Thursday, April 14, 2016

मुंबई का मणि भवन और बापू

जिन शहरों में बापू के कदम पड़े वहां कोई न कोई ऐसा स्थल जरूर है जो अब तीर्थ में परिणत हो चुका है। मुंबई में बापू की स्मृतियां देखनी हो तो मणि भवन पहुंचे।
मणि भवन वह स्थल है जहां मुंबई प्रवास के दौरान बापू ने लंबा वक्त गुजारा। मणि भवन मुंबई के लेब्रनम रोड पर गाम देवी इलाके में स्थित है। 1917 से 1934 के बीच बापू कई बार यहां रहे। अब यहां बापू की याद में एक संग्रहालय और रेफरेंस लाइब्रेरी बनाया गया है। इस पुस्तकालय में लगभग 40 हजार पुस्तकों का संग्रह है। भवन की पहली मंजिल पर एक आडिटोरियम है जहां बापू से जुडी फिल्म का प्रदर्शन समय समय पर किया जाता है। यहां गांधीवादी संस्थाओं द्वारा छोटे छोटे आयोजन भी समय समय पर होते रहते हैं।

मूल रूप से यह भवन रविशंकर जगजीवन झवेरी का हुआ करता था। वे बापू के बड़े सहयोगियों में से थे। बापू के मुंबई प्रवास के दौरान उनके रहने का इंतजाम वही किया करते थे। मणि भवन वह जगह है जहां से बापू ने असहयोग आंदोलन, होमरूल आंदोलन, स्वदेशी, सत्याग्रह, खादी और खिलाफत जैसे आंदोलन की शुरुआत की। आप यूं समझ सकते हैं कि यह भवन 20 सालों तक बापू का मुंबई मुख्यालय रहा।

1955 में इस भवन को गांधी स्मारक निधि ने अपने अधिकार में लिया और यहां बापू की याद में स्मारक बनाने का फैसला लिया गया। यह दो मंजिलों का भवन अब मुंबई शहर का गौरव है।

साल 2010 में अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा मणि भवन का दौरा करने आए। वह पहले अमेरिकी राष्ट्रपति हैं जो यहां पहुंचे। मणि भवन के आधार तल पर बापू द्वारा इस्तेमाल की गई वस्तुओं का संग्रह है। वहीं पहली मंजिल पर बापू से जुड़ी फोटो गैलरी बनाई गई है। यहां बापू द्वारा इस्तेमाल किए गए दो चरखे और उनका एक बिस्तर अभी भी देखा जा सकता है। साथ ही वह जगह भी देख सकते हैं जहां 4 जनवरी 1932 को बापू को गिरफ्तार कर लिया गया था।
3 मार्च 1959 को भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी यहां पहुंचे थे। मणिभवन से बापू की सैकड़ो स्मृतियां जुडी हैं। 1919 में जब उनकी तबीयत खराब हुई तो उन्होंने कस्तूरबा की सलाह पर बकरी का दूध लेना शुरू किया।
मार्च 1919 में रालेट एक्ट के खिलाफ सत्याग्रह मणि भवन से ही शुरू किया गया। 7 अप्रैल 1919 को बापू ने यहां से साप्ताहिक बुलेटिन सत्याग्रही की शुरुआत की। 9 जून 1931 को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की एक बैठक मणि भवन में हुई। बापू का स्मारक बनने के बाद मणि भवन देश के करोड़ो लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
खुलने का समय - आम दर्शकों के लिए मणि भवन सुबह 9.30 बजे से शाम 6.00 बजे तक खुला रहता है। यहां पहुंचने के लिए सुगम रास्ता चर्च गेट या मरीन लाइन्स लोकल ट्रेन से स्टेशन से है। मणिभवन मुंबई के चर्च गेट रेलवे स्टेशन से काफी नजदीक है। आप यहां टैक्सी करके या फिर  बस से पहुंच सकते हैं।
-vidyutp@gmail.com


( MANI BHAWAN, GANDHI, MUMBAI ) 

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (20 -04-2016) को "सूखा लोगों द्वारा ही पैदा किया गया?" (चर्चा अंक-2318) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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