Saturday, January 16, 2016

आर्गेनिक स्टेट बना सिक्किम- बाकी राज्यों के लिए नजीर

देश के एक नन्हें से राज्य सिक्किम ने वो कर दिखाया है जो दूसरे राज्यों के लिए नजीर बन सकती है। कई सालों से चल रहे प्रयास के बाद सिक्किम देश का पहला आर्गेनिक स्टेट बन गया है। यानी सिक्किम के किसी भी खेत में जो कुछ भी पैदा होगा वह आर्गेनिक उत्पाद ही होगा। आलू, गोभी, चाय से लेकर सब कुछ। यह कर दिखाया है मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के नेतृत्व में राज्य के लोगों ने। साल 2003 में जब सिक्किम ने विधानसभा में ये प्रस्ताव लाया तो लोगों को थोड़ा आश्चर्य हुआ था, पर अब ये हकीकत बन चुका है।
पूरी दुनिया में आर्गेनिक खेती को लेकर जागरुकता की बयार तो सालों से चल रही है। कई राज्यों के खेत लगातार पेस्टिसाइड्स और यूरिया पोटाश जैसे खाद डाले जाने के कारण बर्बाद हो चुके हैं। कई साल पहले पंजाब सरकार के एक मंत्री ने सार्वजनिक तौर पर माना था कि उनके राज्य का गेहूं तो जानवरों के खाने लायक भी नहीं रह गया है। भविष्य में होने वाली कैंसर जैसी तमाम घातक बीमारियों से बचने का ऊपाय है कि हम समय रहते चेत जाएं। वैसे उत्पादों का ही सेवन करें जो बिना रासायनिक खाद और कीटनाशक के ही उगाए गए हों। पर भला किसी राज्य के कुछ गांव के कुछ किसानों के आर्गेनिक फार्मिंग करने से भला हम कब तक सार्थक नतीजों तक पहुंच सकेंगे। इस सच को समझा सिक्किम ने।

साल 2003 में हुई शुरुआत – सिक्किम ने 2003 में ही कानून पास कर दिया कि राज्य के खेतों में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल प्रतिबंधित होगा। वहां आप घरों में पेस्ट कंट्रोल भी नहीं करा सकते। चामलिंग के इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे हिमालय के पारिस्थितिक तंत्र को बचाने की भावना भी थी। क्योंकि सिक्किम का बड़ा हिस्सा हिमालय की पर्वत श्रंखलाओं के बीच विस्तारित है। सिंथेटिक फर्टिलाइजर पर प्रतिबंध से ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन में भी कमी आई है। पूरे सिक्किम का वातावरण में सुधार हुआ है। यह एक ऐसा दूरदर्शी फैसला था जिसके परिणाम दूरगामी होंगे। आज दुनिया क्लाइमेट चेंज के खतरों से जूझ रही है उसमें सिक्किम की ये कोशिश सराहनीय है।     
अब सौ फीसदी आर्गेनिक खेती -  सिक्किम में कुल 60 हजार हेक्टेयर फार्मलैंड यानी खेती योग्य जमीन है। इसमें साल 2014 तक 40 फीसदी इलाके में आर्गेनिक तरीके से खेती होने लगी थी। पर 2015 के अंत तक 100 फीसदी का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया। सिक्किम स्टेट कोआपरेटिव सप्लाई एंड मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेट ( सिमफेड) ने खेती की निगरानी के लिए एक तंत्र विकसित किया। किसानों को आर्गेनिक खेती के लिए न सिर्फ प्रेरित किया गया। बल्कि इसके लिए कानून भी बनाए गए। गंगटोक के पत्रकार राजेंद्र क्षेत्री बताते हैं कि सरकार ने कानून लाकर साल 2003 में सिक्किम में रासायनिक खाद और पेस्टिसाइड्स के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी।

 राज्य में अगर कोई खाद या कीटनाशक का प्रयोग करता पाया गया तो दो लाख रुपये जुर्माना है। इससे फायदा हुआ किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर रिटर्न मिलने लगा। मैं गंगटोक के सब्जी बाजार में जाता हूं। स्थानीय आलू जो आर्गेनिक है 30 से 40 रुपये किलो बिक रहा है तो सिलिगुड़ी से आने वाले आलू 20 रुपये किलो। अब बेहतर मार्केटिंग सिस्टम से किसानों को उनके आर्गेनिक उत्पादों का बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है। राज्य की सरकारी एजेंसियां इसके लिए काम कर रही हैं। सिमफेड ने किसानों के उत्पादों के  मार्केटिंग के लिए 200 के करीब कोआपरेटिव सोसाइटियां बनाई हैं जो किसानों से उनके उत्पाद उनके खेतों से खरीद लेते हैं। ये उत्पाद न सिर्फ दूसरे राज्यों बल्कि विदेशों में भी भेजे जा रहे हैं। किसानों को भुगतान करने की सिस्टम पारदर्शी है। उन्हें 15 दिनों में भुगतान मिल जाता है।

किन उत्पादों की खेती - आर्गेनिक खेती के तहत सिक्किम के किसान धनिया, अदरक जैसे मसाले, फलों में संतरा तो सब्जियों में आलू, बिन्स,  बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न उगाते हैं। कुछ इलाकों में धान की भी खेती होती है। इसके अलावा हल्दी, बक ह्वीट (हिंदी प्रदेश में कूटू कहते हैं),  और कई तरह के औषधीय पौधों की भी खेती हो रही है।


आर्गेनिक टूरिज्म भी - सिर्फ खेती ही नहीं बल्कि सिक्किम में आर्गेनिक टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। सिक्किम आने वाले सैलानियों के लिए गांव में होम स्टे का ऑफर दिया जाता है। इसे नेचर टूरिज्म का नाम दिया गया है। इस दौरान सैलानियों को पूरी तरह आर्गेनिक फूड खाने में परोसा जाता है। साथ ही सैलानियों को आर्गेनिक फार्मिंग वाले खेत भी दिखाए जाते हैं। इस दौरान सैलानी चाहें तो किसानों से सीधे आर्गेनिक उत्पाद खरीद भी सकते हैं।
दूसरे राज्यों ने ली प्रेरणा - सिक्किम की कोशिशों से दूसरे राज्य भी प्रेरणा ले रहे हैं। नगालैंड और मिजोरम जैसे राज्यों ने भी खुद को 100 फीसदी आर्गेनिक खेती वाला राज्य बनाने की इच्छा जताई है। उत्तराखंड ने अपने कई पहाड़ी जिलों में आर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देने की शुरुआत की है। साल 2004 में उत्तराखंड आर्गेनिक सार्टिफिकेशन बोर्ड का गठन किया गया। साल 2005 में भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने आर्गेनिक खेती के लिए राष्ट्रीय परियोजना की शुरूआत की। इस क्रम में नवंबर 2005 में पहली बार बेंगलुरू के लालबाग में इंडिया आर्गेनिक 2005 नामक इंटनेशनल ट्रेड फेयर का आयोजन किया गया। बाद में केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की सरकारें भी अपने यहां आर्गेनिक फार्मिंग की नीति लेकर आई। अब नेशनल हार्टिकल्चर मिशन के तहत भी आर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
पवन कुमार चामलिंग जो सिक्किम को मुख्यमंत्री के तौर पर 17 सालों से ज्यादा समय से नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं, उनकी इच्छा है कि सिक्किम के हरित वातावारण बनाने के लिए नॉन बायोडिग्रेडबल उत्पादों ( प्लास्टिक पॉलीथीन जैसे उत्पाद जो आसानी से नष्ट नहीं होते ) को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाए। चामलिंग साहब ने यह साबित कर दिया है कि इच्छा शक्ति हो तो बड़े बदलाव असंभव नहीं हैं। शाबाश सिक्किम। http://www.sikkimorganicmission.gov.in/

-    विद्युत प्रकाश मौर्य ( vidyutp@gmail.com)

 (SIKKIM, GANGTOK, ORGANIC FARMING, PAWAN KUMAR CHAMLING, AGRICULTURE) 

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