Thursday, February 25, 2016

कब बजेगी शिलांग में रेल की सिटी

वह साल 2014 में 29 नवंबर का दिन था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेघालय के लिए पहली ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही आजादी के छह दशक से अधिक समय बाद मेघालय देश के रेल नक्शे पर आ गया। 

मेंदीपथार-गुवाहाटी के बीच पहली पैसेंजर ट्रेन के संचालन की शुरूआत हुई। पर राजधानी शिलांग को ट्रेन से जोड़ने की योजना अभी दूर की कौड़ी है। मेंदीपथार (MNDP)  तक रेल दूधनोई से पहुंचाई गई है। दूधनोई गुवाहाटी कामाख्या गोलपाड़ा न्यू बंगाई गांव लाइन पर रेलवे स्टेशन है। गुवाहाटी की ओर से चलने पर दूधनोई गोलपारा टाउन से 20 किलोमीटर पहले आता है। इस तरह से दूधनोई (DDNI) अब जंक्शन बन गया है। पर दूधनोई से मेंदीपथार की दूरी महज 20 किलोमीटर है। राज्य बनने के बीस साल बाद रेल प्रवेश जरूर कर गई है पर महज कुछ किलोमीटर तक। इससे बहुत छोटी आबादी को लाभ हो रहा है। कुल 9.36 किलोमीटर रेलवे ट्रैक अभी मेघालय में है। 916 मीटर की ऊंचाई पर मेंदीपथार वेस्ट गारो हिल्स जिले में पड़ता है। सिर्फ दो रेलवे स्टेशन अभी मेघालय में हैं। पहला स्टेशन नोलबाड़ी 10वें किलोमीटर पर है। आखिरी स्टेशन मेंदीपथार 19वें किलोमीटर पर।
दूधनोई की सुबह में उगता सूर्य। 

मेघालय को दूसरा रेल लिंक दिया जा रहा है तेतेलिया से जो राज्य की राजधानी शिलांग को जोड़ेगा। तेतेलिया ( TTLA) गुवाहाटी से लमडिंग के बीच 39वें किलोमीटर पर एक छोटा सा स्टेशन है। यह स्टेशन जागी रोड से 19 किलोमीटर पहले है। यहां से बिरनी हाट तक 21.5 किलोमीटर रेलवे लाइन बनाए जाने पर काम चल रहा है। वास्तव में यही लाइन राजधानी शिलांग तक जाएगी। पर इसमें अभी कई साल लगेंगे। इस लाइन के लिए साल 2015 तक लोकेशन सर्वे पूरा हुआ है। बिरनी हाट तक पहुंचने वाली लाइन में केवल 2.5 किलोमीटर का ट्रैक मेघालय में पड़ेगा। एक मुश्किल और भी है। मेघालय के कई एनजीओ रेलवे लिंक का विरोध कर रहे हैं जिससे प्रोजेक्ट में देरी हो रही है। हालांकि ये एक नेशनल प्रोजेक्ट है। बिरनी हाट गुवाहाटी शिलांग नेशनल हाईवे नंबर 40 पर नोंगपो से पहले पड़ता है। बिरनी हाट में औद्योगिक क्षेत्र भी है। इसके बाद शिलांग तक जाने वाली लाइन एनएच 40 के आसपास से गुजरेगी।



ब्रिटिश काल में 1880 में चेरापूंजी तक रेल पहुंचाने की योजना बनी थी पर वह परवान नहीं चढ़ सकी। इसका एक खंड तो पूरा हो गया था पर बाकी दो खंड पर काम नहीं हो सका। कुछ तकनीकी बाधाओं के कारण ब्रिटिश काल में चेरापूंजी तक रेल ले जाने की योजना परवान नहीं चढ़ सकी। उसके बाद से 100 साल से ज्यादा गुजर गए यह सुंदर इलाका रेलवे की सिटी सुनने के लिए तरस रहा है।

दो राज्यों के बीच बंटा जोराबात - अगर आप गुवाहाटी से शिलांग की ओर चलते हैं तो गुवाहाटी शहर के बाहरी इलाके से मेघालय राज्य शुरू हो जाता है। एनएच 37 से एनएच 40 के जंक्शन यानी तिनाली जंक्शन के बीच खानपारा, बरिदुआ और जोराबात मेघालय में पड़ते हैं। तिनाली जंक्शन पर एक भद्रकालेश्वरी मंदिर भी है। वास्तव में एनएच 37 एक तरफ असम पड़ता है दूसरी तरफ मेघालय। यह आप जोराबात से गुजरते हुए खूब देख सकते हैं। एक तरफ के दुकानों की साइन बोर्ड पर मेघालय लिखा नजर आता है तो दूसरी तरफ असम। जोराबात रीभोई जिले में पड़ता है जबकि उसका एनएच के इस पार वाला हिस्सा असम के कामरूप जिले में। मेघालय के जोराबात का पिन कोड है 793101  जबकि असम इलाके के जोराबात का पिन कोड 781026 है। जोराबात में नेपाली और बिहारी लोगों की बड़ी संख्या है। यह बड़ा व्यापारिक इलाका है। भले ही मेघालय की भौगोलिक सीमा गुवाहाटी के काफी करीब तक पहुंचती हो पर राजधानी शिलांग तक रेल की सिटी बजने मे अभी काफी वक्त लगेगा।

( SHILLONG, MEGHALYA, RAIL )


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