Saturday, June 18, 2016

रावी के तट पर चंबा शहर .... ऐ रावी विच हंसा दा जोड़ा...

चंबा शहर रावी नदी के तट पर बसा है। शहर की तलहटी में रावी नदी बहती है। नदी के दूसरी तरफ ऊपर नीचे पूरा चंबा शहर बसा है। रावी का पौराणिक नाम इरावती है। रावी उसका संक्षिप्त नाम है जो लोकप्रिय हो गया है। रावी नदी हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा क्षेत्र में हिमालय पर्वत माला से निकलती है। यह पंजाब की पांच नदियों में से एक है। वे पांच नदियां हैं सतलुज, व्यास, झेलम, चिनाब और रावी। चंबा शहर तक आते आते रावी विशाल रूप ले लेती है। पानी का बहाव काफी तेज है। नदी में जगह जगह विशाल शिलाएं हैं। इनके बीच रावी का जल यूं अटखेलियां करता आगे बढ़ता है मानो हिमालय से निकलता मधुर संगीत हो। रावी नदी के तट पर 24 घंटे इस संगीत को महसूस किया जा सकता है।
चामुंडा हिल्स से रावी नदी ऐसी दिखाई देती है....

 रावी नदी पर चंबा के पास एनएचपीसी ने बांध बनाया है। इस बांध से पानी छोड़े जाने पर कभी भी नदी में पानी बढ़ सकता है। इसलिए नदी के किनारे हर थोड़ी दूर पर बोर्ड लगाकर लिखा गया है कि नदी के करीब न जाएं पानी कभी बढ़ सकता है। चंबा शहर में रावी नदी पर दो प्रमुख पुल हैं। पहला पुल है शीतला ब्रिज। पुराना शीतला ब्रिज सस्पेंस ब्रिज था, अब उसी की जगह नया पुल बन गया है। यह पुल सुलतानपुर और चंबा शहर के बीच है। सुल्तानपुर और परेल के बीच रावी पर दूसरा पुल है जिसका नाम बालू ब्रिज है। यहां से भारमौर के लिए रास्ता आगे चला जाता है।
चंबा में रावी नदी पर बालू ब्रिज 

रावी नदी हिमाचल से आगे बढ़कर पाकिस्तान में चली जाती है। पाकिस्तान का ऐतिहासिक शहर लाहौर भी रावी नदी के तट पर बसा हुआ है। पाकिस्तान में रावी चिनाब नदी में जाकर मिल जाती है। आगे चिनाब सिंधू नदी में मिल जाती है। सिंधू आगे अरब सागर में मिलती है। रावी नदी की कुल लंबाई 720 किलोमीटर है। लंबाई के लिहाज से यह पंजाब की पांच नदियों में सबसे छोटी है। चंबा से पहले इसमें बुधील और धोना नदियां आकर मिलती है। बुधील नदी मणिमहेश झील से निकलती है। रावी नदी में पानी का मूल स्रोत बारिश और ग्लेसिर का पिघला हुआ जल है इसलिए रावी का जल काफा निर्मल दिखाई देता है। पठानकोट के पास माधोपुर में पहुंचने के बाद रावी नदी अगले 80 किलोमीटर तक भारत पाकिस्तान की सीमा बनाती हुई बहती है। इसके बाद यह पाकिस्तान में प्रवेश कर जाती है। लाहौर शहर रावी के पूर्वी किनारे पर बसा है। अहमद सियाल शहर के पास रावी चिनाब में मिलती है। यहीं पर मुगल बादशाह जहांगीर का मकबरा भी है। पर लाहौर तक पहुंचकर रावी का जल काफी प्रदूषित हो जाताहै। इसके लिए औद्योगिक कचरा जिम्मेवार है।
चंबा के पास कामेरा में रावी नदी पर दो हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट बनाए गए हैं। 198 मेगावाट का बैरा सुईल प्रोजेक्ट, 540 मेगावाट का कामेरा -1, 600 मेगावाट का रंजीत सागर प्रोजेक्ट और 300 मेगावाट का कामेरा 2 हाईड्रो प्रोजेक्ट रावी नदी पर बनाए गए हैं।      
रावी नदी की सुंदरता पर पंजाबी के मशहूर गायक पूरन शाह कोटी ने बड़ी सुंदर पंक्तियां गाई हैं। मेरे मित्र सुधीर राघव ने ये पंक्तियां साझा की हैं
सानूं वंज्जली सुणा वे ढोला लंबी दैया...
बगदी ऐ रावी विच हंसा दा जोड़ा।
  (पूरन शाहकोटी )
चंबा शहर में चौगान मैदान के बगल में हिमाचल टूरिज्म का रावी व्यू कैफे बना है। यहां बेंच पर बैठकर घंटों रावी की जलधारा को निहारते रहने का सुख अदभुत है।
-vidyutp@gmail.com  ( CHAMBA, RAVI RIVER, HIMACHAL PRADESH, DAM, HYDRO PROJECT ) 
चंबा शहर में रावी नदी पर शीतला ब्रिज, इसके पीछे पुराना पुल था जो अब प्रयोग में नहीं है। 



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