जुट जातेहैं। और यूं हीं जिंदगी चलती रहती है। ...जिंदगी की ना टूटे लड़ी प्यार कर ले घड़ी दो घड़ी....
-vidyutp@gmail.com
अभी और भी है खजियार की दास्तां...आगे पढ़िए... एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा....
( KHAJJIYAR, FOLK SONG, CHAMBA ) 

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