Sunday, March 6, 2016

बुधवार पेठ- यहां सावित्री बाई फूले ने खोला था पहला बालिका विद्यालय

अगर महाराष्ट्र का शहर मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है तो पुणे महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी। पुणे महाराष्ट्र का पुराना शहर है। इसे पुण्य नगरी भी कहा जाता है। पर पुणे शहर के दो हिस्से हैं। पुराना शहर और नया शहर। बात पुराने शहर की करें तो यह पेठ का शहर है। इनके नाम हैं- रविवार पेठ, सोमवार पेठ, मंगलवार पेठ, बुधवार पेठ, गुरुवार पेठ, शुक्रवार पेठ, शनिवार पेठ, नाना पेठ, कसबा पेठ, रास्ता पेठ, गणेश पेठ आदि। पुणे जंक्शन रेलवे स्टेशन से प्लेटफार्म नंबर एक की तरफ बाहर निकलने के बाद जब आप दाहिनी तरफ की ओर चलेंगे तो सबसे पहले आप मंगलवार पेठ में पहुंच जाएंगे। किसी जमाने में ये बाजार पुणे की रौनक थे। रौनक आज भी है। पर अब भीड़ बढ़ गई है। कई सड़कों को वन वे कर दिया गया है। कई सड़कों पर बसें नहीं चलतीं। सिर्फ आटो रिक्शा से या पैदल चला जा सकता है।
वैसे पुणे शहर में कुल 17 पेठ हैं। इन सभी पेठ का निर्माण पेशवा के शासन काल में17वीं से 19वीं शताब्दी के बीच हुआ है। पेठ से तात्पर्य शहर के किसी इलाका से है। जिन पेठ का नाम अलग अलग दिन पर है। किसी जमाने में उस क्षेत्र में उसी दिन साप्ताहिक बाजार लगा करता था। जैसे बुधवार पेठ में बुधवार के दिन। हालांकि अब ये नियमित बाजार में तब्दील हो चुके हैं।  बुधवार पेठ की शुरुआत पेशवा बालाजी विश्वनाथ ने कराई थी। हर पेठ के साथ किसी न किसी राजा का नाम जुड़ा हुआ है। सदाशिव राव पेशवा ने सदाशिव पेठ तो नारायण राव पेशवा ने नारायण पेठ की शुरुआत कराई। नाना फड़नवीस के समय में नाना पेठ की शुरुआत हुई। ब्रिटिश काल में जिस बाजार की शुरुआत हुई उसका नाम नवी पेठ पड़ गया।
इन सबके बीच कसबा पेठ सबसे पुराना है जिसकी शुरुआत नौवीं शताब्दी में चालुकय राजाओं ने कराई थी। ये सारे पेठ पुणे की संस्कृति और विरासत का परिचय देते हैं। बाजार में दुकानों का स्वरूप बदल रहा है पर प्राचीनता की सोंधी सी खूशबु भी आप इन पेठ से गुजरते हुए महसूस कर सकते हैं। बुधवार पेठ के पास आप पुणे नगरपालिका की ऐतिहासिक इमारत भी देख सकते हैं।  बुधवार पेठ में 1660 में औरगंजेब ने अपना डेरा डाला था।
सन 1848 में सावित्री बाई फूले ने महाराष्ट्र में लड़कियों के लिए पहला स्कूल बुधवार पेठ में ही भीडे वाडा में शुरू किया था। तब माता सावित्री बाई फूले को लड़कियों को शिक्षा देने के कारण काफी विरोध का सामना करना पड़ा था। तब सावित्रि बाई फूले की उम्र मात्र 17 साल थी जब उन्होंने इतना बड़ा क्रांतिकारी कदम उठाया था। सावित्री बाई ने अछूत महिलाओं की सेवा की तो ऊंची जाति की महिलाओं को भी पढ़ाने का काम किया। बापू से भी पहले फूले दंपति ने छूआछूत खत्म करने के लिए कई व्यवहारिक कदम उठाए।
 सावित्री बाई फूले ( जन्म 3 जनवरी 1831 - निधन 10 मार्च 1897)
 जहां सावित्रि बाई ने स्कूल शुरू किया ता वह जगह मशहूर दगड़ु सेठ हलवाई गणपति के मंदिर के पास ही है। शुक्रवार पेठ इलाके में स्थित पुणे महानगर पालिका के फल मंडी का भवन का नाम महात्मा फूले के नाम पर है। महात्मा फूले मंडई पुणे शहर का सबसे बड़ा फल बाजार है।
बात एक बार फिर बुधवार पेठ की तो  अब बुधवार पेठ की पहचान बदल गई है। आम तौर पर देश भर में टैक्सी में लगने वाला रेंट मीटर यहीं बुधवार पेठ में ही बनता है। बुधवार पेठ का एक और चेहरा है। यहां देश बड़ा रेडलाइट एरिया भी है। तकरीबन 5000 से ज्यादा सेक्स वर्कर्स यहां रहती हैं।

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