Sunday, January 24, 2016

नाथुला यानी पुराने सिल्क रूट (रेशम मार्ग ) की ओर...

सुबह का सूरज अभी निकला है और मैं तिब्बत रोड पर टहल रहा हूं। गंगटोक का तिब्बत मार्ग एमजी रोड से ऊपर की ओर जाता है। यह चीन की सीमा यानी नाथुला की ओर जा रहे रास्ते से जा मिलता है। ईसा पूर्व दूसरी सदी से चीन से हमारा कारोबार चलता था। यह रास्ता रेशम मार्ग (SILK ROUTE) कहलाता था। भारत का सिल्क रूट से संपर्क सिक्किम और तिब्बत से होकर था। कई सौ सालों तक चीन के साथ न सिर्फ रेशम बल्कि अन्य सामग्रियों की भी तिजारत इसी सड़क मार्ग से चलती रही। पर कारोबार का मुख्य हिस्सा रेशम था इसलिए इस मार्ग का नाम रेशम माल्ग या सिल्क रूट पड़ गया। गंगटोक में एक सड़क का नाम तिब्बत रोड है। हालांकि इसका नया नाम सोनम ग्यात्से मार्ग दिया गया है पर ज्यादातर लोग इसे तिब्बत मार्ग नाम से ही बुलाते हैं।


हमारी तैयारी नाथुला सीमा की ओर और बाबा हरभजन सिंह मंदिर जाने की है। गंगटोक से नाथुला की दूरी 56 किलोमीटर है। पर रास्ता मनोरम और थोड़ा मुश्किल भरा भी है। नाथुला की ओर जाने वाली टैक्सियां वज्र स्टैंड से मिलती हैं। आप अपनी निजी कार से उधर नहीं जा सकते। आपको सिक्किम की ही टैक्सियां किराए पर लेनी पड़ती हैं।
कागजी कार्रवाई – नाथुला मार्ग पर जाने के लिए कागजी कार्रवाई भी पूरी करनी पड़ती है। इसके लिए परमिट एक दिन पहले ही बनवाना पड़ता है। हालांकि इसकी कागजी कार्रवाई आपका टूर आपरेटर ही पूरा कर देता है। पर आपको अपनी चार फोटो, दो आईडी प्रूफ जमा करना पड़ता है। परमिट पुलिस विभाग और वन विभाग जारी करता है। गंगटोक शहर से बाहर निकलते ही परमिट की चेकिंग होती है। यहां पर हर यात्री को एक दस रुपये का स्वच्छता डोनेशन कूपन भी लेना पड़ता है। वहीं विदेशी नागरिकों को इस प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने के लिए एफआरओ बनवाना पड़ता है।

टैक्सी धीरे धीरे आगे बढ़ती जा रही है। धूप पर मौसम में सर्द होता जा रहा है। घुमावदार रास्तों के साथ ऊंचाई बढ़ती जा रही है। हम बादलों के करीब होते जा रहे हैं। कोई 20 किलोमीटर से ज्यादा चलने पर आता है, 15 मील यानी क्यांगोसला। टैक्सी वाले यहां पर कुछ हल्का फुल्का खाने के लिए रोकते हैं। यहां पर कैफै है जो सिक्किम टूरिज्म द्वारा संचालित है। यह कैफे 10 हजार 400 फीट की ऊंचाई पर है। क्यांगोसला यानी 15 मील पर एक रेडीमेड कपड़ो जिसमें खास तौर पर टोपियां, दस्ताने और जैकेट बिकते हैं इसकी दुकान है। दुकान में चाय, कॉफी और मोमोज भी मिलते हैं।


इसके काउंटर पर बैठी मिली 12 साल की नन्हीं रेजिना। रेजिना सातवीं क्लास में पढ़ती है। पूछने पर बताती है कि गंगटोक के स्कूल में पढ़ती हं। इन दिनों स्कूल बंद हैं इसलिए छुट्टियों में मां के साथ दुकान पर उनकी मदद कर रही हूं। यहां चाय 10 रुपये में मिल रही है। यानी कीमत को लेकर कोई लूटपाट नहीं। मैगी 50 रुपये की। उबले अंडे भी मिलते हैं। मैं आम तौर पर चाय नहीं पीता। पर ठंड बढ़ती जा रही है तो चाय की चुस्की लेना भला लगता है। लौटती यात्रा में ही हम यहां पर रूकते हैं तब यहां बादल सड़कों पर टहलते हुए नजर आते हैं। हम इन बादलों के संग थोड़ी देर तक मस्ती करते हैं और फिर रवाना  हो जाते है आगे के लिए।
-vidyutp@gmail.com 

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