Thursday, June 2, 2016

शाने-ए-पंजाब से दिल्ली से अमृतसर का सफऱ

दिल्ली से पंजाब की ओर अनगिनत बार गया हूं। कभी बस से तो कभी ट्रेन से। पर पंजाब जाने के लिए शाने पंजाब सबसे अच्छी ट्रेन है। सुबह 6.40 बजे नई दिल्ली से प्लेटफार्म नंबर 14 से चलने वाली शाने पंजाब एक्सप्रेस वाकई पंजाब की शान है। यह सिटिंग ट्रेन दोपहर 2.20 बजे अमृतसर पहुंचा देती है। एक समय में यह ट्रेन निजामुद्दीन से चलने लगी थी, पर अब नई दिल्ली से ही चलती है। इस बार वातानुकूलित चेयरकार में आरक्षण नहीं मिला तो सिटिंग में ही आरक्षण कराना पड़ा। थोड़ी गरमी थी पर शाने पंजाब की गति में गरमी हवा हो जाती है। पर यह क्या हमारे सीट के ऊपर का पंखा भी नहीं चल रहा है। वाश बेसिन के नल से पानी नहीं आ रहा। हमने टीटीई को इसकी शिकायत की। पर कोई असर नहीं हुआ। 


रेलमंत्री को ट्वीट का हुआ असर 
टीटीई ने शिकायत पर ध्यान नहीं दिया तब, मैंने रेल मंत्री सुरेश प्रभु को ट्वीट किया। इसका तुरंत असर होने लगा। थोड़ी देर में कोच एटेंडेंट आया पंखे की जांच की। थोड़ी देर में पंखा चला गया। इसके बाद नल भी ठीक हो गया। नल जाम था उससे अब पानी आने लगा। फिर थोड़ी देर बाद कोच का एटेंडेंट आया। बोला साहब, आप रेल मंत्रालय को संदेश भेज दें कि पंखा चलने लगा है। मेरे पास बार बार अधिकारियों के फोन आ रहे हैं। अब मैंने दुबारा ट्वीट किया अब सब ठीक हो गया है। बाद में ट्वीटर एकाउंट देखा। हमारी शिकायत डीआरएम एनईआर और अन्य अधिकारियों को फार्वार्ड की गई थी। इस तुरंत कार्रवाई के लिए रेलवे को धन्यवाद। 

शाने पंजाब का पहला पड़ाव है पानीपत। जहां मैं दो साल रहा। इसके बाद करनाल कुरुक्षेत्र और फिर अंबाला कैंट। अंबाला के बाद ट्रेन पंजाब में प्रवेश कर जाती है। अनादि पहली बार पंजाब जा रहे हैं। वे राजपुरा, सरहिंद, खन्ना जैसे स्टेशनों को देखते हैं। मैं उन्हें बताता हूं ये साहनेवाल स्टेशन है। फिल्म स्टार धर्मेंद्र का गांव। इसी गांव में लोकप्रिय ब्रांड स्पोर्टकिंग की फैक्टरी भी लगी है। इसके बाद आया लुधियाना। लुधियाना भी मैं दो साल रह चुका हूं। पर देखा कि रेलवे स्टेशन पहले से संवर गया है। यहां हमने एपल जूस पीया। स्टेशन पर छोले भठूरे और कुलचे के कई स्टाल खुल गए हैं। लुधियाना शहर पार करने के बाद आया सतलुज दरिया पर पुल। फिर फिल्लौर जंक्शन। इसके बाद गोराया। आपको पता है जालंधर जिले का छोटा सा शहर गोराया चारा काटने वाली मशीन बिचाली टोका बनाने के लिए प्रसिद्ध है। इसका लघु रूप यानी साग काटने वाली मशीन भी गोराया में ही बनकर देश भर में जाती है।

 जालधर से ठीक पहले आता है फगवाड़ा रेलवे स्टेशन। कभी यही जेसीटी फैब्रिक के लिए भी जाना जाता था। फगवाड़ा रेलवे स्टेशन पर कई सालों से अनवरत जल सेवा जारी है। हर आने जाने वाली ट्रेन के यात्रियों का यहां स्वयंसेवक पानी पिलाते हैं। फगवाड़ा के तुरंत बाद जालंधर कैंट और फिर जालंधर सिटी। जालंधर सिटी रेलवे स्टेशन पर दाल रोटी का लंगर लगा था। इससे पहले हमें कुरुक्षेत्र के में कुलचे का लंगर मिला था। दरअसल ट्रेन में डेरा व्यास जाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ है। उनके लिए श्रद्धालु रास्ते में जगह जगह  लंगर लगा रहे हैं। जालंधर शहर में हमने तीन साल गुजारे। यहां अभी भी कई दोस्त हैं जो दिल के करीब हैं। पर हम इस बार यहां नहीं रुक पा रहे। कई दोस्त नाराज हो सकते हैं। उनकी शिकायत फिर कभी दूर करेंगे। शाने पंजाब करतारपुर, ढिलवां से आगे बढ़ती है। इसके बाद आता है व्यास नदी पर पुल। फिर व्यास शहर। अमृतसर जिले का व्यास राधास्वामी संप्रदाय के डेरे के लिए प्रसिद्ध है। व्यास में लगभग पूरी ट्रेन खाली हो जाती है। सत्संग में शामिल होने वाले श्रद्धालु उतर जाते हैं। यहां अगले दो दिन सत्संग है। हमारी ट्रेन सही समय पर दोपहर 2.20 बजे अमृतसर पहुंच जाती है।
JALANDHAR RLY STN. 


हमारा होटल हालगेट के बाहरी इलाके में है। गोआईबीबो डाट काम से होटल रीवोली बुक किया था। होटल के मैनेजर ने कहा कि मैं किसी को स्टेशन भेज देता हूं लेने के लिए। पर हमें इसकी जरूरत नहीं पड़ी। हमलोग प्लेटफार्म नंबर 8 से बाहर की ओर निकलकर टहलते हुए अपने होटल तक पहुंच गए।    

-vidyutp@gmail.com

( SHAN-E-PUNJAB EXPRESS, RAIL, JALANDHAR, LUDHIANA, AMRITSAR, DERA VYAS, SATLUJ RIVER ) 

2 comments:

  1. पकड़े गए न विद्युत जी, ये अच्छी बात नहीं है, चुपके चुपके निकल गए जालंधर से

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    1. आप अपना परिचय दें

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