Tuesday, April 5, 2016

पहाड़ों की तलहटी में बाउ कालेश्वर मंदिर

पहाड़ों की तलहटी में एक सुंदर सा मंदिर। मंदिर के एक तरफ झील तो दूसरी तरफ लहलहाते नारियल के पेड़। मुंबई की भीड़ भरी जिंदगी में इतना सुंदर मंदिर तो ईश्वर की अराधना में लीन होने का आनंद और भी बढ़ जाता है। कुछ ऐसा ही मुंबई के तुर्भे एमआईडीसी इलाके में स्थित बाऊ कालेश्वर का मंदिर। मंदिर परिसर में सफेद रंग के तीन खूबसूरत मंदिर बने है। 

एक गणेश जी का मंदिर है दूसरा कालेश्वर यानी शिव का तो तीसरा महाकाली का। यह मंदिर ज्यादा पुराना नहीं है। साल 2007 में 24 जनवरी को इस मंदिर को आम जनता के लिए खोला गया। यह मंदिर तुर्भे रेलवे स्टेशन से चार किलोमीटर दूर खैराने में है। मंदिर के एक तरफ ऊंची पहाड़ी है। शाम को मंदिर परिसर से डूबता हुआ सूरज सुंदर दिखाई देता है। महाराष्ट्र सरकार के पूर्व मंत्री और विधायक गणेश नायक की इस मंदिर के निर्माण में प्रमुख भूमिका है। कहा जाता है गणेश नायक की पत्नी ने स्वप्न देखा उसके बाद उन्हें यहां मंदिर बनवाने की प्रेरणा मिली। मंदिर को 2000 वर्ग फीट के दायरे में बना है। इसके आसपास मंदिर का विशाल परिसर है। अब यहां सुबह शाम हजारों श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं। बारिश के दिनों में अगर आप यहां पहुंचे तो पहाड़ों से झरनो में पानी आता दिखाई देता है जो इस मंदिर का सौंदर्य और बढ़ा देता है। आप यहां परिवार के साथ पहुंचते हैं तो आपको काफी आनंद आएगा।

मंदिर में शिव और गणेश की प्रतिमाएं अदभुत खूबसूरत हैं। श्रद्धालु गणेश जी की श्वेत प्रतिमा को तो घंटो निहारते रहते हैं। मंदिर परिसर में पंडे, पुजारी, फूलवालों की कोई चिल्लपों नहीं है। आप बड़े आराम से यहां कुछ वक्त गुजार सकते हैं।

कैसे पहुंचे – नेरूल से थाणे वाली रेलवे लाइन पर तुर्भे रेलवे स्टेशन आता है। यहां से आटो या टैक्सी करें। मंदिर तुर्भे के एमआईडीसी मे सी ब्लाक में स्थित है। आपको कोई भी रास्ते में इस मंदिर का पता बता देगा।

-         माधवी रंजना



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