Monday, January 18, 2016

काजी दोरजी - सिक्किम में लाए लोकतंत्र

काजी दोरजी को सिक्किम में जनतंत्र लाने का श्रेय जाता है। उन्हें सिक्कम में फादर ऑफ डेमोक्रेसी कहा जाता है। 10 नवंबर 1904 को जन्में काजी दोरजी ने राजतंत्र के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका था। अब सिक्किम विधानसभा परिसर में उनकी आदमकद प्रतिमा लगाई गई है। दोरजी का निधन 2007 में 28 जुलाई को हुआ।

सिक्किम हिन्दुस्तान का सबसे नया राज्य है। यह पुडुचेरी और गोवा के बाद भारत का हिस्सा बना। यह 1975 मे भारत का 22वां राज्य बना। इससे पहले सिक्किम में लंबे समय से राजतंत्र हुआ करता था। पर जनता चोग्याल के शासन से त्रस्त थी। चोग्याल ने जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों की उपेक्षा शुरू कर दी, तब लोग नाराज हुए। हालांकि चोग्याल चाहता था कि उसका भूटान की तरह स्वतंत्र देश की तरह अस्तित्व बना रहे। पर सिक्किम की जनता हमेशा से विशाल भारतीय लोकतंत्र का हिस्सा बनना चाहती थी। वहीं भारत के लिए सिक्किम का सामरिक महत्व हैं क्योंकि यह तिब्बत जाने का मार्ग है और तिब्बत चीन के कब्जे में है।



( QAZI DORJEE,  GANGTOK,  DEMOCRACY,  SIKKIM) जनता को स्वीकृति के तुरन्त बाद काजी लेन्दुप दोरजी ने 16 अप्रैल 1975 को भारत सरकार से उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया। काजी दोरजी का अनुरोध था कि कार्रवाई तुरन्त की जानी चाहिए । भारत ने काजी  दोरजी के अनुरोध को स्वीकार किया और चोग्याल की पद की समाप्ति के लिए जनता की राय ली। इस बीच चोग्याल ने विदेशी शक्तियों से संपर्क साधने की कोशिश की। पर जनता ने उसके संपर्क के सारे साधन ध्वस्त कर दिए। कोई बड़ा खून खराबा नहीं हुआ। 16 मई 1975 को भारत सरकार ने एसके लाल को सिक्किम का गवर्नर बनाकर भेजा। इस तरह सिक्किम भारत का हिस्सा बन गया। इसी दिन काजी दोरजी को भी सिक्किम के पहले मुख्यमंत्री की शपथ दिलाई गई। इसके साथ ही गंगटोक में तिरंगा लहराने लगा। वे अगले चार साल तक 1979 तक सिक्किम के मुख्यमंत्री रहे। उसके बाद नर बहादुर भंडारी के हाथों में कमान आई। नर बहादुर 1979 से 1984 फिर 1984 से 1994 तक सिक्किम के मुख्यमंत्री रहे।

चामलिंग का दौर - 12 दिसंबर 1994 को सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के पवन कुमार चामलिंग के हाथ में सिक्किम की कमान आई। अब पिछले 22 साल से वे सिक्किम के मुख्यमंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं। उम्मीद है वे ज्योति बसु का रिकॉड तोड़ सकते हैं। चामलिंग की लोकप्रियता का आलम ये है कि वहां विपक्ष काफी कमजोर है। गंगटोक शहर के तमाम दुकानों  एसडीएफ के विशाल कैलेंडर लगे दिखाई देते हैं जिसमें चामलिंग की तस्वीरें लगी हैं। ये उनकी लोकप्रियता का परिचायक है कोई तानाशाही नहीं। दुकान सम्मान में उनकी तस्वीरों वाली कैलेंडर लगाते हैं।

सिक्किम विधान सभा - सिक्किम में कुल 32 विधानसभा क्षेत्र हैं। इसमें से 12 अनुसूचित जाति और जनजातीय आबादी के लिए आरक्षित हैं। राज्य की कुल आबादी सवा छह लाख है जिसमें 3.25 लाख मतदाता हैं। राज्य की कुल आबादी में 69 फीसदी नेपाली लोग हैं। वहीं बाकी आबादी में भूटिया, तिब्बती और लेपचा प्रमुख रूप से आते हैं। सिक्किम का वर्तमान एसेंबली भवन नामनांग स्थित है। यह मार्च 1993 में बनकर तैयार हुआ। भवन को सिक्किम की वास्तुकला के हिसाब से बनाया गया है। यह तीन मंजिला है। दूर से देखने में यह किसी बड़े घर सा ही लगता है। इसके बगल में अब चिंतन भवन का निर्माण हुआ है जो विशाल बैठक कक्ष है। इसमें राज्य के प्रमुख राजकीय आयोजन होते हैं।
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