Sunday, April 24, 2016

हमारी वह पहली मुंबई यात्रा

ताज होटल के सामने लंबू जी और टींगू जी 
वह पहली नौकरी के दिन थे। 1998 का साल था। टीवी और फिल्मों की बीट पर रिपोर्टिंग किया करता था। इस दौरान दिल्ली में अक्सर प्रेस कान्फ्रेंस में टीवी और फिल्म स्टारों से मुलाकात होती थी। इस दौरान में कई फिल्मी हस्तियों का साक्षात्कार करने का मौका मिला। तब ख्याल आया कि क्यों न एक बार मुंबई का दौरा किया जाए। वहां एक हफ्ते प्रवास कर फिल्मों और टीवी धारावाहिकों की शूटिंग देखी जाए। एक दिन अपने मित्र दीपक दुआ से बात की। तब वे चित्रलेखा नामक पत्रिका के लिए काम करते थे। हम दोनों ने साथ साथ मुंबई जाने की योजना बनाई। फिर क्या आरक्षण कराया और एक दिन ट्रेन में सवार हो गए। हमारी ट्रेन थी (2926 ) पश्चिम एक्सप्रेस। दिल्ली से शाम को 4.30 बजे खुलती है। आने और जाने के लिए ट्रेन का चयन दीपक दुआ ने ही किया था। दीपक छह फीट से ज्यादा लंबे हैं। इसलिए वे ट्रेन में साइड लोअर बर्थ लेना पसंद करते हैं जिससे सोते समय दूसरे लोगों को परेशानी न हो।
मुंबई के मरीन ड्राईव पर पहली बार। 
हमारी ट्रेन मथुरा, कोटा, नागदा, रतलाम होती हुई आगे बढ़ रही थी। अगले दिन सुबह हुई तो हम बड़ौदा में थे। गुजरात की खूशबू थी। हमने प्लेटफार्म से नास्ते में ढोकला लिया। सूरत, नवसारी, वापी जैसे गुजरात के स्टेशनों को पीछे छोड़ती हुई दहानू रोड होते हुए मुंबई में प्रवेश कर गई। विरार के बाद मुंबई लोकल रेलवे स्टेशन आरंभ हो जाते हैं। दीपक मौसा जी के पास हमलोग जाने वाले थे। उन्हें पहले ही पत्र लिख दिया था, उन्होंने कहा था कि बांद्रा स्टेशन पर मैं आप लोगों का इंतजार करूंगा। दोपहर में ट्रेन बांद्रा पहुंची। प्लेटफार्म की भीड़ में दीपक भाई को मौसा जी नजर आ गए। वे हमे माहिम में अपने आवास पर ले गए। अकेले रहते थे। हमें मुंबई में एक और मित्र निर्देश त्यागी जो धारावाहिक चंद्रकांता संतति और बेताल पचीसी आदि में सहायक निर्देशक थे, ने भी अपने यहां रुकने का आमंत्रण दिया था। अगले दिन हमलोग मलाड पूर्व में उनके आवास में शिफ्ट कर गए। यहां से मुंबई के तमाम जगहों की यात्रा करना आसान था।  
सौरभ शुक्ला के ड्राईंग रूम में।


इसके बाद अगले सातदिन हमलोगों ने मुंबई के लोकल ट्रेन के सफर और आटो रिक्शा का खूब मजा लिया। मजा इसलिए कि हमलोग सुबह 10 बजे घर से निकलते थे जब लोकल में भीड़ कम हो जाती थी। रात को 10 बजे के बाद लौटते तब भी लोकल परेशान नहीं करती थी। रेलवे स्टेशनों पर बड़ा पाव और तरबूज के जूस का आनंद भी खूब लिया। गरमी के दिन थे। अपने मुंबई प्रवास के दौरान एक दिन मुंबई दर्शन बस से पूरे मुंबई को देखा बाकी दिन शूटिंग और टीवी चैनलों के दफ्तरों में लोगों से मिलना जुलना। 
एक दिन हमलोग अभिनेता और पटकथा लेखक सौरभ शुक्ला के घर गए। उनके ड्राईंग रूम में बैठकर उनका लंबा साक्षात्कार लिया। तब उनकी सत्या फिल्म सुपर हिट हो चुकी थी। एक दिन स्टार प्लस के धारावाहिक ये है राज के सेट पर पहुंचे वहां दीप्ति भटनागर का साक्षात्कार किया। वर्सोवा में समुद्र तट के किनारे एक बंगले में धारावाहिक की शूटिंग देखी। एक दिन हमलोग गोरेगांव में दूरदर्शन पर चल रहे धारावाहिक ओम नमः शिवाय के सेट पर भी पहुंचे। वहां चंड मुंड नामक पौराणिक चरित्र से मिलना हुआ। उनके साथ तस्वीरें भी ली।

महायज्ञ के सेट पर प्रीति खरे के साथ 

जब हमने सोनी चैनल के धारावाहिक में अभिनय किया
पर सबसे मजेदार रहा सोनी के धारावाहिक महायज्ञ के सेट पर पहुंचना। वहां पर प्रीति खरे जो पत्रकार विष्णु खरे बेटी हैं उनके लंबी बातचीत की। पर महायज्ञ धारावाहिक में हमें छोटा सा रोल करने को कहा गया जो हमारे लिए कौतूहल भरा था। कुछ जूनियर आर्टिस्ट कम पड़ गए थे। हमारा शाट गोविंद नामदेव के साथ था। वे स्थानीय नेता के रोल में थे। उनके ड्राईंग रुम में पहले बैठे कुछ मुलाकातियों में हम थे। उनके प्रवेश पर हम खड़े होकर उन्हें नमस्कार करते हैं और बैठ जाते हैं।  
हमलोग अपनी इस यात्रा के दौरान सोनी चैनल के दफ्तर, वीनस म्युजिक के दफ्तर गए। मुंबई की प्रोफेसनल लाइफ को समझा। तेजी से दौड़ती भागती जिंदगी को महसूस किया। मुंबई में आप बिना पहले से एप्वाइंटमेंट लिए किसी से मिलने न जाएं तो अच्छा रहता है। 

रेन डांस पार्टी में। 
हिंदूजा समूह वाइस प्रेसिडेंट कारपोरेट कम्युनिकेशंस पद पर कार्यरत हिमा मेहता से एक दिन हमलोग मिलने गए। उनसे दिल्ली में कई बार मुलाकात हुई थी। अंधेरी मोरल नाका रोड पर एमआईडीसी में हिंदुजा का दफ्तर है। हिमा जी ने हमें दोपहर का लंच कराया। हमारे एक और साथी आशीष कौल नहीं मिले, वे छुट्टी पर चल रहे थे। अगले दिन हम हीमा जी के आमंत्रण पर हमलोग जे डब्लू मेरिएट पांच सितारा होटल में रात्रि में एक रेन डांस पार्टी में शामिल हुए। देर रात तक पार्टी चलती रही। मैं और दीपक दोनों ही शराब नहीं पीते इसलिए कोल्ड ड्रिंक से मन बहलाते रहे। सात दिनों बाद दिल्ली से हमारी वापसी गोल्डेन टेंपल मेल ट्रेन से हुई। 

-vidyutp@gmail.com

(MALAD EAST, NIRDESH TYAGI )


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