Saturday, May 28, 2016

कोटद्वार शहर- उत्तराखंड गढ़वाल का प्रवेश द्वार

कोटद्वार उत्तराखंड राज्य का शहर है। पौड़ी गढ़वाल जिले की तहसील है। पर यह एक प्लेन यानी समतल शहर है। नाम कोटद्वार है तो यह उत्तराखंड राज्य के गढ़वाल क्षेत्र का प्रवेश द्वार है। यह एक रेलवे स्टेशन भी है। आखिरी रेलवे स्टेशन। हालांकि यहां एक्सप्रेस रेलगाड़ियां दो ही आती हैं।
 पर अमूमन हर जगह के लिए कोटद्वार से आपको बसें और टैक्सियां मिल जाती है। पर आपको कोटद्वार से दिल्ली आना हो तो शाम को 4 बजे के बाद कोई बस नहीं मिलती। अगर आप कोटद्वार में अटक गए तो आपको रात को यहीं रुकना पड़ सकता है। पर रुकने के लिहाज से कोटद्वार में होटल सस्ते हैं। आप 100, 150 से 200 रुपये के होटलों में भी ठहर सकते हैं। मध्यमवर्गीय होटलों में अंबे होटल लोकप्रिय है।  रेलवे स्टेशन के पास गढ़वाल मोटर यूनियन के आसपास भी कई होटल हैं। मिठाइयां खानी हो तो सिद्धबली स्वीट्स पहुंचे। आपको हर तरह की बेहतरीन मिठाइयां खाने को मिल सकती हैं।  

मैं सुबह सुबह दिल्ली की बस से कोटद्वार पहुंचता हूं। नास्ता करने की इच्छा है। स्टेशन पर होटल पारामाउंट के नीचे पराठे की दुकान पर एक पराठा खाता हूं। 25 रुपये का बड़ा पंजाबी पराठा। नास्ते के लिए इतना काफी है।

कोटद्वार शहर मैं पहले कभी नहीं आया पर इस शहर से एक पुराना रिश्ता है। स्कूल के दिनों में 1985-86 के दौरान यहां से प्रकाशित एक छोटे से अखबार में मेरी कविताएं छपती थीं। हमारे एक पत्र मित्र कमल सिंह बिष्ट पंकज के सौजन्य से। वे पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर ब्लाक में रामजीवाला गांव के रहने वाले थे।
कोटद्वार से पौड़ी शहर की दूरी 101किलोमीटर है। यहां से हरिद्वार 70 किलोमीटर है। तो नजीबाबाद जंक्शन 30 किलोमीटर की दूरी पर है। मुझे लैंसडाउन से लौटते हुए 4 बजे गए थे। दिल्ली की बसें नहीं थी। लिहाजा हरिद्वार जाने का फैसला लिया। हरिद्वार के लिए मिनी बसें जाती हैं किराया 85 रुपये और समय दो घंटे से ज्यादा लगते हैं। लिहाजा हमने टैक्सी का विकल्प चुना. टैक्सी में 90 रुपये किराया और एक घंटे में टैक्सी ने चंडीघाट पर उतार दिया।  

थोड़ी और बातें कोटद्वार की। यह समुद्र तल से 395 मीटर की ऊंचाई पर बसा शहर है। कोटद्वार का मौसम सदाबहार है गर्मियों में भी तापमान 36 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नहीं जाता।
ऋषि कण्व का आश्रम
कोटद्वार से 14 किलोमीटर की दूरी पर कण्व ऋषि का आश्रम। कहा जाता है इस आश्रम का संबंध राजा भरत से है जिनके नाम पर अपने देश का नाम भारत पड़ा। कहा जाता है यहीं पर मेनका ने विश्वामित्र का तप भंग किया था। मेनका ने शकुंतला को जन्म दिया। शकुंतला का पालन पोषण ऋषि कण्व ने इसी आश्रम में किया। एक दिन यहीं शकुंतला की मुलाकात दुष्यंत से हुई और उन दोनों के संसर्ग से भरत का जन्म हुआ। भरत की प्रारंभिक शिक्षा कण्व ऋषि के ही आश्रम में हुई। बाद में प्रतापी राजा बने जिनके नाम पर अपने देश का नाम भारत वर्ष पड़ा। पर कण्व ऋषि का आश्रम बहुत अच्छे हाल में नहीं है। कोटद्वार में सिद्धबली मंदिर, दुर्गा देवी मंदिर और कोटेश्वर मंदिर भी दर्शनीय हैं।
-vidyutp@gmail.com

( KOTDWAR, KANVA RISHI ASHRAM, UTTRAKHAND) 



1 comment:

  1. बहुत सुंदर जानकारी मौर्या जी

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