Monday, May 23, 2016

लैंसडाउन में लगता एक रुपये प्रवेश कर

कोटद्वार से लैंसडाउन से लिए टैक्सी से चलने के साथ ही पहाड़ी रास्तों की शुरुआत हो जाती है। पतली ठो नदी के साथ साथ सड़क हरियाली संग संवाद करती हुई चलती है। रास्ते में चीड़ के जंगल दिखाई देते हैं। टैक्सी में उत्तराखंड के प्राथमिक स्कूल की कई शिक्षिकाएं मेरे साथ बैठी हैं। उनका स्कूल आने पर वे रास्ते में उतर जाती हैं। पता चला कि एक मैडम के स्कूल में सिर्फ 14 छात्र हैं और शिक्षक दो। यानी सात छात्रों पर एक शिक्षक। इस तरफ के कई प्राथमिक स्कूलों का यही हाल है। यानी छात्रों की पूरी मौज है किसी ट्यूशन या कोचिंग की तरह पढ़ाई। उसपर से स्कूल में वर्दी किताबें और खाना सब कुछ मिलता है। मेरे बगल में जिंस और लखनवी चिकेन का कुरता पहने मैडम बैठी हैं।

मैडम हिन्दी काफी अच्छा बोल रही हैं। अपने स्कूल के सामने उतरती हैं तो उनकी नन्ही नन्ही छात्राएं उनके इंतजार में सड़क पर खड़ी हैं। उन्हें प्रणाम करती हैं और स्वागत में बैग आदि  उठा लेती हैं। इतनी अच्छी मैडम हो तो छात्राएं सम्मान करेंगी ही। रास्ते में दुगड्डा नामक छोटा सा बाजार आता है। कुछ लोग टैक्सी से उतरते हैं तो कुछ चढ़ते हैं।

रास्ते में कई जगह खच्चर के साथ लोग जाते हुए दिखाई देते हैं। साथ वाली मैडम बताती हैं कि ये सभी केदारनाथ की ओर जा रहे हैं। चार धाम की यात्रा शुरू हो चुकी है तो ये लोग यात्रियों की सेवा में जा रहे हैं। पैदल पैदल ये तीन दिन में केदारनाथ पहुंच जाएंगे। एनएच 119 पौड़ी गढ़वाल को चला जाता है जो बदरीनाथ केदारनाथ के मार्ग में है।

इतने कम कर से क्या लाभ होगा
टैक्सी लैंसडाउन में प्रवेश करने वाली है। चेकपोस्ट आता है। सारे यात्रियों से प्रवेश कर मांगा जाता है। एक रुपये प्रति यात्री। कर है पर इतना कम। यह तो महज औपचारिकता भर है। इतने से वसूलने वाले का वेतन भी शायद निकल पाता हो। मैं दो रुपये देता हूं तो टैक्स वसूलने वाला एक रूपये लौटा देता है साथ में एक रुपये की रसीद भी थमा देता है। मैं सोचता हूं भला इतने कम कर से कितना राजस्व आता होगा। यह राशि तो वसूली कर्मियों पर ही खर्च हो जाती होगी। थोड़ी देर में टैक्सी लैंसडाउन में गांधी चौक पर छोड़ देती हैं। शहर में गांधी चौक पर ही थोड़ी चहल पहल दिखाई देती है। 

कहां ठहरें -  लैंसडाउन में रहने के लिए गिनती के होटल या रिसार्ट ही हैं। इनमें गांधी चौक स्थित होटल मयूर बेहतर हैं जहां 600-700 में सिंगल बेड रूम और 900 में डबल बेड रूम मिल सकता है।( फोन 94111- 79966 ) बाकी होटल इससे भी महंगे हैं। आप उत्तराखंड पर्यटन के विश्राम गृह या एलसीबी के गेस्ट हाउस में भी ठहर सकते हैं। खाने- पीने के लिए लैंसडाउन में सीमित होटल रेस्टोरेंट हैं। अगर घूमने की बात करें तो आप आधे दिन मेंपूरा लैंसडाउन घूम सकते हैं। चाहें तो सुबह जाकर दोपहर बाद लौट भी सकते हैं।

लैंसडाउन में क्या देखें - गढ़वाल रेजिमेंट म्यूजिम, कालेश्वर मंदिर, भूला ताल झील, भीम पकौड़ा ( तीन किलोमीटर दूर जंगल के अंदर है) , तारकेश्वर मंदिर (लैंसडाउन से 40 किमी दूर है निजी टैक्सी से ही जा सकते हैं) पूरे लैंसडाउन शहर की व्यवस्था लैंसाडाउन कैंटोनमेंट बोर्ड देखता है। शहर में गांधी चौक के पास सदर बाजार है, जहां आप जरूरत की चीजें ले सकते हैं।
 -vidyutp@gmail.com

( UTTRAKHAND, LANSDOWNE )




4 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर और रोचक पोस्ट | मैं लैंड्सडाउन जाने की योजना बना रहा था आपने बहुत सारा काम आसान कर दिया | लिखते रहिये

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  2. कृपया अगली पोस्ट भी पढ़ें . धन्यवाद

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