Saturday, February 20, 2016

मेघालय का सबसे बड़ा कैथोलिक चर्च

शिलांग शहर में वैसे तो कई चर्च हैं पर इन सबके बीच सबसे बड़ा और खूबसूरत चर्च है कैथोलिक चर्च। कैथेड्रल ऑफ मेरी हेल्प ऑफ क्रिसचियन्स लाइतुमखारा ( LAITUMKHARAH) में स्थित है। चर्च सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है। 1913 में इस चर्च का निर्माण कैथोलिक जर्मन मिशनरीज की ओर से किया गया। पर 1936 में यह चर्च आग में तबाह हो गया। उसी पुराने चर्च के अवशेषों पर नए चर्च का निर्माण 15 नवंबर 1947 को पूरा हुआ। इसके निर्माण में शिलांग के दूसरे बिशॉप स्टीफेन फेरांडो की बड़ा योगदान रहा। चर्च के दूसरी तरफ सड़क के उस पार प्रभू यीशू का बलिदान स्थल ( CALVARY)  बना है। इसकी भव्यता भी देखते ही बनती है। दोनों की ईमारतों का रंग आसमानी है। नीले रंग का यह चर्च अति विशाल है। 


आसमान के नीले रंग के साथ जोड़कर देखने पर यह प्रकृति की कोई शानदार चित्रकारी सा नजर आता है। मेघालय के खासी समाज के उत्थान में चर्च की बड़ी भूमिका रही है। भले ही चर्च ने खासी समाज को ईसाई बनाया हो पर उनके बीच शिक्षा के प्रसार में भी चर्च की बड़ी भूमिका रही है। चर्च परिसर में फोरोटो हेफेनमूलर एसडीएस की प्रतिमा लगी है जिसके नीचे उनका वाक्य लिखा है- ईफ वी कैन नाट बिल्ड अप ए कम्युनिटी आफ खासी वी आर यूजलेस हियर...


चर्च परिसर में कैथोलिक इन्फारमेशन सेंटर और काउंसलिंग सेंटर की विशाल बिल्डिंग बनी है। परिसर में प्रभू यीशू के जीवन से जुडी कई झांकियां भी हैं। वहीं परिसर में विशाल बियांची मेमोरियल हाल भी बना है। सभी इमारतें मिलकर चर्च परिसर को काफी भव्यता प्रदान करती हैं। कैथेड्रल ऑफ मेरी हेल्प ऑफ क्रिसचियन्स देश के चंद सबसे खूबसूरत चर्च में से है।

दूर-दूर से आए सैलानी इस चर्च को देखने के लिए बड़ी संख्या में आते हैं। पूरे चर्च की नक्काशी को देखने के लिए आप एक घंटे का समय जरूर अपने पास रखें। कैथोलिक चर्च गोरोटो चापेल चर्च में रविवार को सुबह 7 बजे अंगरेजी में और सुबह 10 बजे हिंदी में प्रार्थना होती है।
-vidyutp@gmail.com

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