Thursday, April 7, 2016

भिंडी बाजार से होकर गुजरना....

भक्ति पार्क मोनो रेल स्टेशन से सीएसटी की तरफ जाना था। अचानक बेस्ट की बस नंबर 45 दिखाई देती है। इस पर मंत्रालय लिखा था। हमने पूछा सीएसटी होकर जाती है। उत्तर हां में मिलने पर हम बस में सवार हो गए। बस में सीट मिल गई। पर आने वाले स्टाप पर भीड़ बढ़ने लगी। बस वडाला, दादर होती हुई आगे बढ़ रही थी। जकारिया बंदर, काला चौकी, अलबर्ट रोड, रे रोड पुल, डॉकयार्ड रोड, मजगांव भयखाला, नागपाड़ा होती हुई बस आगे बढ़ रही थी। इसके बाद शुरू हुई भिंडी बाजार। महमूद अली रोड और इसके बाद आया इब्राहिम रहमतुल्ला रोड, मीनार मसजिद, जकरिया मसजिद, नूर बाग आदि। भिंडी बाजार मुंबई का अति व्यस्त बाजार है। यहां सैकड़ों इत्र की दुकानें दिखाई दे रही हैं। भिंडी बाजार में ज्यादातर मुस्लिम आबादी है। घनी बस्ती और व्यस्त बाजार है। मुख्य बाजार महमूद अली रोड और इब्राहिम रहमतुल्ला रोड पर है। पर है रोड के आसपास गलियों में भी बाजार नजर आता है। कई टूर ट्रैवेल आपरेटरों के दफ्तर नजर आते हैं।

इसका नाम भिंडी बाजार क्यों पड़ा यह रोचक विषय हो सकता है। हालांकि यहां भिंडी नहीं बिकता। यह माना जाता है कि ब्रिटिश काल में बने क्रॉफर्ड मार्केट ( फूले मार्केट) के बगल का इलाका होने के कारण इसे बीहाइंड द मार्केट कहा जाता था। यही बाद में बिगड़ कर भिंडी बाजार हो गया। इसे ब्रिटिश काल में बंदरगाह के मजदूरों के डारमेटरी निवास के तौर पर बसाया गया था। एक कमरे का घर। कॉमन टायलेट भिंडी बाजार की परंपरागत पहचान है। धीरे धीरे यह इलाका बिजनेस हब के तौर पर विकसित हो गया। मुंबई के इस बाजार में रोजाना करोड़ो का कारोबार होता है। यह बाजार हार्डवेयर के सामान, फोम और एंटिक आइटमों के लिए प्रसिद्ध है। भयखला और मुंबई के बंदरगाह इलाकों के पास का यह बाजार मुंबई का बहुत ही पुराना इलाका है। 16.5 एकड़ इलाके मे फैले भिंडी बाजार में अभी 20 हजार लोग रहते हैं। इसमें 70 फीसदी दाउदी वोहरा समुदाय के लोग हैं। भिंडी बाजार में इस समुदाय का मुख्यालय और उनकी मसजिद भी है। वहां शुरुआत से मेमन, गुजराती, सिंधी और पारसी समुदाय के लोग भी रहते आए हैं।

साल 2015 में अचानक माफिया डॉन दाऊद इब्रागिम के होटल दिल्ली जायका का नाम नीलामी के कारण चर्चा में आया। यह रेस्त्रां भिंडी बाजार में ही स्थित है। छोटे से इस भवन का पुराना नाम रौनक अफरोज था।
मुंबई का क्रॉफर्ड मार्केट। 

 भिंडी बाजार से आगे बढ़ने पर आप क्रॉफर्ड मार्केट में पहुंच जाते हैं। यह होलसेल बाजार है। यहां आप काफी कुछ खरीद सकते हैं। खास तौर पर किसिम किसिम के बैग और प्लास्टिक के सामान। भिंडी बाजार से निकटम रेलवे स्टेशन सेंडहरस्ट रोड है। आसपास में नल बाजार, चोर बाजार जैसे बाजार भी हैं। इसका इलाके में दाउदी वोहरा समुदाय के मुस्लिमों के घर ज्यादा हैं।    

भिंडी बाजार पर फिल्म-  मुंबई के भिंडी बाजार पर इसी नाम से एक फिल्म भी बनी है। इस फिल्म में एक जगह भिंडी बाजार कहलाती है और यही की कहानी को फिल्म में दिखाया गया है। फिल्म के कथानक में भिंडी बाजार जेबकतरोंचोर-उचक्कों से भरा हुआ है। एक तरफ गाड़ियों का शोर तो दूसरी तरफ हॉकरों की किच-किच... ऐसा है मुंबई के मोहम्मद अली रोड के पास वाला भिंडी बाजार से गुजरना। कोई जंग लड़ने जैसा है। यूं तो भिंडी बाजार में बहुत कुछ बिकता है। भिंडी बाजार नाम सुनते ही भीड़-भाड़संकरी गलियांट्रैफिक और बेरंग हो चुकी पुरानी इमारतों का चेहरा याद आ जाता है। 

भिंडी बाजार को नया रूप देने की कोशिश – भिंडी बाजार में भीड़ का आलम कुछ ऐसा है कि आपको भिंडी बाजार में व्यस्त समय में पांव रखने की जगह न मिले। गाड़ियां और पार्किंग की बात तो छोड़ दीजिए। मकान इतने पुराने हैं कि 80 फीसदी मकान असुरक्षित घोषित कर दिए गए हैं।  पर अब कुछ संस्थाएं भिंडी बाजार को नया रूप देने की कोशिश में लगी हैं। अगर सब कुछ ठीक रहा तो इस बाजार को मेकओवर मिलेगा। इसके लिए 4000 करोड़ रुपये की योजना पर काम हो रहा है। इसके लिए सैफई बुरहानी अपलिफमेंट ट्रस्ट (http://www.sbut.com/)  खास तौर पर काम कर रहा है। इसमें सभी प्रमुख भवनों को जमींदोज कर नई इमारतें बनाने की कोशिश की जा रही है। इसमें 30 से 60 मंजिल वाले 17 टावर बनाए जाएंगे। इसमें 13 टावर में वर्तमान बासिंदे रहेंगे बाकी का इस्तेमाल अन्य व्यवसाय के लिए हो सकता है। वास्तव में यह एक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट है। अगर यह सफल हुआ तो दूसरे पुराने शहरों के लिए नजीर बन सकता है।

दाउदी वोहरा समुदाय- भिंडी बाजार का बहुसंख्यक दाउदी वोहरा शिया मुसलिम का एक संप्रदाय है कि जिनकी दुनिया भर में आबादी तकरीबन 10 लाख है। इनमें ज्यादातर अमीर हैं और बिजनेस करते हैं। इनकी गुजरात में बड़ी संख्या है। आमतौर पर वोहरा लोग सफेद सुनहली टोपी पहनते हैं। वोहरा समुदाय में महिलाओं को मसजिद में जाने की अनुमति है। पर दाउदी वोहरा समुदाय में कुछ और भी परंपराए हैं, जैसे यहां महिलाओं भी खतना का रिवाज है।





No comments:

Post a Comment