Friday, December 4, 2015

हैदराबाद की मूसी नदी को बचाएं

चेन्नई से हैदराबाद जाते समय रेलगाड़ी की खिड़की से मूसी नदी नजर आती है। नदी क्या है आप नाले जैसी भी नहीं दिखाई देती। सिर्फ नदी की स्मृति भर रह गई है। इस नदी के उद्धार के भी प्रयास होने चाहिए। मूसी नदी का गौरवशाली इतिहास रहा है। हैदराबाद नगर मूसी नदी के तट पर बसा है। यह नदी नगर को पुराने शहर और नए शहर में बांटती है। पुराने समय में इसे मुछकुंडा नदी के नाम से जाना जाता था। कभी ये नदी हैदराबाद शहर के लिए पानी का मुख्य स्रोत हुआ करती थी। मूसी नदी रंगारेड्डी जिले के अनंत गिरी पहाड़ियों से निकलती है। आगे जाकर कृष्णा नदी में मिल जाती है।


हैदराबाद की मूसी नदी जो अब नाले की तरह दिखाई देती है....
मूसी नदी की लंबाई 240 किलोमीटर है। पर हैदराबाद के शहरी सीमा में नदी अतिक्रमण का शिकार है। हैदराबाद में रहते हुए चादरघाट में कई बार मूसी नदी को पार करते हुए सोचता था कि नदी के साथ हमने ये कैसा व्यवहार किया है। 1908 में मूसी नदी में आई बाढ़ ने हैदराबाद में कहर बरपाया था। पर अब लोग भूल चुके हैं कि इस नदी में पानी भी होता है। अब इसमें करोड़ो लीटर कचरा, सीवेज और गंदा पानी मूसी नदी में बहाया जाता है। इसकी सफाई के सारे अभियान फेल हुए हैं। साल 2013 में मूसी नदी की सफाई के ले 900 करोड़ की योजना बनाने की खबर आई थी। इसका कुछ लाभ आने वाले दिनों में शायद देखने को मिले। नदी के 75 किलोमीटर के दायरे में 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना है।

ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसपल कारपोरेशन 1032 एमएलडी सीवेज और गंदा पानी मूसी नदी में बहाता है। घोर शर्मनाक है। नदियां हमें जीवन देती हैं। इसके किनारे सभ्यताएं फली फूली। अब हम उनकी हत्या करने पर तुले हैं। देश में सिर्फ गंगा सफाई की बात हो रही है। मूसी जैसी तमाम नदियों के बारे में सोचने की जरूरत है। अब तेलंगाना की नई सरकार में केसीआर ने भी मूसी को साफ करने का बीड़ा नए सिरे से उठाया है। उम्मीद है उनकी कोशिशें रंग लाएंगी।


चेन्नई से हैदराबाद वाया फलकनुमा रेलवे स्टेशन 

चेन्नई से हैदराबाद की कुल दूरी 770 किलोमीटर है। पर दक्षिण की दो राजधानियों को जोडने वाली ट्रेनें ज्यादा नहीं हैं। दिन भर में कुल चार ट्रेनें हैं दोनों शहरों के बीच। दो ट्रेनें रेनुगुंटा करनूल टाउन होकर जाती हैं, एक गुडुर नेल्लोर जंक्शन होकर तो चारमीनार एक्सप्रेस गुडुर-विजयवाड़ा-वारंगल होकर जाती है। इन चार ट्रेनों आपका आरक्षण कन्फर्म नहीं हुआ तो यात्रा मुश्किल है। हमारा आरक्षण चेन्नई इग्मोर से शाम को 5 बजे खुलने वाली काचीगुडा एक्सप्रेस में कनफर्म हो गया था। सो हम निश्चिंत थे। प्लेटफार्म नंबर 6 से ट्रेन अपने नियत समय पर खुल गई।

एक सहयात्री करनूल जा रहे थे। वे भी इस बात को लेकर दुखी थे कि हमारे करनूल शहर के लिए सिर्फ दो ट्रेनें चेन्नई से  हैं। अगर इनमें टिकट नहीं मिला तो सफर दुखद हो जाता है। रास्ते में आठ बजे रेणुगुंटा में ट्रेन आधे घंटे रुकी। यहां से तिरूपति बालाजी के तिरुमला पहाडी के दर्शन ट्रेन से भी होते हैं। रेणुगुंटा तिरुपति के पास का स्टेशन है। रेणुगुंटा स्टेशन पर खाना पीना मिलता है पर गुणवत्ता बहुत अच्छी नहीं है। हमारे सहयात्री बाहर से जाकर अपने लिए खाना लेकर आ गए। हमने तो इग्मोर स्टेशन पर ही खाना पैक करा लिया था।

सुबह हुई तो ट्रेन हैदराबाद के करीब थी। एक स्टेशन आया बुडवेल। उसके बाद फलकनुमा रेलवे स्टेशन। फलकनुमा में किला है। पर यह अब होटल में तब्दील हो गया है। फलकनुमा पैलेस  हैदराबाद के श्रेष्ठ किलों से एक है। यह हैदराबाद के निजाम स्टेट से सम्बन्ध रखता है। फलकनुमा पैलेस में 32 एकड़ क्षेत्र पर फैला हुआ है। इसे 1893 में हैदराबाद के प्रधानमंत्री रहे नवाब वकीर उल उमरा ने बनवाया था। यह पैलेस तब चर्चा में आया था जब फिल्मस्टार सलमान खान की बहन की शादी की रस्में यहां पर हुई थीं। सन 2000 में इसे ताज समूह ने अधिग्रहण कर लग्जरी होटल में तब्दील कर दिया।

यह अक्तूबर महीने की एक सुहानी सुबह है। हम काचीगुडा रेलवे स्टेशन पहुंच गए हैं। हैदराबाद सिकंदराबाद के बाद तीसरा शहरका बड़ा स्टेशन। सफेद गुंबदों वाला स्टेशन दूर से काफी भव्य लग रहा है। हम ट्रेन से निकलकर फ्लाईओवर से बाहर की ओ आते हैं। हमारे रत्नाराव चाचा जी अपनी गाड़ी लेकर हमें घर ले जाने स्टेशन पहुंच चुके थे। - vidyutp@gmail.com
हैदराबाद का काचीगुडा़ रेलवे स्टेशन 
( MUSI RIVER, HYDRABAD, FALAKNUMA, KACHIGUDA,) 


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