Monday, March 21, 2016

पुणे जंक्शन पर रेलवे की लापरवाही से हमारी ट्रेन छूट गई

51034 शिरडी मुंबई छत्रपति शिवाजी फास्ट पैसेंजर में हमारा आरक्षण एसी 3 कोच मे था। तीन सीटें आरक्षित थीं। पीएनआर नंबर था 8400165464  कुल किराया दिया 1515 रुपये। कोच बी-1 में सीट नंबर थी 33, 36 और 39 हमने 18 फरवरी को चलने वाली ट्रेन के लिए 6 फरवरी 2016 को ऑनलाइन टिकट बुक कर लिया था। पुणे जंक्शन स्टेशन समय पर पहुंचे। तीन घंटे इंतजार के बावजूद रेलवे की घोर लापरवाही से हम ट्रेन नहीं पकड़ सके। रेलवे की आनलाइन इन्क्वारी सेवा में ट्रेन लेट बताई जा रही थी। पर पुणे जंक्शन पर लगे डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर 51034 ट्रेन के बारे में कहीं कोई उदघोषणा नहीं हो रही थी। हम लगातार डिस्प्ले बोर्ड देख रहे थे। पर बीजापुर से आने वाली 51030 के बारे में सूचना जरूर आ रही थी। हालांकि 51034 एक रोज चलने वाली पैसेंजर ट्रेन है जो शिरडी से आती है, इसकी कोई जानकारी डिस्प्ले बोर्ड पर नहीं आ रही थी।

मैंने एक बार 12 बजे रात को मोबाइल क्रिस की साइट पर चेक किया तो पता चला कि ट्रेन पुणे से पीछे वाले स्टेशन पर खड़ी है। रात एक बजे चेक करने पर पता चला कि ट्रेन पुणे स्टेशन पर खड़ी है। हालांकि हमने प्लेटफार्म नंबर एक से लेकर छह तक चेक किया कहीं भी ट्रेन नंबर 51034 का अता पता नहीं था। थोड़ी देर बाद क्रिस की वेबसाइट ने अपडेट किया कि ट्रेन पुणे से तीन किलोमीटर आगे शिवाजीनगर जा चुकी है। अब हमारी चिंता बढ़ी मैं परिवार के साथ अपना ढेर सारा लगेज लिए हुए दौड़ता हुआ प्लेटफार्म नबंर एक पर स्टेशन मास्टर के दफ्तर में पहुंचा। वहां मेरा पाला ऑन ड्यूटी स्टेशन मास्टर से पड़ा। उन्होंने बताया कि हां ट्रेन आई और चली भी गई। उनसे ही पता चला कि ये 51034 ट्रेन पुणे में बीजापुर से आने वाली 51030 के साथ जुड़ कर आगे मुंबई की ओर जाती है। पर रेलवे स्टेशन के डिस्प्ले में हर रोज चलने वाली इस ट्रेन के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। ऐसा हर रोज होता है।


रेलवे की इस घोर लापरवाही से हमारी ट्रेन छूट गई। हमने वातानुकूलित क्लास में आरक्षण इसलिए कराया था कि रात भर सो कर आराम से मुंबई जा सकें। पर हमारी ये रात किसी बुरे सपने मे तब्दील हो गई। ड्यूटी पर मौजूद स्टेशन मास्टर ने अपना नाम बताने से इनकार किया। रेलवे की घोर लापरवाही ये भी है कि इस दैनिक ट्रेन का कोई डिजिटल डिस्प्ले नहीं हुआ साथ ही कोई उदघोषणा भी इस ट्रेन को लेकर नहीं की गई। मैं, मेरी पत्नी माधवी और बेटा अनादि लगातार अपनी ट्रेन को लेकर होने वाली घोषण पर ध्यान रखे हुए थे। इस तरह हमारे 1515 रुपये झटके में पानी में चले गए। हम निर्धारित समय पर मुंबई नहीं पहुंच सके इसको लेकर परेशानी हुई सो अलग। आखिर इसके लिए कौन जिम्मेवार है। प्लेटफार्म नंबर एक पर मौजूद पूछताछ केंद्र के बाबू ने भी माना कि 51034 ट्रेन को लेकर कहीं डिजिटल डिस्प्ले नहीं किया गया। उन्होने कहा इस संदर्भ में आप स्टेशन मास्टर से बात करें।

स्टेशन मास्टर का लापरवाही भरा जवाब था कि इस बाकी लोग इस ट्रेन से जाने वाले चले गए, आप कैसे रह गए। दरअसल बाकी स्थानीय लोगों को ये मालूम है कि पुणे से 51034 और 51030 जुड़ कर चलती हैं पर किसी बाहरी व्यक्ति को ये कैसे पता चलेगा जब तक इसके बारे में रेलवे स्टेशन पर डिस्प्ले या उदघोषणा नहीं होगी। मैंने डीआरएम पुणे और जीएम सेंट्रल रेलवे, सीएसटी मुंबई को अपनी शिकायत टिवटर पर की है। मेरे नुकसान की भरपाई से ज्यादा जरूरत इस बात की है कि पुणे स्टेशन पर इस ट्रेन के बारे में नियमित डिस्प्ले और घोषणा हो और स्टेशन के लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
उपसंहार - कुछ लोगों ने जानना चाहा इसके बाद क्या हुआ। रात के 2.10 बजे चालुक्य एक्सप्रेस आ रही थी पुड्डुचेरी से। हमने तीन जनरल टिकट खरीदे। इंजन के ठीक बाद वाले कोच में मुश्किल से जगह मिल गई। तकरीबन तीन घंटे में चालुक्य एक्सप्रेस ने हमें दादर पहुंचा दिया। 
vidyutp@gmail.com 
( PUNE, RAIL) 





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