Tuesday, May 31, 2016

मां गंगा में आस्था की डूबकी...हरिद्वार हर की पौड़ी

HARIDWAR - NEW BRIDGE AT LALTARAO GHAT.
हरिद्वार वह जगह है जहां पावन गंगा पहाड़ों से आगे बढ़कर हिमालय का साथ छोड़ते हुए मैदानों को तृप्त करतीहुई आगे बढ़ती है। सालों भर हर रोज हजारों लोग हरिद्वार में इसी पतित को पावन करने वाली गंगा में डूबकी  लगाने हरिद्वार पहुंचते है। साल का कोई भी दिन हो आपको हरिद्वार में हर रोज लघु भारत का दर्शन होता है। यहां गंगा के घाट पर देश के हर राज्य के लोग मिल सकते हैं।

सुबह सूर्य की किरणें हर की पौड़ी पर पड़ती हैं तो गंगा का जो सौंदर्य दिखाई देता है वह हमेशा के लिए मन में रच बस जाता है। हर की पौड़ी की शाम भी उतनी ही सुहानी होती है। शाम ढलने के साथ गंगा की आरती का नजारा भव्य होता है। पौड़ी मतलब सीढियां। हर मतलब शिव। यानी शिव तक पहुंचने का रास्ता। और यह रास्ता भला गंगा जी से बेहतर क्या हो सकता है।   



गंगा की मूल धारा नहीं है हर की पौड़ी - हम जिस हर की पौड़ी पर गंगा में स्नान करते हैं वह वास्तव में गंगा जी मूल धारा नहीं है। गंगा पर भीमगोडा बैराज से गंग नहर निकाली गई है। भीमगोड़ा से गंगा की मूल धारा आगे बढ़ जाती है, जो गंगा से नहर निकाली गई है वह जल धारा हर की पौड़ी होते हुए आगे बढ़ती है। यह जलधारा आगे नहर का रूप ले ले लेती है। इसीहर की पौड़ी पर हर 12साल पर कुंभ और छठे साल पर अर्ध कुंभ लगता है।
कहा जाता है कि हर की पौड़ी इलाके का पहली बार निर्माण राजा विक्रमादित्य ने पहली शताब्दी में कराया था। पर ऐतिहासिक संदर्भों के साथ देखें तो हर की पौड़ी का निर्माण 1840 में ब्रिटिश काल में हुआ। ब्रिटिश सरकार ने 1840 में भीमगोडा बैराज का निर्माण कराया। यहां से अपर गंगा कैनाल निकाला गया जिससे बड़े क्षेत्र की सिंचाई होने लगी। वर्तमान में जो हर की पौड़ी है उन घाटों का निर्माण 1800 में कराया गया। बाद में समय समय पर इसका विस्तार किया गया। आर पार जाने के लिए कई पुल बनाए गए हैं। इनमें एक सिग्नेचर ब्रिज साल 2015 में तैयार हुआ है।  
कहा जाता है कि सिखों के पहले गुरु गुरुनानक देव जी (1469-1539) हरिद्वार आए थे तब उन्होंने कुशावर्त घाट पर स्नान किया था। इस स्थल पर उनकी याद में एक गुरुद्वारा बना है।

उद्योग और शिक्षा का केंद्र - 1886 में हरिद्वार पहली बार लश्कर होकर रेल नेटवर्क से जुड़ा। हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी फार्मेसी विश्वविद्यालय पुराना शिक्षा का केंद्र है। यहां ऋषिकुल आर्युवेदिक महाविद्यालय भी स्थित है। अब हरिद्वार बड़ा औद्योगिक शहर भी बन चुका है। बीएचईएल के बाद सिडकुल में सैकड़ों उद्योग धंधे हैं।

पवित्र शहर – हरिद्वार पवित्र शहर घोषित है। यहां धार्मिक सीमा के अंदर मांस और मदिरा की दुकाने नहीं है। इनका सेवन भी प्रतिबंधित है।
  

2 comments:

  1. बहुत अच्छी जानकारी। .
    हर हर गंगे!

    ReplyDelete
  2. आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति विश्व तंबाकू निषेध दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। सादर ... अभिनन्दन।।

    ReplyDelete